कानपुर में SIR और ECINET प्रक्रिया पर सवाल, समाजवादी युवजन सभा ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
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कानपुर: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) और ECINET/मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर कानपुर में समाजवादी युवजन सभा ने सवाल उठाए हैं। संगठन के कानपुर महानगर अध्यक्ष एवं अधिवक्ता अर्पित त्रिवेदी ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर इन प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ज्ञापन में मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा, मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम सुनिश्चित करने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाए जाने की मांग की गई है। इसके अलावा संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त की जांच कराने और महाभियोग की कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई है। ये सभी मांगें ज्ञापन देने वाले संगठन की ओर से की गई हैं।
भारत निर्वाचन आयोग मतदाता सूची के पुनरीक्षण और मतदाता सेवाओं के लिए विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है। आयोग की वेबसाइट पर SIR-2026 से संबंधित मतदाता सूची खोजने की सुविधा के साथ-साथ मतदाता पंजीकरण, आवेदन की स्थिति देखने और मतदाता विवरण में संशोधन जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं।
मतदाता सूची को लेकर उठाए सवाल
ज्ञापन में समाजवादी युवजन सभा ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। संगठन का कहना है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए और उचित प्रक्रिया के बिना किसी मतदाता का नाम हटाया नहीं जाना चाहिए।
अर्पित त्रिवेदी के अनुसार, SIR तथा मतदाता पंजीकरण और संशोधन की डिजिटल प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग स्तरों पर विसंगतियों और पारदर्शिता से जुड़े सवाल सामने आ रहे हैं। इसी आधार पर संगठन ने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का कोई विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए इन्हें संगठन के आरोप और मांग के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
SIR प्रक्रिया पर संगठन की आपत्ति
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और आवश्यक संशोधन से जुड़ा है। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर SIR-2026 के लिए मतदाता अपना नाम और पुराने SIR के रिकॉर्ड में विवरण खोज सकते हैं। आयोग के पोर्टल पर यह भी बताया गया है कि उपलब्ध पुराने मतदाता रिकॉर्ड संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर प्रकाशित किए गए हैं।
इसी प्रक्रिया को लेकर समाजवादी युवजन सभा ने सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि मतदाताओं को सत्यापन संबंधी नोटिस मिलने, रिकॉर्ड में कथित विसंगतियों और डिजिटल प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए।
संगठन ने मांग की है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
ECINET और डिजिटल मतदाता सेवाओं का मुद्दा
ज्ञापन में ECINET और मतदाता पंजीकरण से जुड़ी डिजिटल प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। निर्वाचन आयोग वर्तमान में मतदाताओं के लिए ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराता है। इनमें नए मतदाता के रूप में पंजीकरण, आवेदन की स्थिति की जानकारी, ई-EPIC डाउनलोड करने तथा मतदाता सूची में विवरण सुधारने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
समाजवादी युवजन सभा का आरोप है कि डिजिटल प्रक्रिया से संबंधित कुछ मामलों में शिकायतें और विसंगतियां सामने आई हैं। संगठन ने इनकी जांच कराने की मांग की है।
हालांकि, डिजिटल मतदाता सेवाओं में किसी व्यापक स्तर की अनियमितता स्थापित होने की पुष्टि इन आरोपों से अलग आधिकारिक जांच या रिपोर्ट से ही हो सकती है। इसलिए ज्ञापन में लगाए गए आरोपों और निर्वाचन आयोग की आधिकारिक व्यवस्था के बीच अंतर को समझना जरूरी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त की जांच की मांग
ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त की जांच की मांग भी की गई है। इसके साथ ही समाजवादी युवजन सभा ने महाभियोग की कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग राष्ट्रपति के समक्ष रखी है।
यह मांग संगठन की ओर से ज्ञापन के माध्यम से रखी गई है। किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ आरोपों या कार्रवाई की मांग पर अंतिम स्थिति संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही तय हो सकती है।
भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों के रूप में सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी का उल्लेख है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
अर्पित त्रिवेदी ने ज्ञापन में मांग की कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से संचालित की जाए। उनका कहना है कि पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखना निर्वाचन प्रक्रिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
संगठन ने यह भी मांग की है कि मतदाताओं के रिकॉर्ड में सामने आने वाली किसी भी विसंगति का समाधान स्पष्ट प्रक्रिया के तहत किया जाए। इसके अलावा, सत्यापन संबंधी नोटिस मिलने वाले मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए उचित अवसर दिए जाने की मांग भी ज्ञापन में रखी गई है।
इससे पहले भी मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों तथा विभिन्न संगठनों की ओर से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में आधिकारिक रिकॉर्ड, दावे और संबंधित संस्थाओं के जवाब को अलग-अलग देखना आवश्यक होता है।
पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग
ज्ञापन का एक प्रमुख मुद्दा पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने से जुड़ा है। संगठन ने कहा है कि किसी भी पात्र नागरिक को केवल तकनीकी या प्रक्रिया संबंधी समस्या के कारण मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए।
वहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाताओं के लिए ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिनके माध्यम से नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम खोज सकते हैं और अपने आवेदन या विवरण से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
ऐसे में मतदाताओं के लिए भी जरूरी है कि वे अपने नाम और विवरण की समय रहते जांच करें तथा किसी समस्या की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज करें।
ये लोग रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान पिंटू ठाकुर, दीपा यादव, विकास वर्मा, मुकेश गुप्ता, केशव यादव, संगीता देवी, बाबू अली, प्रवीण मिश्रा, सुकांत शर्मा, आदित्य सिंह, मनीष यादव, राहुल यादव और सुधांशु पटेल समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
समाजवादी युवजन सभा ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े विषयों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। संगठन ने राष्ट्रपति के नाम भेजे गए ज्ञापन के माध्यम से संबंधित प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
कुल मिलाकर, कानपुर में समाजवादी युवजन सभा ने SIR और ECINET/मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। संगठन ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर निष्पक्ष जांच, मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और मुख्य चुनाव आयुक्त की जांच की मांग की है। इन आरोपों पर आगे की स्थिति संबंधित अधिकारियों या सक्षम संवैधानिक संस्थाओं की कार्रवाई और आधिकारिक जांच से स्पष्ट होगी।

