कानपुर में KDA की बड़ी कार्रवाई: 25 बीघा भूमि कब्जा मुक्त, 10.65 करोड़ की अवैध प्लाटिंग पर चला बुलडोजर
रिपोर्ट – नीरज तिवारी
कानपुर: शहर में अवैध निर्माण, अनधिकृत प्लाटिंग और सरकारी भूमि पर कब्जों के विरुद्ध कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शुक्रवार को व्यापक अभियान चलाया। संयुक्त प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान लगभग 25 बीघा भूमि को ध्वस्तीकरण और कब्जा मुक्त कराया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 10 करोड़ 65 लाख 38 हजार रुपये आंकी गई है। इसके साथ ही लगभग 36 बीघा क्षेत्रफल में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग और निर्माण के विरुद्ध नोटिस जारी करते हुए आगामी दिनों में ध्वस्तीकरण की चेतावनी भी दी गई है।
यह अभियान केडीए के उपाध्यक्ष अंकुर कौषिक एवं सचिव अभय कुमार पाण्डेय के निर्देशन में चलाया गया। कार्रवाई का नेतृत्व विशेष कार्याधिकारी एवं उपजिलाधिकारी डॉ. रवि प्रताप सिंह ने किया। अभियान में प्रवर्तन जोन-4 और भूमि बैंक जोन-1 की संयुक्त टीम के साथ पर्याप्त पुलिस बल भी मौजूद रहा।
अवैध निर्माण के खिलाफ चला संयुक्त अभियान
केडीए के अनुसार शहर में लगातार मिल रही शिकायतों और पूर्व में जारी नोटिसों के आधार पर यह अभियान संचालित किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना स्वीकृत मानचित्र के प्लाटिंग, सरकारी भूमि पर कब्जा और अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध आगे भी नियमित कार्रवाई जारी रहेगी।
अभियान के दौरान विभिन्न स्थानों पर अवैध रूप से विकसित की जा रही कॉलोनियों, प्लाटिंग और कब्जों को चिन्हित कर नियमानुसार ध्वस्त किया गया।
फुफुवार सुईथोक में 11 बीघा अवैध प्लाटिंग ध्वस्त
कार्रवाई का पहला चरण ग्राम फुफुवार सुईथोक, नर्वल में चलाया गया। यहां राजू उत्तम एवं अन्य द्वारा लगभग 11 बीघा भूमि पर बिना केडीए की स्वीकृति के अवैध प्लाटिंग किए जाने का मामला सामने आया।
प्राधिकरण की टीम ने मौके पर पहुंचकर प्लाटिंग से संबंधित अवैध संरचनाओं को ध्वस्त किया। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित निर्माणकर्ताओं ने प्राधिकरण से न तो मानचित्र स्वीकृत कराया था और न ही आवश्यक अनुमति प्राप्त की थी।
मवइया में सरकारी भूमि से हटाया गया कब्जा
इसके बाद अभियान ग्राम मवइया में पहुंचा, जहां चन्द्रशेखर पाण्डेय एवं अन्य द्वारा प्राधिकरण के स्वामित्व वाली लगभग 5 बीघा भूमि पर अवैध कब्जा किए जाने की शिकायत मिली थी।
निरीक्षण के दौरान शिकायत सही पाए जाने पर कब्जे को हटाते हुए भूमि को प्राधिकरण के कब्जे में वापस लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
स्टार लैंड डेवलपर्स पर आंशिक कार्रवाई
अभियान का तीसरा चरण नर्वल तहसील रोड स्थित स्टार लैंड डेवलपर्स की प्लाटिंग पर चला। यहां लगभग 9 बीघा भूमि में बिना स्वीकृत मानचित्र के प्लाटिंग किए जाने का मामला सामने आया।
हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि जनभावनाओं और प्लॉट खरीदने वाले लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल आंशिक ध्वस्तीकरण किया गया। इस दौरान बाउंड्री वॉल और अन्य अवैध निर्माण हटाए गए।
केडीए ने डेवलपर और प्लॉट धारकों को पांच दिन का सशर्त समय दिया है ताकि वे आवश्यक शमन मानचित्र स्वीकृत करा सकें। यदि निर्धारित समय सीमा में नियमों का पालन नहीं किया गया तो पूर्ण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
10.65 करोड़ रुपये की भूमि कराई गई कब्जामुक्त
विशेष कार्याधिकारी डॉ. रवि प्रताप सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान कुल 16 बीघा (लगभग 30,730 वर्ग मीटर) भूमि पर प्रभावी कार्रवाई की गई।
प्राधिकरण के मूल्यांकन के अनुसार:
- फुफुवार सुईथोक की 20,490 वर्ग मीटर भूमि का अनुमानित मूल्य लगभग 8.60 करोड़ रुपये है।
- मवइया की 10,240 वर्ग मीटर भूमि का अनुमानित मूल्य लगभग 2.04 करोड़ रुपये है।
इस प्रकार कुल भूमि का अनुमानित मूल्य 10 करोड़ 65 लाख 38 हजार रुपये आंका गया है।
36 बीघा अवैध प्लाटिंग पर नोटिस
केडीए ने बताया कि कई अन्य स्थानों पर भी बिना स्वीकृत मानचित्र के प्लाटिंग और निर्माण किए जाने की शिकायतें मिली हैं। पूर्व में जारी नोटिसों के बावजूद संतोषजनक उत्तर न मिलने पर इन मामलों में 14 जुलाई 2026 को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
इनमें प्रमुख रूप से निम्न परियोजनाएं शामिल हैं—
- एन.के. ग्रीन सोसाइटी (लगभग 6 बीघा)
- पप्पू फुटवियर परिसर (लगभग 3 बीघा)
- स्टार ग्रीन सिटी (लगभग 6 बीघा)
- संजय शुक्ला एवं अन्य (लगभग 15 बीघा)
- विनोद यादव, संजीव यादव, जे.पी. मौर्य एवं अन्य (लगभग 6 बीघा)
इन सभी मामलों में संबंधित विकासकर्ताओं से स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत करने को कहा गया था, लेकिन निर्धारित अवधि में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
पुलिस बल की मौजूदगी में होगी अगली कार्रवाई
प्राधिकरण ने बताया कि आगामी ध्वस्तीकरण अभियान को लेकर संबंधित पुलिस अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर लिया गया है। पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध होने पर निर्धारित तिथि पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करना है।
दोबारा कब्जा करने वालों को चेतावनी
केडीए ने सभी कब्जाधारकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई के बाद दोबारा सरकारी भूमि पर कब्जा करने या अवैध निर्माण का प्रयास किया गया तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और अन्य विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
आम लोगों से की गई अपील
विशेष कार्याधिकारी डॉ. रवि प्रताप सिंह ने नागरिकों से अपील की कि किसी भी प्रकार का निर्माण या प्लाटिंग शुरू करने से पहले केडीए से मानचित्र स्वीकृत अवश्य कराएं।
उन्होंने कहा कि केवल स्वीकृत मानचित्र के अनुसार ही निर्माण कराया जाए तथा ग्राम समाज, प्राधिकरण अथवा सीलिंग की भूमि की खरीद-बिक्री या कब्जे से बचें। ऐसा करने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
केडीए अधिकारियों के अनुसार शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के विरुद्ध यह अभियान लगातार जारी रहेगा। जिन क्षेत्रों में बिना अनुमति प्लाटिंग, कॉलोनी विकास या सरकारी भूमि पर कब्जे की शिकायतें प्राप्त होंगी, वहां नियमानुसार जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य शहर में नियोजित विकास सुनिश्चित करना, सरकारी भूमि की सुरक्षा करना और नागरिकों को अवैध कॉलोनियों में निवेश से बचाना है।
कानपुर विकास प्राधिकरण की यह संयुक्त कार्रवाई शहर में अवैध प्लाटिंग और सरकारी भूमि पर कब्जों के विरुद्ध बड़े अभियान के रूप में देखी जा रही है। लगभग 25 बीघा भूमि पर कार्रवाई, 10.65 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को कब्जा मुक्त कराना और 36 बीघा क्षेत्र में नोटिस जारी करना इस बात का संकेत है कि प्राधिकरण अनधिकृत निर्माणों पर सख्त रुख अपनाए हुए है।
अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे केवल स्वीकृत मानचित्र के आधार पर ही निर्माण और भूमि खरीद-बिक्री करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े।

