मुरादाबाद के भोजपुर में ई-कचरा जलान से मंडरा रहा खतरा, धुएं से ग्रामीण परेशान; कार्रवाई को लेकर उठे सवाल

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रिपोर्ट – मोहम्मद अरशद 

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र में कथित तौर पर खुले में ई-कचरा जलाए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय जंगल और ग्रामीण इलाकों के आसपास बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कचरे को जलाया जाता है। इससे निकलने वाले धुएं से आसपास के वातावरण में प्रदूषण फैलने की आशंका है और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, भोजपुर क्षेत्र के जंगलों में रात के अंधेरे में ई-कचरे के निस्तारण के नाम पर उसे जलाने का आरोप है। हालांकि, इस मामले में संबंधित विभागों की ओर से आधिकारिक जांच या कार्रवाई की पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए ई-कचरा जलाने और किसी व्यक्ति या गिरोह की संलिप्तता से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

रात के समय ई-कचरा जलाने का आरोप

स्थानीय लोगों के अनुसार, भोजपुर थाना क्षेत्र के कुछ ग्रामीण इलाकों में रात के समय आग जलने और धुआं उठने की घटनाएं सामने आती हैं। आरोप है कि इन स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले कचरे को इकट्ठा करके खुले में जलाया जाता है।

ई-कचरे में पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, तार, सर्किट बोर्ड, प्लास्टिक और अन्य सामग्री शामिल हो सकती है। जब ऐसी सामग्री को नियंत्रित और अधिकृत प्रक्रिया के बजाय खुले में जलाया जाता है, तो इससे प्रदूषण संबंधी चिंताएं बढ़ जाती हैं।

हालिया स्थानीय रिपोर्टों में भी भोजपुर थाना क्षेत्र के जंगलों में ई-कचरा जलाए जाने और ग्रामीणों की ओर से कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई है।

धुएं को लेकर ग्रामीणों की चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय उठने वाले धुएं से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। विशेष रूप से हवा का रुख गांवों की ओर होने पर धुआं आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचने की बात कही जा रही है।

हालांकि, किसी व्यक्ति की बीमारी या स्वास्थ्य समस्या को सीधे ई-कचरा जलाने से जोड़ने के लिए चिकित्सकीय और पर्यावरणीय जांच जरूरी है। फिर भी, ई-कचरे के असुरक्षित निस्तारण को लेकर स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चिंताएं वैज्ञानिक और नियामकीय स्तर पर दर्ज हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार ई-कचरे में सीसा, कैडमियम, पारा और अन्य संभावित रूप से खतरनाक पदार्थ मौजूद हो सकते हैं। ई-कचरा प्रबंधन का उद्देश्य ही मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभावों से बचाव करना है।

खुले में जलाने से क्यों बढ़ती है चिंता?

ई-कचरे को खुले में जलाने की प्रक्रिया पर्यावरण की दृष्टि से चिंता का विषय मानी जाती है। CPCB ने अनधिकृत तरीके से ई-कचरे के प्रसंस्करण और उसे जलाने से मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात दर्ज की है। इसी कारण ऐसे मामलों में निगरानी और कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई है।

ई-कचरे में मौजूद विभिन्न धातुएं और अन्य पदार्थ यदि अनियंत्रित तरीके से पर्यावरण में पहुंचते हैं, तो उनका असर हवा, मिट्टी और पानी की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। इसलिए ई-कचरे का निस्तारण निर्धारित और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप करना जरूरी है।

अधिकृत रीसाइक्लिंग व्यवस्था पर जोर

भारत में वर्तमान में ई-कचरे के प्रबंधन के लिए E-Waste (Management) Rules, 2022 लागू हैं, जो 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी हैं। CPCB के अनुसार इन नियमों में ई-कचरे के पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित प्रबंधन पर जोर दिया गया है। साथ ही, उत्पादकों के लिए Extended Producer Responsibility यानी EPR की व्यवस्था भी लागू है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य ई-कचरे को अनियंत्रित तरीके से फेंकने या जलाने के बजाय अधिकृत चैनल के माध्यम से संग्रह, प्रसंस्करण और रीसाइक्लिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

ऐसे में यदि किसी क्षेत्र में वास्तव में खुले में ई-कचरा जलाया जा रहा है, तो संबंधित विभागों द्वारा स्थल का निरीक्षण कर स्थिति की जांच करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल

स्थानीय लोगों की शिकायतों के बीच अब यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि क्षेत्र में लंबे समय से खुले में ई-कचरा जलाया जा रहा है तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

हालांकि, प्रशासन या संबंधित विभाग पर किसी तरह की लापरवाही या संरक्षण का निष्कर्ष जांच के बिना नहीं निकाला जा सकता। इस संबंध में मौके पर निरीक्षण, कचरे के स्रोत की पहचान और जिम्मेदार लोगों की पुष्टि के बाद ही आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।

भोजपुर थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के लिए स्थानीय पुलिस की आधिकारिक व्यवस्था मौजूद है।

ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मामले का संज्ञान लें और जिन स्थानों पर ई-कचरा जलाए जाने का आरोप है, वहां निरीक्षण कराया जाए। इसके अलावा, यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ग्रामीण यह भी चाहते हैं कि ई-कचरे के निस्तारण के लिए अधिकृत व्यवस्था को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि इलेक्ट्रॉनिक कचरे को खुले में जलाने या असुरक्षित तरीके से नष्ट करने की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

फिलहाल भोजपुर क्षेत्र में ई-कचरा जलाए जाने के आरोपों को लेकर स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि मौके पर खुले में ई-कचरा जलाने की पुष्टि होती है, तो पर्यावरणीय नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ई-कचरे का निस्तारण पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हो। स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद संबंधित विभाग यदि मौके पर जांच करते हैं, तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में किन स्थानों पर क्या गतिविधि चल रही है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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