शारदीय नवरात्रि 2026: घटस्थापना से दशहरा तक जानें तिथियां, पूजा और धार्मिक महत्व
Digital UP News Desk
पितृपक्ष के समापन के साथ ही देशभर में शारदीय नवरात्रि की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं के बीच नवरात्रि की शुरुआत, घटस्थापना का शुभ समय, दुर्गा पूजा और दशहरा की तिथियों को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
शारदीय नवरात्रि क्यों है खास?
शारदीय नवरात्रि हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में देवी की आराधना करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
वहीं, कई श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान व्रत रखते हैं। इसके अलावा मंदिरों और घरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन तथा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसलिए नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा त्योहार है।
घटस्थापना से होती है नवरात्रि की शुरुआत
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है। इसे नवरात्रि पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के बाद कलश स्थापित किया जाता है और मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है।
परंपरा के अनुसार कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखा जाता है। इसके साथ ही जौ बोने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। श्रद्धालु नौ दिनों तक कलश के सामने दीप प्रज्वलित करके मां दुर्गा की पूजा करते हैं।
हालांकि, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त स्थान और सूर्योदय के समय के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना चाहिए।
नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा
शारदीय नवरात्रि में प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष स्वरूप की आराधना की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है।
इसी क्रम में पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
इस प्रकार नौ दिनों तक चलने वाली पूजा में देवी के अलग-अलग स्वरूपों का ध्यान किया जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा, व्रत, कन्या पूजन तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
अष्टमी और नवमी का भी विशेष महत्व
नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है। कई परिवारों में अष्टमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर नवमी को कन्या पूजन की परंपरा है।
कन्या पूजन के दौरान छोटी कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में पूजने की परंपरा है। उन्हें भोजन कराया जाता है और सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा दी जाती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इसके तौर-तरीकों में अंतर देखने को मिलता है।
दशहरा के साथ होगा नवरात्रि पर्व का समापन
नवरात्रि के नौ दिनों के बाद विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है, जिसे दशहरा भी कहा जाता है। धार्मिक परंपराओं में विजयादशमी को अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरा मनाने की परंपराएं भी अलग हैं। कहीं रामलीला और रावण दहन का आयोजन होता है, तो कहीं मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ उत्सव का समापन किया जाता है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और देश के अन्य हिस्सों में दुर्गा पूजा और दशहरा के आयोजन का अपना अलग सांस्कृतिक स्वरूप देखने को मिलता है।
पूजा की तैयारियों में जुटे श्रद्धालु
पितृपक्ष के बाद नवरात्रि के आगमन को देखते हुए मंदिरों और पूजा स्थलों की साफ-सफाई शुरू हो जाती है। वहीं, बाजारों में भी पूजा सामग्री, कलश, चुनरी, नारियल, फूल और अन्य धार्मिक सामग्री की मांग बढ़ने लगती है।
इसके अलावा कई स्थानों पर दुर्गा पूजा पंडाल बनाने की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। घरों में भी श्रद्धालु पूजा स्थल तैयार करते हैं और नवरात्रि के दौरान किए जाने वाले व्रत तथा पूजा की योजना बनाते हैं।
नवरात्रि में इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्रि के दौरान पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार तिथि और मुहूर्त की पुष्टि करनी चाहिए। विशेष रूप से घटस्थापना का समय स्थानीय सूर्योदय और स्थान के आधार पर बदल सकता है। इसलिए किसी एक शहर के मुहूर्त को दूसरे शहर में सीधे लागू करने के बजाय स्थानीय पंचांग देखना उचित रहता है।
साथ ही, पूजा के दौरान स्वच्छता, सात्विकता और श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए। व्रत रखने वाले लोगों को अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और स्वास्थ्य के अनुसार आहार का चुनाव करना चाहिए।
कुल मिलाकर, शारदीय नवरात्रि 2026 धार्मिक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक उत्सव का महत्वपूर्ण अवसर होगा। घटस्थापना से शुरू होने वाला यह पर्व नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना के बाद विजयादशमी के साथ पूर्ण होगा। श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व आत्मिक अनुशासन, पूजा-अर्चना और सकारात्मक संकल्प का अवसर भी माना जाता है।

