मथुरा नगर निगम में सफाईकर्मी भर्ती को लेकर विवाद, कर्मचारी महासंघ ने नगर आयुक्त के समर्थन में किया प्रदर्शन
रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज
मथुरा। नगर निगम में 500 सफाईकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में पात्रता और पारदर्शिता को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद नगर आयुक्त ओजस्वी राज द्वारा जांच कमेटी गठित किए जाने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। नगर आयुक्त के साथ कथित अभद्रता और उनकी सरकारी गाड़ी के घेराव की घटना के विरोध में राज्य स्वायत्त शासन कर्मचारी परिषद उत्तर प्रदेश के पदाधिकारी और कर्मचारी शुक्रवार को नगर निगम परिसर में एकजुट हुए और प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी परिषद के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने नगर आयुक्त के समर्थन में नारे लगाए। साथ ही, लेबर यूनियन की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जताई गई। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं, उन्होंने 500 सफाईकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया को जांच पूरी होने के बाद ही आगे बढ़ाने की मांग की।
500 सफाईकर्मियों की भर्ती को लेकर उठे सवाल
कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष हरीश यादव और कोषाध्यक्ष अरुण खंडेलवाल ने बताया कि नगर निगम में लेबर यूनियन के तहत 500 सफाईकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। परिषद के अनुसार, भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों की ट्रेनिंग भी पूरी कराई जा चुकी है। इसी बीच कुछ लोगों की ओर से भर्ती प्रक्रिया में पात्रता और पारदर्शिता को लेकर शिकायतें नगर आयुक्त के सामने रखी गईं।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने भर्ती प्रक्रिया को तत्काल रोक दिया। इसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई। कर्मचारी परिषद का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है।
पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन
नगर आयुक्त की ओर से गठित जांच कमेटी की अध्यक्षता अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार को सौंपी गई है। कमेटी में एमएनएलपी रामकृष्ण पांडेय और अपर नगर आयुक्त सुनीता सिंह को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा लेबर यूनियन के दो प्रतिनिधियों अजय चौधरी और प्रीतम सिंह को भी जांच कमेटी में स्थान दिया गया है।कर्मचारी परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि लेबर यूनियन के प्रतिनिधियों को भी कमेटी में शामिल किए जाने से जांच प्रक्रिया में सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। परिषद के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
कर्मचारी परिषद ने लगाए गंभीर आरोप
कर्मचारी परिषद के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि निष्पक्ष जांच के निर्णय के बाद लेबर यूनियन से जुड़े कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। परिषद ने दावा किया कि लेबर यूनियन के नेता अजय चौधरी और प्रीतम सिंह इस विरोध को आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का पक्ष इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है।
परिषद का यह भी आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में वास्तविक पात्र और जरूरतमंद लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। संगठन का कहना है कि जांच कमेटी के माध्यम से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि भर्ती के लिए निर्धारित मानकों का पालन हुआ है या नहीं।
नगर आयुक्त की गाड़ी घेरने का आरोप
विवाद उस समय और बढ़ गया जब 25 सितंबर को लेबर यूनियन के कार्यकर्ताओं द्वारा नगर आयुक्त की सरकारी गाड़ी का घेराव किए जाने का आरोप सामने आया। कर्मचारी परिषद के पदाधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शन कर रहे कुछ लोग नगर आयुक्त की गाड़ी के सामने बैठ गए और उन्हें वाहन में बैठने से रोकने का प्रयास किया।
परिषद ने आरोप लगाया कि इस दौरान नगर आयुक्त के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया गया। इस घटना के बाद नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों में नाराजगी देखने को मिली। कर्मचारी परिषद ने कहा कि अधिकारियों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यस्थल की गरिमा के लिहाज से उचित नहीं है।
नगर आयुक्त के समर्थन में कर्मचारी हुए एकजुट
घटना के विरोध में राज्य स्वायत्त शासन कर्मचारी परिषद उत्तर प्रदेश के पदाधिकारी और कर्मचारी नगर निगम परिसर में एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने नगर आयुक्त के समर्थन में आवाज उठाई और कथित अभद्रता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
परिषद का कहना है कि कर्मचारी और अधिकारी मिलकर नगर निगम की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करते हैं। ऐसे में किसी अधिकारी के साथ विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर उसका समाधान निर्धारित प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। परिषद ने कहा कि विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन अधिकारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखना भी जरूरी है।
जांच रिपोर्ट के बाद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग
कर्मचारी परिषद ने मांग की है कि 500 सफाईकर्मियों की भर्ती से संबंधित जांच को जल्द पूरा कराया जाए। परिषद के मुताबिक, जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि पात्रता और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों का समाधान हो सके।
इसके साथ ही परिषद ने नगर आयुक्त के साथ कथित अभद्रता के मामले में भी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि किसी अधिकारी के साथ इस तरह की घटना होती है तो इससे कर्मचारियों के बीच भी असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है।

