वाराणसी में नौकरी के नाम पर 4 करोड़ की ठगी का खुलासा, MLM गिरोह के 19 आरोपी गिरफ्तार
रिपोर्ट – धर्मेंद्र पांडेय
वाराणसी: पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ‘साइबर वज्र’ अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित फर्जी मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) और पिरामिड नेटवर्क के माध्यम से बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, इस अभियान में गिरोह के मुख्य सरगना सहित 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि उनके संपर्क में आए करीब 300 युवक-युवतियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, संबंधित कंपनियों तथा अन्य संभावित कड़ियों की विस्तार से पड़ताल की जा रही है।
साइबर वज्र अभियान के तहत हुई कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘साइबर वज्र’ अभियान के दौरान इस नेटवर्क की गतिविधियों की जानकारी मिली थी। इसके बाद साइबर क्राइम थाना वाराणसी की विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और गोपनीय सूचनाओं के आधार पर जांच शुरू की।
जांच के दौरान कई स्थानों पर एक साथ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गिरोह के सदस्यों को हिरासत में लिया। इसके साथ ही उन स्थानों पर मौजूद बड़ी संख्या में युवक-युवतियों को सुरक्षित बाहर निकालकर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई।
नौकरी का झांसा देकर बुलाए जाते थे युवक
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी ‘महादेव इंटरप्राइजेज’ नाम से एक फर्म संचालित कर रहे थे और कथित रूप से ‘रॉयल हेल्थ वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड’ की फ्रेंचाइजी के नाम का इस्तेमाल कर युवाओं को आकर्षित करते थे।
देश के विभिन्न राज्यों के बेरोजगार युवाओं को ₹25,000 प्रतिमाह वेतन वाली नौकरी का दावा करते हुए वाराणसी बुलाया जाता था। यहां उन्हें एक कॉर्पोरेट कार्यालय जैसा माहौल दिखाकर इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी कराई जाती थी।
रजिस्ट्रेशन और जॉइनिंग फीस के नाम पर वसूली
पुलिस के अनुसार, चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों से रजिस्ट्रेशन और जॉइनिंग फीस के नाम पर लगभग ₹30,000 से ₹35,000 जमा कराए जाते थे।
इसके बदले उन्हें कुछ उत्पादों वाली एक किट दी जाती थी। इसके बाद उनसे नए लोगों को जोड़ने और नेटवर्क का विस्तार करने के लिए कहा जाता था। जांच एजेंसियां इस पूरे मॉडल की वैधता और संचालन प्रक्रिया की विस्तार से जांच कर रही हैं।
बैंक खातों में करोड़ों रुपये का लेनदेन
जांच के दौरान पुलिस को मुख्य आरोपी दीपक कुमार शाह के बैंक खातों से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय रिकॉर्ड मिले। पुलिस के अनुसार, पिछले लगभग एक वर्ष में संबंधित खातों में करीब 4 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर नौकरी और यूपीआई से संबंधित कई शिकायतें भी दर्ज मिली हैं। पुलिस अब इन शिकायतों और वित्तीय लेनदेन के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है।
कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वाहन बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण सामान भी बरामद किए। इनमें—
- 20 स्मार्टफोन
- एक ASUS लैपटॉप
- दो चारपहिया वाहन (ग्रैंड विटारा और किया कैरेंस)
- ₹4,020 नकद
- लगभग ₹1 लाख की बैंक राशि होल्ड
- कई दस्तावेज एवं कॉर्पोरेट रिकॉर्ड
शामिल हैं।
इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की डिजिटल फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य तथ्यों का पता लगाया जा सके।
300 युवाओं को सुरक्षित निकाला गया
पुलिस ने बताया कि कार्रवाई के दौरान लगभग 300 युवक-युवतियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इन लोगों से पूछताछ कर यह जानकारी जुटाई जा रही है कि वे किस प्रकार इस नेटवर्क के संपर्क में आए और उन्हें किस प्रकार के प्रस्ताव दिए गए थे।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि नेटवर्क का संचालन किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में चला अभियान
यह पूरी कार्रवाई पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देशन में की गई। अभियान की निगरानी डीसीपी अपराध नीतू कादयान, एडीसीपी अपराध नृपेन्द्र तथा एसीपी विदुष सक्सेना ने की। साइबर क्राइम थाना वाराणसी की विशेष टीम ने तकनीकी सहायता और साक्ष्यों के आधार पर अभियान को सफल बनाया।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराध और रोजगार के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के मामलों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और भविष्य में भी ऐसे नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहेगी।
नौकरी तलाशने वालों के लिए पुलिस की सलाह
पुलिस ने युवाओं और अभिभावकों से अपील की है कि नौकरी से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले संबंधित कंपनी की वैधता की जांच अवश्य करें।
इसके अलावा पुलिस ने कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सलाह भी दी है—
- किसी भी नौकरी के लिए पहले से जॉइनिंग फीस या रजिस्ट्रेशन शुल्क मांगने वाली कंपनियों से सतर्क रहें।
- केवल आधिकारिक वेबसाइट और विश्वसनीय भर्ती पोर्टल के माध्यम से आवेदन करें।
- कंपनी का पंजीकरण, कार्यालय और संपर्क विवरण अवश्य सत्यापित करें।
- संदिग्ध विज्ञापन या कॉल मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन अथवा स्थानीय पुलिस को सूचना दें।
- बिना जांच किए किसी भी व्यक्ति या संस्था के खाते में धनराशि जमा न करें।
साइबर जागरूकता की बढ़ती आवश्यकता
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों से नौकरी की तलाश बढ़ने के साथ-साथ फर्जी भर्ती और निवेश योजनाओं के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में युवाओं के लिए जागरूक रहना और किसी भी आकर्षक प्रस्ताव की स्वतंत्र रूप से जांच करना बेहद आवश्यक है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी कंपनी द्वारा चयन से पहले बड़ी धनराशि जमा कराने की मांग की जाती है, तो उम्मीदवारों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए और आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
वाराणसी साइबर क्राइम पुलिस की यह कार्रवाई रोजगार के नाम पर कथित धोखाधड़ी करने वाले संगठित नेटवर्क के विरुद्ध महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पुलिस के अनुसार, 19 आरोपियों की गिरफ्तारी, करीब 300 युवक-युवतियों का सुरक्षित रेस्क्यू और करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन की जांच से पूरे मामले के कई पहलुओं का खुलासा होने की संभावना है।
वहीं, पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।

