बदायूं के जरीफनगर में भाजपा विधायक के भतीजे पर किसान यूनियन ने लगाया बड़ा आरोप, पढ़िए आखिरकार हुआ क्या?
रिपोर्ट – विपिन यादव
बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के जरीफनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जहां किसान यूनियन ने भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता के भतीजे मयंक गुप्ता को लेकर कई आरोप लगाए हैं। किसान यूनियन का दावा है कि मयंक गुप्ता कथित तौर पर अपनी गाड़ी पर ‘विधायक’ लिखवाकर क्षेत्र में लोगों पर प्रभाव बनाने और गरीब लोगों को डराने-धमकाने का काम करते हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस या प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता वर्तमान में बदायूं विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के निर्वाचित विधायक हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उनका नाम बदायूं विधानसभा क्षेत्र-115 के सदस्य के रूप में दर्ज है।
किसान यूनियन ने लगाए कई आरोप
किसान यूनियन की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, मयंक गुप्ता पर क्षेत्र के गरीब और आम लोगों के साथ कथित तौर पर दबाव बनाने का आरोप है। संगठन का कहना है कि उनकी गाड़ी पर ‘विधायक’ लिखे होने की वजह से कुछ लोगों में प्रभाव या दबाव की स्थिति बनती है।
इसके अलावा किसान यूनियन ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ गरीब लोगों के खिलाफ पुलिस में कथित तौर पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, इस संबंध में किसी विशेष मुकदमे या शिकायत की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
किसान यूनियन ने पूरे मामले को लेकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा राजनीतिक पहचान या पद के नाम का इस्तेमाल कर आम लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है, तो उसकी जांच होनी चाहिए।
पुलिस की भूमिका पर भी उठाए सवाल
किसान यूनियन ने अपने आरोपों में पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि कुछ मामलों में गरीब लोगों के खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए पुलिस का कथित रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।
हालांकि, पुलिस की ओर से इस संबंध में क्या कार्रवाई की गई है या किसी शिकायत के आधार पर कोई मुकदमा दर्ज हुआ है, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है। इसलिए इस पहलू पर भी पुलिस का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही या गलत मानने से पहले संबंधित दस्तावेज, पुलिस रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के बयान सामने आना जरूरी है। इसी आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
मुख्यमंत्री से संज्ञान लेने की अपील
किसान यूनियन ने इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी संज्ञान लेने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि या उसके परिचित के नाम का इस्तेमाल कर आम लोगों पर दबाव बनाया जाता है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
किसान यूनियन ने यह भी दावा किया कि इस तरह की घटनाओं से सरकार और मुख्यमंत्री की छवि पर असर पड़ सकता है। यह संगठन की ओर से व्यक्त की गई राय है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसके साथ ही किसान यूनियन ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
विधायक का टिकट काटने की भी मांग
मामले को लेकर किसान यूनियन ने भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता के संबंध में भी राजनीतिक मांग उठाई है। संगठन ने मुख्यमंत्री से आगामी चुनाव में महेश चंद्र गुप्ता को टिकट नहीं देने की अपील की है।
हालांकि, यह किसान यूनियन की राजनीतिक मांग है। किसी उम्मीदवार को टिकट देना या नहीं देना संबंधित राजनीतिक दल का संगठनात्मक और चुनावी निर्णय होता है। मौजूदा मामले में किसान यूनियन की मांग और आरोपों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
महेश चंद्र गुप्ता का नाम उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक सदस्य रिकॉर्ड में बदायूं सीट के भाजपा विधायक के रूप में दर्ज है।
मयंक गुप्ता का नाम पहले भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में आया
उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में मयंक गुप्ता को भाजपा युवा नेता के रूप में भी उल्लेखित किया गया है। फरवरी 2026 में बदायूं के मुस्तफाबाद जरेठा में एक स्कूल के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम से जुड़ी रिपोर्ट में उनके कार्यक्रम में शामिल होने का उल्लेख है।
हालांकि, किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में मौजूदगी अपने आप में किसान यूनियन द्वारा लगाए गए मौजूदा आरोपों की पुष्टि नहीं करती। दोनों विषयों को अलग-अलग देखना आवश्यक है।
निष्पक्ष जांच से स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल जरीफनगर क्षेत्र से जुड़े इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किसान यूनियन ने आरोप लगाकर जांच की मांग की है। दूसरी ओर, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब सामने आना अभी बाकी है।
यदि किसी व्यक्ति पर आम नागरिकों को धमकाने, पुलिस पर दबाव डालने या झूठे मुकदमे दर्ज कराने जैसे आरोप लगाए जाते हैं, तो उनकी जांच दस्तावेजों, शिकायतों, पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर की जानी चाहिए।
ऐसे में अब निगाह स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि कोई औपचारिक शिकायत दी गई है तो उसकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसान यूनियन के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
फिलहाल मामले में किसी व्यक्ति को आरोपों के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। जरीफनगर थाना क्षेत्र से जुड़े इस विवाद में पुलिस या प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

