सोनभद्र में 24 नवंबर तक निषेधाज्ञा, पर्व-त्योहार और परीक्षाओं को लेकर प्रशासन ने जारी किए निर्देश

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रिपोर्टर- ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी

सोनभद्र। आगामी पर्व-त्योहारों, महत्वपूर्ण प्रतियोगी एवं शैक्षणिक परीक्षाओं और विभिन्न संगठनों के संभावित धरना-प्रदर्शन को देखते हुए सोनभद्र जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के निर्देश पर जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। यह आदेश 25 सितंबर 2026 से 24 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन ने इस अवधि में सार्वजनिक शांति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए हैं।

25 सितंबर से 24 नवंबर तक प्रभावी रहेगा आदेश

प्रशासन के अनुसार, आने वाले दिनों में जिले में कई पर्व-त्योहार आयोजित होने हैं। इसके साथ ही विभिन्न प्रतियोगी और शैक्षणिक परीक्षाएं भी प्रस्तावित हैं। वहीं, विभिन्न संगठनों की ओर से धरना-प्रदर्शन और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती व्यवस्था लागू की है।

इसी क्रम में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित स्थिति में शांति व्यवस्था बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बिना अनुमति सभा और जुलूस पर रोक

निषेधाज्ञा लागू रहने के दौरान जिला मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट या संबंधित उप जिलाधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की सभा, धरना-प्रदर्शन अथवा जुलूस आयोजित नहीं किया जा सकेगा।

हालांकि, प्रशासन ने धार्मिक मेलों, बारात और शव यात्राओं को इस प्रतिबंध से अलग रखा है। यानी इन निर्धारित गतिविधियों का आयोजन संबंधित परंपराओं और लागू नियमों के अनुसार किया जा सकेगा।

इसके अलावा किसी सार्वजनिक स्थान पर ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं होगी, जिससे यातायात प्रभावित हो या आम लोगों को असुविधा का सामना करना पड़े। प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आदेश का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित कराएं।

अस्त्र-शस्त्र और ज्वलनशील सामग्री पर प्रतिबंध

निषेधाज्ञा के तहत सार्वजनिक स्थानों पर अस्त्र-शस्त्र, आग्नेयास्त्र, विस्फोटक अथवा ज्वलनशील सामग्री लेकर चलने या उन्हें एकत्र करने पर रोक रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सार्वजनिक आयोजन के दौरान ऐसी सामग्री का इस्तेमाल या प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा।

इसी तरह जुलूस, सभा और रैलियों में लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर अथवा अन्य आपत्तिजनक सामग्री लेकर चलने पर भी प्रतिबंध रहेगा। इन प्रावधानों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति की संभावना को कम करना है।

भ्रामक और उत्तेजनात्मक प्रचार सामग्री पर नजर

प्रशासन ने जाति, वर्ग या समुदायों के बीच तनाव उत्पन्न करने वाली प्रचार सामग्री के प्रसार पर भी रोक लगाई है। पोस्टर, पर्चे, नारे या किसी अन्य माध्यम से ऐसी सामग्री का प्रचार नहीं किया जा सकेगा, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो।

इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रशासन की विशेष निगरानी रहेगी। फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल माध्यमों पर अफवाह, भ्रामक या उत्तेजनात्मक सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया ग्रुप एडमिन को भी निर्देश

प्रशासन ने सोशल मीडिया ग्रुप एडमिन को भी विशेष जिम्मेदारी दी है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि वे अपने ग्रुप में ऐसी किसी भी सामग्री के प्रसार को रोकें, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो। यदि किसी ग्रुप में भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित होती है, तो ग्रुप एडमिन को तत्काल संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।

इस प्रकार प्रशासन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सतर्कता बढ़ाने का निर्णय लिया है। खासतौर पर पर्व-त्योहार और परीक्षाओं के दौरान अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बाजार और प्रमुख स्थानों पर बढ़ेगी निगरानी

निषेधाज्ञा के दौरान जिले के संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की निगरानी बढ़ाई जाएगी। बाजारों, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशनों, प्रमुख चौराहों, होटल-रेस्टोरेंट और मदिरा दुकानों के आसपास विशेष सतर्कता बरती जाएगी।

इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली ऐसी गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी, जिनसे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। प्रशासन का प्रयास है कि पर्व-त्योहारों के दौरान आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो और परीक्षाओं में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को शांतिपूर्ण वातावरण मिल सके।

यातायात बाधित करने और पुतला दहन पर रोक

निषेधाज्ञा के तहत सार्वजनिक मार्गों पर यातायात बाधित करने वाली गतिविधियों पर भी प्रतिबंध रहेगा। सरकारी कार्य में अवरोध डालना, सार्वजनिक स्थानों पर आपत्तिजनक पोस्टर लगाना और पुतला दहन जैसे प्रदर्शनों को भी प्रतिबंधित किया गया है।

प्रशासन के मुताबिक, इन प्रतिबंधों का उद्देश्य किसी संगठन या व्यक्ति की गतिविधियों को अनावश्यक रूप से प्रभावित करना नहीं, बल्कि निर्धारित अवधि में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है। आवश्यक कार्यक्रमों के लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेने की व्यवस्था रखी गई है।

अधिकारियों को कड़ाई से पालन कराने के निर्देश

जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने संबंधित अधिकारियों को निषेधाज्ञा का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से भी अपील की गई है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें।

साथ ही, किसी संदिग्ध या आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार से बचने और ऐसी सूचना मिलने पर तत्काल प्रशासन अथवा पुलिस को अवगत कराने की अपील की गई है। प्रशासन का कहना है कि पर्व-त्योहारों और परीक्षाओं के दौरान जिले में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कुल मिलाकर, सोनभद्र में 25 सितंबर से 24 नवंबर 2026 तक लागू निषेधाज्ञा के तहत सभा, जुलूस, धरना-प्रदर्शन, हथियार अथवा ज्वलनशील सामग्री के सार्वजनिक प्रदर्शन, भ्रामक प्रचार और यातायात बाधित करने वाली गतिविधियों पर विशेष निगरानी रहेगी। वहीं धार्मिक मेले, बारात और शव यात्राओं को निर्धारित प्रतिबंधों से छूट दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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