अमरोहा में सरकारी जमीन की खबरें चलाने के बाद पत्रकार पर शिकायत, डीएम-एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग

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Digital UP News Desk

अमरोहा/नौगांवा सादात। सरकारी जमीन और कथित अवैध निर्माण से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने के बाद अपने विरुद्ध शिकायत किए जाने का मामला सामने आया है। नौगांवा सादात क्षेत्र के ग्राम खेड़ा अपरोला निवासी पत्रकार इकबाल अंसारी ने अपने खिलाफ की गई शिकायत को निराधार बताते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।

पत्रकार इकबाल अंसारी के मुताबिक, ग्राम बीलना में गाटा संख्या 564 से संबंधित सरकारी भूमि पर कथित कब्जे और निर्माण की शिकायत उन्हें प्राप्त हुई थी। इसके बाद उन्होंने मामले को समाचारों के माध्यम से सामने लाया। उनका दावा है कि इस प्रकरण में राजस्व विभाग की ओर से जांच की गई थी। जांच के दौरान सरकारी भूमि पर कथित निर्माण की स्थिति सामने आने के बाद निर्माण कार्य रुकवाए जाने की कार्रवाई भी हुई थी।

हालांकि, पत्रकार का कहना है कि कुछ समय बाद संबंधित स्थान पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को इसकी सूचना देते हुए शिकायत की। उनका कहना है कि सरकारी भूमि और कथित अवैध निर्माण से जुड़े समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद कुछ लोगों की ओर से उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया।

23 सितंबर को शिकायत किए जाने का दावा

इकबाल अंसारी के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली कि 23 सितंबर को उनके विरुद्ध कलेक्ट्रेट में शिकायत की गई है। शिकायत में उन पर अवैध उगाही, महिला से छेड़खानी, पैसे लेने सहित कई आरोप लगाए जाने की बात कही गई है। पत्रकार ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है।

उन्होंने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि संबंधित आरोपों की जांच निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए। पत्रकार का दावा है कि वह पिछले करीब दो माह से संबंधित स्थानों पर गए ही नहीं हैं। ऐसे में उनके अनुसार, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के माध्यम से यह तथ्य जांचा जा सकता है कि वह संबंधित स्थान पर मौजूद थे या नहीं।

मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों से जांच की मांग

पत्रकार ने अपनी शिकायत में जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों को भी शामिल करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि मोबाइल लोकेशन, कॉल संबंधी उपलब्ध तकनीकी जानकारी और अन्य डिजिटल साक्ष्य आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं।

इसके अलावा उन्होंने अपने द्वारा प्रकाशित समाचारों और पूर्व में की गई शिकायतों को भी जांच का हिस्सा बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी भूमि से जुड़े मामले में उनके द्वारा की गई खबरों और शिकायतों का रिकॉर्ड यह समझने में मदद कर सकता है कि विवाद की शुरुआत किस घटनाक्रम के बाद हुई।

सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने का आरोप

इकबाल अंसारी ने यह भी आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर उनके संबंध में कुछ वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से इन वीडियो की भी जांच कराने की मांग की है। पत्रकार के अनुसार, यदि किसी वीडियो के माध्यम से उनके संबंध में कोई आरोप या दावा किया गया है, तो उसके स्रोत, समय और संदर्भ की भी जांच की जानी चाहिए।

उन्होंने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से अनुरोध किया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने जांच में मोबाइल लोकेशन, समाचार प्रकाशन, पूर्व शिकायतों तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री जैसे उपलब्ध साक्ष्यों को शामिल करने की मांग की है।

आरोप गलत पाए जाने पर कार्रवाई की मांग

पत्रकार ने अधिकारियों से यह भी कहा है कि यदि जांच के दौरान उनके खिलाफ लगाए गए आरोप असत्य पाए जाते हैं, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उन्होंने स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने का अनुरोध किया है।

फिलहाल, इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोप और उनके द्वारा अधिकारियों को दिए गए प्रार्थना पत्र की जानकारी सामने आई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए मामले में प्रशासन और पुलिस की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में राजस्व अभिलेख, मौके की स्थिति और संबंधित पक्षों के दस्तावेज महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं। वहीं, किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों की पुष्टि भी स्वतंत्र जांच और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही की जा सकती है। ऐसे में दोनों पक्षों के तथ्यों और साक्ष्यों की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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