अमीर आलम की कांग्रेस में एंट्री से पश्चिमी यूपी में नए सियासी समीकरण, इमरान मसूद-इकरा हसन की खींचतान चर्चा में
Digital UP News Desk
मेरठ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। पश्चिमी यूपी के लंबे समय से सक्रिय नेता और पूर्व सांसद अमीर आलम खां ने अपने बेटे एवं पूर्व विधायक नवाजिश आलम के साथ कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। दोनों नेताओं ने 23 सितंबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत कई नेता मौजूद रहे।
अमीर आलम और नवाजिश आलम के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पश्चिमी यूपी, खासकर शामली और मुजफ्फरनगर की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दोनों नेता इससे पहले आजाद समाज पार्टी से जुड़े थे और सितंबर में पार्टी से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस में शामिल हुए हैं।
इमरान मसूद की मौजूदगी ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा
अमीर आलम और नवाजिश आलम के कांग्रेस में शामिल होने के कार्यक्रम में सहारनपुर सांसद इमरान मसूद की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को पश्चिमी यूपी की मुस्लिम राजनीति के संदर्भ में भी चर्चा का विषय बना दिया है। हालांकि, अमीर आलम के कांग्रेस में आने का आधिकारिक कारण पार्टी के विस्तार और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषण में इसे क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इमरान मसूद और अमीर आलम दोनों लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। दूसरी ओर कैराना सांसद इकरा हसन भी इस क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका रखती हैं। ऐसे में तीनों नेताओं की सक्रियता और अलग-अलग राजनीतिक मंचों से सामने आ रहे बयान पश्चिमी यूपी की सियासत को खासा दिलचस्प बना रहे हैं।
हाल के दिनों में सपा और कांग्रेस के बीच 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे और गठबंधन की रणनीति पर बयानबाजी भी सामने आई है। इमरान मसूद गठबंधन को जल्द स्पष्ट करने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं, जबकि इकरा हसन की ओर से भी गठबंधन और चुनावी रणनीति को लेकर बयान सामने आए हैं।
कांग्रेस-सपा गठबंधन के बीच सीटों का सवाल अहम
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर संभावित गठबंधन की चर्चाओं के बीच पश्चिमी यूपी में सीट बंटवारा महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है। कांग्रेस की ओर से गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कही गई है, जबकि सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत अभी जारी है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सीट बंटवारे पर अक्टूबर तक स्थिति स्पष्ट होने की बात कही है।
ऐसे में अमीर आलम और नवाजिश आलम का कांग्रेस में आना केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि आगामी चुनाव में पार्टी उन्हें किस भूमिका में उतारती है।
राजनीतिक हलकों में नवाजिश आलम के थानाभवन से चुनाव लड़ने की चर्चा है। हालांकि, अभी तक कांग्रेस की ओर से उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक नवाजिश आलम की राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए थानाभवन सीट को लेकर अटकलें जरूर तेज हुई हैं।
अमीर आलम का लंबा राजनीतिक अनुभव
अमीर आलम का पश्चिमी यूपी की राजनीति में करीब चार दशक का राजनीतिक सफर रहा है। वह 1985 में पहली बार थानाभवन विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1989 में मोरना विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा पहुंचे और 1996 में फिर थानाभवन से जीत हासिल की। उत्तर प्रदेश सरकार में वह मंत्री भी रहे।
इसके बाद अमीर आलम कैराना लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। उनका राजनीतिक प्रभाव शामली और मुजफ्फरनगर के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी रहा है। बाद में वह राज्यसभा के सदस्य भी बने। वर्ष 2026 में उन्होंने आजाद समाज पार्टी से अलग होकर कांग्रेस में नई राजनीतिक पारी शुरू की है।
नवाजिश आलम की भी रही है सक्रिय राजनीति
अमीर आलम के बेटे नवाजिश आलम भी विधानसभा की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वर्ष 2012 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर बुढ़ाना विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक के रूप में अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। 2017 में उन्होंने मीरापुर सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली।
इसके बाद पिता-पुत्र अलग-अलग राजनीतिक चरणों में राष्ट्रीय लोकदल और आजाद समाज पार्टी से जुड़े। अब दोनों कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में उनकी अगली राजनीतिक भूमिका पर नजर रहेगी।
इकरा हसन का राजनीतिक परिवार भी चर्चा में
दूसरी ओर कैराना की सांसद इकरा हसन पश्चिमी यूपी की राजनीति में एक प्रमुख युवा चेहरा हैं। उनका परिवार लंबे समय से कैराना और आसपास की राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके परिवार से अख्तर हसन और मुनव्वर हसन सांसद रहे हैं, जबकि उनकी मां तबस्सुम हसन भी कैराना से सांसद रह चुकी हैं। उनके भाई नाहिद हसन कैराना विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।
इकरा हसन 2024 के लोकसभा चुनाव में कैराना से सांसद चुनी गईं। इसके बाद से वह राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय नजर आई हैं। पश्चिमी यूपी में उनकी सक्रियता के कारण कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे की चर्चा में कैराना क्षेत्र का महत्व भी बढ़ गया है।
पश्चिमी यूपी में बदलते राजनीतिक समीकरण
अमीर आलम और नवाजिश आलम के कांग्रेस में आने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई सवाल एक साथ खड़े हो गए हैं। पहला सवाल यह है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में दोनों नेताओं को किस राजनीतिक भूमिका में रखती है। दूसरा, सपा-कांग्रेस गठबंधन होने की स्थिति में पश्चिमी यूपी की सीटों का बंटवारा किस फार्मूले पर होता है।
इसके अलावा, इमरान मसूद और इकरा हसन के बीच हाल के दिनों में गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर सामने आई बयानबाजी ने भी राजनीतिक चर्चाओं को बढ़ाया है। हालांकि, इन घटनाक्रमों को सीधे किसी व्यक्ति के खिलाफ रणनीति या घेराबंदी मानना अभी राजनीतिक विश्लेषण का विषय है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पश्चिमी यूपी में 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक और क्षेत्रीय आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
अमीर आलम और नवाजिश आलम की कांग्रेस में एंट्री इसी व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। आने वाले दिनों में सीट बंटवारे, उम्मीदवारों की घोषणा और स्थानीय स्तर पर नेताओं की सक्रियता से यह तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। इसलिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले महीनों में कई नए समीकरण सामने आने की संभावना बनी हुई है।

