ऑपरेशन Cy-Vajra: बिजनौर पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह का किया पर्दाफाश, 11 आरोपी गिरफ्तार
रिपोर्ट – तबिश मिर्जा
बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।ऑपरेशन Cy-Vajra के अंतर्गत बिजनौर पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा साइबर अपराध में उपयोग किए जाने वाले अन्य डिजिटल संसाधन भी बरामद किए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फर्जी वेबसाइट और नकली जन सेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से लोगों को निशाना बनाकर आर्थिक धोखाधड़ी करता था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरोह लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से साइबर अपराधों को अंजाम दे रहा था। आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है तथा पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है।
ऑपरेशन Cy-Vajra के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई
बिजनौर पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान ऑपरेशन Cy-Vajra चलाया जा रहा है।
इसी अभियान के दौरान थाना स्योहारा पुलिस को साइबर ठगी से जुड़े एक सक्रिय गिरोह की जानकारी मिली।
सूचना के आधार पर पुलिस ने तकनीकी निगरानी, खुफिया जानकारी और स्थानीय स्तर पर जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और भविष्य में भी ऐसे अभियानों को लगातार जारी रखा जाएगा।
सोशल मीडिया के जरिए निवेश का झांसा देकर करते थे ठगी
जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक निवेश योजनाओं का प्रचार करते थे।
लोगों को कम समय में अधिक मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाकर उन्हें निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
इसके बाद पीड़ितों से विभिन्न माध्यमों से धनराशि जमा कराई जाती थी। प्रारंभिक स्तर पर लाभ दिखाने के बाद संपर्क समाप्त कर दिया जाता था, जिससे निवेशकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की साइबर ठगी में अपराधी लोगों की जल्द लाभ कमाने की इच्छा का फायदा उठाते हैं।
इसलिए किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में धन लगाने से पहले उसकी वैधता की जांच करना आवश्यक है।
फर्जी HSRP वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर धोखाधड़ी
पुलिस जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। आरोपियों ने परिवहन विभाग की HSRP (High Security Registration Plate) सेवा से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट तैयार कर रखी थी।
इस वेबसाइट के माध्यम से वाहन मालिकों को हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट की ऑनलाइन बुकिंग कराने का झांसा दिया जाता था।
लोग जब वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी और भुगतान संबंधी विवरण दर्ज करते थे, तब आरोपी उन जानकारियों का दुरुपयोग कर आर्थिक धोखाधड़ी करते थे।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सरकारी सेवा का लाभ लेने के लिए केवल संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत पोर्टल का ही उपयोग करें।
फर्जी CSC के जरिए पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह के कुछ सदस्य फर्जी जन सेवा केंद्र (CSC) संचालित कर रहे थे।
इन केंद्रों पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते और एटीएम कार्ड जैसी व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की जाती थी। बाद में इन दस्तावेजों और सूचनाओं का इस्तेमाल विभिन्न साइबर अपराधों में किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, डिजिटल पहचान संबंधी जानकारी का गलत उपयोग कर बैंकिंग धोखाधड़ी, फर्जी खाते खोलना तथा अन्य ऑनलाइन अपराध किए जाने की आशंका की भी जांच की जा रही है।
मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
इन उपकरणों की डिजिटल फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह ने किन-किन राज्यों या जिलों में लोगों को अपना शिकार बनाया है।
साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग या सहयोगी कौन हैं।
पुलिस का मानना है कि बरामद डिजिटल साक्ष्यों से साइबर अपराध के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
थाना स्योहारा पुलिस कर रही है विस्तृत जांच
थाना स्योहारा पुलिस ने सभी 11 आरोपियों के विरुद्ध संबंधित कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह कब से सक्रिय था, कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया तथा अब तक कितनी धनराशि की धोखाधड़ी की गई।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आवश्यकतानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसपी सिटी कृष्ण गोपाल सिंह ने दी जानकारी
मामले की जानकारी देते हुए एसपी सिटी कृष्ण गोपाल सिंह ने बताया कि बिजनौर पुलिस साइबर अपराधों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनसे प्राप्त सूचनाओं के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि किसी भी संदिग्ध लिंक, वेबसाइट, निवेश योजना या सोशल मीडिया विज्ञापन पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें।
यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो तो तत्काल स्थानीय पुलिस या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार नागरिकों को निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए—
- किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी प्रामाणिकता अवश्य जांचें।
- केवल सरकारी विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों का ही उपयोग करें।
- आधार, पैन, बैंक खाते और ओटीपी जैसी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें।
- सोशल मीडिया पर मिलने वाले आकर्षक ऑफर और अधिक मुनाफे के दावों से सावधान रहें।
- किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
बिजनौर पुलिस द्वारा ऑपरेशन Cy-Vajra के तहत की गई यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।
11 आरोपियों की गिरफ्तारी से न केवल एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, बल्कि डिजिटल माध्यमों से होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
हालांकि पुलिस की जांच अभी जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिकों की जागरूकता और समय पर की गई शिकायतें साइबर अपराधों की रोकथाम में सबसे प्रभावी भूमिका निभाती हैं।

