जंतर-मंतर से पटना तक CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन, कई हिरासत में; पुलिस ने किया वॉटर कैनन का इस्तेमाल

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रिपोर्ट- अमित सिंह यादव 

नई दिल्ली/पटना। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर शुक्रवार को देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग जुटे और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।

दिल्ली में प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल पर कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई और पुलिस बल के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई। प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र से आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा घेरा बनाया गया था। इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

जंतर-मंतर पर AISA का प्रदर्शन

दिल्ली में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की ओर से जंतर-मंतर पर नागरिक विरोध प्रदर्शन और जनसभा आयोजित की गई। प्रदर्शन में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दे उठाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, योगेंद्र यादव और भाकपा-माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य समेत कई लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। पुलिस ने योगेंद्र यादव समेत करीब 40 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। वहीं, कुछ संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और इस्तीफे की मांग को भी प्रमुखता से उठाया।

जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए। आसपास के मार्गों पर बैरिकेडिंग और आवाजाही को नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई, जिससे प्रदर्शन स्थल के आसपास यातायात भी प्रभावित रहा।

पटना में कांग्रेस का विरोध मार्च

इसी मुद्दे को लेकर बिहार की राजधानी पटना में भी कांग्रेस ने विरोध मार्च निकाला। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी की ओर से आर. ब्लॉक स्थित चाणक्य होटल के पास से राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर मार्च आयोजित किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ता मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े।

प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई की पुष्टि समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट में भी हुई है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची और SIR से जुड़े कई सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी दोहराई गई। हालांकि, निर्वाचन आयोग की ओर से निर्णय प्रक्रिया को लेकर अलग रुख सामने आया है और आयोग ने फैसलों को अपनी संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

कई राज्यों में प्रदर्शन

शुक्रवार को विरोध का असर केवल दिल्ली और पटना तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस की ओर से विभिन्न राज्यों में राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने का आह्वान किया गया था। इसके बाद कई स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक सड़कों पर उतरे।

रिपोर्टों के अनुसार, चंडीगढ़ में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।

इसी तरह देहरादून समेत अन्य शहरों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर विरोध दर्ज कराया।

मतदाता सूची और SIR बना मुख्य मुद्दा

विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक और सार्वजनिक बहस है। कांग्रेस और कुछ अन्य संगठनों ने मतदाता सूची में संभावित बदलावों और नामों से जुड़े सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इन मामलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग भी की है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग से जुड़े पक्ष ने निर्णय लेने की अपनी प्रक्रिया और संस्थागत व्यवस्था पर जोर दिया है। ऐसे में मतदाता सूची से संबंधित दावों और आरोपों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए आधिकारिक दस्तावेजों तथा निर्वाचन आयोग के जवाबों को देखना महत्वपूर्ण होगा।

2 अक्टूबर से आंदोलन की घोषणा

इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। संगठन की ओर से जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन करने की बात कही गई है।

वहीं, प्रदर्शनकारी संगठनों की प्रमुख मांगों में मतदाता सूची से जुड़े सवालों का बिंदुवार जवाब और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता शामिल है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और चर्चा में रहने की संभावना है।

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