कानपुर में गायत्री परिवार के सहयोग से स्वस्थ दैनिक दिनचर्या पर व्याख्यान, रेजीडेंट्स ने लिया स्वस्थ जीवन का संकल्प

ANUGRAH 4

रिपोर्ट: हरि शंकर शर्मा

कानपुर: स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित दिनचर्या को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (Obs and Gynae Department) में रेजीडेंट्स और सीनियर रेजीडेंट्स के लिए विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन गायत्री परिवार के संयुक्त सहयोग से किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत युवा चिकित्सकों को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक संतुलन के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. संगीता सारस्वत ने ‘स्वस्थ दैनिक दिनचर्या (Healthy Daily Routine)’ विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने वैज्ञानिक अध्ययनों और दैनिक जीवन में अपनाई जा सकने वाली सरल आदतों के आधार पर स्वस्थ जीवनशैली के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने बताया कि व्यस्त चिकित्सकीय दिनचर्या के बीच भी यदि कुछ सकारात्मक आदतों को नियमित रूप से अपनाया जाए तो स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ करने पर जोर

व्याख्यान के दौरान डॉ. संगीता सारस्वत ने कहा कि स्वस्थ दिनचर्या की शुरुआत सुबह से ही होनी चाहिए। उन्होंने जल्दी उठने, दिन की प्राथमिकताएं तय करने और सकारात्मक सोच के साथ दिन शुरू करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, सुबह के समय कुछ क्षण कृतज्ञता व्यक्त करना और दिनभर किए जाने वाले कार्यों की टू-डू लिस्ट तैयार करना व्यक्ति को व्यवस्थित रहने में सहायता कर सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने सुबह आशीर्वाद, शुभकामनाओं या प्रार्थना के साथ अभिमंत्रित जल पीने की बात भी कही। कार्यक्रम में इस पहलू को सकारात्मक सोच और दिन की बेहतर शुरुआत से जोड़कर समझाया गया।

व्यायाम और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह

डॉ. सारस्वत ने नियमित व्यायाम और प्राणायाम के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने के साथ ही दैनिक कार्यों के लिए ऊर्जा बनाए रखने में सहायक हो सकती है। इसलिए व्यस्त शेड्यूल के बावजूद चिकित्सकों और रेजीडेंट्स को अपनी दिनचर्या में नियमित व्यायाम तथा प्राणायाम के लिए समय निकालना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि स्वस्थ जीवनशैली किसी एक दिन या कुछ दिनों की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसे लगातार अपनी आदतों का हिस्सा बनाना आवश्यक है। धीरे-धीरे सकारात्मक आदतों को दिनचर्या में शामिल करने से जीवनशैली में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।

संतुलित और सात्विक भोजन पर विशेष जोर

व्याख्यान में खान-पान को भी स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। डॉ. संगीता सारस्वत ने संतुलित और सात्विक भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने भोजन में बीज, मेवे, सब्जियां और फल शामिल करने पर जोर दिया।

उन्होंने भोजन को प्रार्थना और सकारात्मक भावनाओं के साथ ग्रहण करने की बात भी कही। उनका संदेश था कि भोजन केवल शरीर की आवश्यकता पूरी करने का माध्यम नहीं है, बल्कि खान-पान की नियमित और संतुलित आदतें व्यक्ति की समग्र जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

रात में आत्म-मूल्यांकन और अच्छी नींद जरूरी

कार्यक्रम में रात की दिनचर्या को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। डॉ. सारस्वत ने प्रतिदिन कुछ समय अच्छा साहित्य पढ़ने और पूरे दिन का आत्म-मूल्यांकन करने की सलाह दी। इससे व्यक्ति अपने दिनभर के कार्यों और व्यवहार पर विचार कर अगले दिन के लिए बेहतर तैयारी कर सकता है।

इसके अलावा उन्होंने पर्याप्त और अच्छी नींद को स्वस्थ जीवन के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि दिनभर की व्यस्तता के बाद शरीर और मस्तिष्क को पर्याप्त आराम मिलना आवश्यक है। इसलिए नियमित नींद की आदत विकसित करना स्वस्थ दैनिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

रेजीडेंट्स के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हेल्थ कमेटी का गठन

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा द्विवेदी के नेतृत्व में विभाग की हेल्थ कमेटी का भी गठन किया गया। कमेटी का उद्देश्य रेजीडेंट्स के संपूर्ण स्वास्थ्य पर ध्यान देना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इसी क्रम में कार्यक्रम के दौरान रेजीडेंट्स का हेल्थ चेक-अप भी किया गया। इसका उद्देश्य चिकित्सकों के स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर ध्यान देना और उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति नियमित रूप से जागरूक करना रहा।

30 छात्र-छात्राओं ने लिया स्वस्थ दिनचर्या का संकल्प

कार्यक्रम में करीब 30 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। व्याख्यान के बाद प्रतिभागियों ने स्वस्थ दैनिक दिनचर्या का पालन करने की शपथ ली। इस दौरान रेजीडेंट्स ने नियमित व्यायाम, संतुलित खान-पान, पर्याप्त नींद और सकारात्मक दिनचर्या को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. प्रतिमा वर्मा रहीं। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य डॉ. नीना गुप्ता, डॉ. रेनू गुप्ता, डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. पाविका लाल, डॉ. दिव्या द्विवेदी, डॉ. रश्मि गुप्ता और डॉ. रश्मि यादव सहित अन्य चिकित्सक एवं विभागीय सदस्य मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, कार्यक्रम के माध्यम से रेजीडेंट्स को यह संदेश दिया गया कि चिकित्सा क्षेत्र में दूसरों के स्वास्थ्य की देखभाल करने के साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम, सकारात्मक सोच, आत्म-मूल्यांकन और पर्याप्त नींद जैसी आदतें दैनिक जीवन को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायक हो सकती हैं। इसी उद्देश्य के साथ आयोजित यह व्याख्यान रेजीडेंट्स के लिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।

You may have missed