कानपुर में चुनाव आयोग के खिलाफ समाजवादी युवजन सभा का प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

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रिपोर्ट- सुहैल अंसारी

कानपुर। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच कानपुर में समाजवादी युवजन सभा ने चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज उठाई। समाजवादी युवजन सभा कानपुर महानगर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जनहित का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा चुनाव में बैलेट पेपर की व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर कई सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अनियमितताओं की आशंका बनी हुई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड को अपडेट करने और सूची में मौजूद विसंगतियों को दूर करने की प्रक्रिया बताया जाता रहा है।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

समाजवादी युवजन सभा के नेताओं ने आरोप लगाया कि देश की शीर्ष संवैधानिक और जांच संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने विशेष रूप से चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर चिंता जाहिर की। उनका दावा है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक के मताधिकार पर असर न पड़े।

प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े राजनीतिक आरोप भी लगाए। इन आरोपों को संगठन के राजनीतिक दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी संस्था द्वारा किसी राजनीतिक दल के पक्ष में जानबूझकर चुनाव कराने या मतदाता सूची में भ्रष्टाचार करने के आरोप की पुष्टि के लिए ठोस और स्वतंत्र प्रमाण आवश्यक हैं।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी मुद्दा

प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के अन्य सदस्यों के बीच कथित मतभेदों का मुद्दा भी उठाया गया। हालिया मीडिया रिपोर्टों में SIR सहित कुछ प्रक्रियाओं को लेकर चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियों और मतभेदों की चर्चा हुई है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले महीनों में कई मामलों पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।

हालांकि, इन मतभेदों को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इसलिए किसी अधिकारी द्वारा इस्तीफे की धमकी देने या किसी विशेष प्रकार के भ्रष्टाचार में शामिल होने जैसे दावों को आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

समाजवादी युवजन सभा ने ज्ञापन के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया में बैलेट पेपर की व्यवस्था बहाल करने की मांग भी रखी। संगठन का कहना है कि इससे मतदान प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता, मतदाता सूची की जांच और शिकायतों के प्रभावी निस्तारण की मांग की।

वहीं, चुनाव व्यवस्था से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड में कानपुर जिले के लिए 2026 की अंतिम मतदाता सूची और SIR से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल पर मतदाता सूची, दावे-आपत्तियां और SIR से संबंधित जानकारी प्रकाशित की गई है।

SIR को लेकर पहले से राजनीतिक बहस

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक बहस तेज रही है। विपक्षी दलों ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि SIR से संबंधित नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता का नाम सूची से हटने का प्रमाण नहीं है। आयोग के अनुसार, कई मामलों में नोटिस रिकॉर्ड की जानकारी के सत्यापन और विसंगतियों को दूर करने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

कानपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी पोर्टल पर भी SIR-2026 की मतदाता सूची, नो-मैपिंग और तार्किक विसंगतियों से संबंधित सूचनाएं तथा दावे-आपत्तियों के लिए निर्धारित फॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं।

ज्ञापन के जरिए रखी गईं मांगें

समाजवादी युवजन सभा कानपुर महानगर की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने, चुनाव प्रक्रिया में बैलेट पेपर का विकल्प लागू करने और मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग रखी गई। संगठन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठने वाले प्रत्येक सवाल का पारदर्शी तरीके से समाधान होना चाहिए।

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