कानपुर में लगी पुलिस की पाठशाला: छात्राओं को कानून, साइबर सुरक्षा और AI के प्रति किया जागरूक
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा
कानपुर: बदलते डिजिटल दौर में कानून की जानकारी के साथ साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को समझना भी जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से कानपुर पुलिस की ओर से छात्राओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। “कानून का सम्मान, कानून से जीवन आसान” अभियान के तहत मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल थाना कर्नलगंज क्षेत्र स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (GGIC), चुन्नीगंज पहुंचे।
इस दौरान पुलिस आयुक्त ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं से संवाद किया और उन्हें कानून, पुलिस की कार्यप्रणाली, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध तथा डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। कार्यक्रम में छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और पुलिस की कार्यप्रणाली तथा कानून से जुड़े विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे।
पुलिस की कार्यप्रणाली को समझाया
पुलिस आयुक्त ने छात्राओं को बताया कि किसी घटना या शिकायत की जानकारी मिलने के बाद पुलिस किस प्रकार कार्रवाई करती है। इसके साथ ही थाने में आम नागरिकों की सहायता के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
छात्राओं को महिला हेल्प डेस्क की भूमिका के बारे में समझाया गया। उन्हें बताया गया कि महिलाओं और बालिकाओं से जुड़ी शिकायतों को सुनने तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए पुलिस की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
इसके अलावा अपराध रजिस्टर और थाने की अन्य कार्यप्रणाली से भी छात्राओं को परिचित कराया गया। पुलिस के पास उपलब्ध शस्त्रों और उनकी भूमिका के संबंध में भी आवश्यक जानकारी दी गई। इस दौरान अधिकारियों ने छात्राओं के सवालों का सरल भाषा में जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को दूर किया।
साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर
कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया। वर्तमान समय में पढ़ाई, खरीदारी, मनोरंजन और संवाद के लिए इंटरनेट तथा सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित इस्तेमाल करना जरूरी है।
पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को बताया कि सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। फोटो, वीडियो, मोबाइल नंबर, घर या स्कूल से जुड़ी जानकारी, लोकेशन और अन्य व्यक्तिगत विवरण को सार्वजनिक करने से पहले उसके संभावित प्रभावों को समझना जरूरी है।
इसके अलावा किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए लिंक, मैसेज या संदिग्ध ऑफर पर बिना जांच किए क्लिक या प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए। ऑनलाइन ठगी के मामलों से बचने के लिए ओटीपी, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करने की सलाह भी दी गई।
सोशल मीडिया का इस्तेमाल सावधानी से करने की सलाह
पुलिस की पाठशाला में छात्राओं को सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर भी जागरूक किया गया। अधिकारियों ने समझाया कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई सामग्री लंबे समय तक डिजिटल माध्यमों पर मौजूद रह सकती है। इसलिए कोई भी फोटो, वीडियो या अन्य कंटेंट साझा करने से पहले उसकी आवश्यकता और सुरक्षा पर विचार करना चाहिए।
छात्राओं को यह भी बताया गया कि किसी अनजान व्यक्ति से ऑनलाइन बातचीत करते समय व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें। यदि किसी सोशल मीडिया अकाउंट, मैसेज या लिंक को लेकर संदेह हो तो उस पर प्रतिक्रिया देने के बजाय परिवार, शिक्षक या पुलिस की सहायता ली जा सकती है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर जागरूकता
आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल शिक्षा, तकनीक, कंटेंट निर्माण और रोजमर्रा के कई कामों में बढ़ रहा है। पुलिस की पाठशाला में छात्राओं को AI से जुड़े अवसरों के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा के पहलुओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि किसी भी AI आधारित प्लेटफॉर्म या ऑनलाइन सेवा का इस्तेमाल करते समय निजी जानकारी की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। अनजान या संदिग्ध प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत दस्तावेज, पासवर्ड, फोटो या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।
साथ ही, छात्राओं को डिजिटल कंटेंट तैयार करते समय भी अपनी पहचान और निजी जीवन से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई।
रील बनाते समय भी सुरक्षा जरूरी
कार्यक्रम के दौरान रील और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने को लेकर भी छात्राओं से बातचीत की गई। अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने की कोशिश में सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहिए।
रील या वीडियो बनाते समय स्थान, व्यक्तिगत पहचान, स्कूल से जुड़ी जानकारी या अन्य ऐसी चीजें सार्वजनिक करने से बचना चाहिए, जिनसे सुरक्षा या गोपनीयता प्रभावित हो सकती है। इस तरह छात्राओं को डिजिटल दुनिया में जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
परेशानी होने पर पुलिस की मदद लेने की अपील
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने छात्राओं से कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या, अपराध या आपात स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने छात्राओं को उपलब्ध पुलिस सहायता तंत्र और हेल्पलाइन का प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि समय पर शिकायत करने से पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलती है। इसलिए किसी घटना को छिपाने या अकेले उसका सामना करने के बजाय भरोसेमंद परिजनों, शिक्षकों या पुलिस अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।
पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं से किया संवाद
कार्यक्रम में सहायक पुलिस आयुक्त कर्नलगंज अंजना दहिया और प्रभारी निरीक्षक कर्नलगंज समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने छात्राओं के साथ संवाद करते हुए कानून, महिला सुरक्षा और साइबर अपराध से जुड़े सवालों पर जानकारी दी।
इस दौरान छात्राओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से समझने के लिए कई सवाल किए। पुलिस अधिकारियों ने उनके सवालों का सरल तरीके से जवाब दिया और उन्हें कानून के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।
कानून के साथ डिजिटल सुरक्षा की जानकारी
कानपुर पुलिस की इस पाठशाला का उद्देश्य केवल कानून की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि छात्राओं को बदलती तकनीक के दौर में सुरक्षित और जागरूक बनाना भी रहा। साइबर अपराध, सोशल मीडिया, AI और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़ी सावधानियों की जानकारी देकर छात्राओं को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सजग किया गया।
कुल मिलाकर, “कानून का सम्मान, कानून से जीवन आसान” अभियान के तहत आयोजित यह संवाद कार्यक्रम छात्राओं को कानून की समझ देने के साथ डिजिटल दुनिया में जिम्मेदारी और सावधानी के महत्व को समझाने पर केंद्रित रहा। ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से छात्राओं को अपने अधिकारों, सुरक्षा उपायों और उपलब्ध पुलिस सहायता तंत्र की जानकारी मिलती है, जिससे वे आवश्यकता पड़ने पर सही समय पर उचित कदम उठा सकें।

