बदायूं में जमीन फर्जीवाड़े का आरोप, तत्कालीन तहसीलदार समेत 8 पर कोर्ट के आदेश से मुकदमा

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रिपोर्ट – सैयद तुफैल अहमद
बदायूं,सहसवान:
 उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की सहसवान तहसील क्षेत्र में जमीनों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत सुजावली से जुड़े इस प्रकरण में फर्जी आधार कार्ड, कूटरचित दस्तावेजों और कथित फर्जी बैनामों के जरिए जमीनों के हस्तांतरण तथा दाखिल-खारिज कराने के आरोप लगाए गए हैं। मामले में न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM), बदायूं के आदेश के बाद थाना सहसवान पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार हरीश चंद्र समेत आठ नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार, मुकदमा अपराध संख्या 0493/2026 के तहत 22 सितंबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उनका वास्तविक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करने से संबंधित धाराएं शामिल हैं। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है।

एसएसपी से शिकायत के बाद न्यायालय पहुंचे ग्राम प्रधान

मामले के वादी ग्राम प्रधान ब्रह्मचारी पुत्र लक्ष्मी नारायण, निवासी ग्राम सुजावली, ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उन्होंने 28 अक्टूबर 2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बदायूं के समक्ष पूरे प्रकरण की शिकायत की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने कथित जमीन फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी उपलब्ध कराए थे।

हालांकि, अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए वादी ने न्यायालय की शरण ली। इसके बाद BNSS की धारा 173(4) के तहत न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद सहसवान पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

तत्कालीन तहसीलदार और राजस्व कर्मी भी नामजद

दर्ज मुकदमे में तत्कालीन तहसीलदार हरीश चंद्र, तत्कालीन नायब तहसीलदार अनगराज और क्षेत्रीय लेखपाल अछेलाल को भी नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि कथित फर्जी बैनामों के आधार पर जमीनों का दाखिल-खारिज कराने की प्रक्रिया में कुछ राजस्व अधिकारियों की भूमिका रही।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस की विवेचना के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका क्या थी और राजस्व अभिलेखों में नामांतरण किस आधार पर किए गए। इसके लिए खतौनियों, नामांतरण आदेशों, रजिस्ट्री दस्तावेजों और पहचान संबंधी कागजात की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राजपाल के नाम कथित फर्जी आधार से बैनामा कराने का आरोप

शिकायत में मौजा पावड़ पुख्ता की गाटा संख्या 966, 967 और 975 की जमीन का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन जमीनों के खातेदार राजपाल पुत्र हरनाम गांव छोड़ चुके थे और जमीन लावारिस स्थिति में बताई गई थी।

आरोप है कि कुंवरपाल ने राजपाल के नाम पर कथित फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया और स्वयं को राजपाल के रूप में प्रस्तुत करते हुए 28 जुलाई 2022 को जमीन का बैनामा अपनी पत्नी रामसनेही के नाम करा दिया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सिविल जज जूनियर डिवीजन, सहसवान की अदालत ने मूलवाद संख्या 219/2022 में 25 फरवरी 2025 को इस बैनामे को निरस्त कर दिया था।

इसके बावजूद इसी जमीन से जुड़े एक अन्य कथित फर्जी बैनामे का प्रयास किए जाने का आरोप शिकायत में लगाया गया है। अब पुलिस पुराने न्यायालयीन रिकॉर्ड और संबंधित रजिस्ट्री दस्तावेजों की भी जांच करेगी।

मृतक भूपाल के नाम पर भी कथित फर्जीवाड़ा

शिकायत में गाटा संख्या 1070 और 1067 की जमीन का भी उल्लेख है। इन जमीनों के खातेदार भूपाल पुत्र डल्ली बताए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि भूपाल की मृत्यु हो चुकी थी।

आरोप है कि लाला राम उर्फ लालू ने भूपाल के नाम पर कथित फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया और किसी अन्य व्यक्ति को भूपाल के रूप में प्रस्तुत कर जमीन का बैनामा करा लिया। इस मामले को लेकर मूलवाद संख्या 250/2025 दायर किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।

अब जांच के दौरान पुलिस बैनामा दस्तावेज, पहचान पत्र, मृत्यु से संबंधित अभिलेख और अदालत में प्रस्तुत किए गए कागजातों का मिलान करेगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि संबंधित दस्तावेज किस आधार पर तैयार हुए और जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी।

अकबराबाद मेन रोड की जमीन का भी मामला

शिकायत में ग्राम हरदत्तपुर की गाटा संख्या 11 की जमीन का भी जिक्र किया गया है। यह जमीन अकबराबाद मेन रोड पर स्थित बताई गई है और शिकायत के अनुसार इसके मूल खातेदार राधेश्याम पुत्र दुर्गाप्रसाद थे।

आरोप है कि लालू उर्फ लालाराम ने कथित फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से इस जमीन का बैनामा अपनी पुत्रवधू रामा देवी पत्नी धर्मेंद्र यादव के नाम करा दिया। इस आरोप की भी जांच पुलिस द्वारा दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के आधार पर की जाएगी।

दस्तावेजों की जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति

कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज होने से सहसवान तहसील क्षेत्र में यह मामला चर्चा में है। शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर राजस्व अधिकारियों और जमीन से जुड़े लोगों के बीच मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों को अभी जांच के स्तर पर ही देखा जा रहा है।

पुलिस की विवेचना में संबंधित गाटा नंबरों की खतौनियां, रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड, नामांतरण आदेश, आधार कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसके अलावा संबंधित खातेदारों की वास्तविक स्थिति, मृत्यु प्रमाणपत्र, पुराने मुकदमों और अदालत के आदेशों का भी सत्यापन किया जा सकता है।

पुलिस ने BNS की धारा 318(4), 336(3), 337, 338 और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। फिलहाल नामजद सभी आरोपियों की भूमिका जांच के दायरे में है। किसी भी आरोपी की भूमिका या आरोपों की अंतिम पुष्टि विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

ऐसे में अब मुख्य सवाल यह है कि कथित फर्जी पहचान और दस्तावेजों के आधार पर जमीनों के बैनामे तथा नामांतरण की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई। पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्य ही यह स्पष्ट करेंगे कि इस पूरे प्रकरण में किन लोगों की क्या भूमिका रही और राजस्व अभिलेखों में जमीनों के हस्तांतरण की प्रक्रिया किन दस्तावेजों के आधार पर हुई।

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