योगी ने 3567 शिक्षकों को बांटे नियुक्ति पत्र, बोले- अब प्रतिभाओं के अधिकार पर डकैती नहीं
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लखनऊ, 22 सितंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा चयनित 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इनमें प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता (पीजीटी) और सहायक अध्यापक (टीजीटी) के पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब प्रतिभावान युवाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ और नियुक्तियों में अनियमितता के लिए कोई स्थान नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सरकार की प्राथमिकता है। किसी भी अभ्यर्थी से नियुक्ति के नाम पर पैसे की मांग करने वाले के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र पाने वाले शिक्षकों को केवल सरकारी नौकरी नहीं मिली है, बल्कि उन्हें प्रदेश की भावी पीढ़ी के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी मिली है।
एक सप्ताह में 5,297 युवाओं को नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मंगलवार को 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। इसके साथ ही पिछले एक सप्ताह में कुल 5,297 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को इसी तरह नियुक्तियां देती रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में करीब 9.5 लाख युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है। उन्होंने कहा कि अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार नियुक्ति पत्र देती जाएगी और विरोधी इसकी गिनती करते रहें।
2015-16 में आठ लाख रुपये मांगे जाने का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पाने वाले एक अभ्यर्थी का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने वर्ष 2015-16 में भी इसी पद के लिए आवेदन किया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, उस समय उससे कथित तौर पर आठ लाख रुपये की मांग की गई थी। अभ्यर्थी ने रकम जुटाने का प्रयास किया, लेकिन अधिक धन देने वाले दूसरे व्यक्ति के चयन के कारण उसे नियुक्ति नहीं मिल सकी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाद में संबंधित प्रक्रिया निरस्त की गई और अब उसी अभ्यर्थी को उसके आवेदन वाले पद पर नियुक्ति मिली है। उन्होंने इसे पारदर्शी चयन प्रक्रिया के जरिए प्रतिभाओं को अवसर मिलने का उदाहरण बताया।
नियुक्ति के बाद लेनदेन की शिकायत पर सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र मिलने के बाद किसी भी शिक्षक, प्रधानाध्यापक, प्रधानाचार्य या प्रवक्ता से किसी प्रकार के लेनदेन की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि इस तरह की शिकायत सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इसका लाभ दिया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन बिना अनावश्यक दबाव के कर सकें।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की बेसिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में कई कमियां थीं। उनके अनुसार, स्कूलों में जर्जर भवन, शौचालय, पेयजल, स्मार्ट क्लास और डिजिटल सुविधाओं का अभाव था। इसके बाद ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से आधारभूत सुविधाओं में सुधार किया गया।
माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 2,300 से अधिक विद्यालयों में नए भवन और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित किए जाने की जानकारी मुख्यमंत्री ने दी। उन्होंने कहा कि स्कूलों में बेहतर प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और कक्षाएं तैयार की जा रही हैं। साथ ही स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा का वातावरण देने पर जोर दिया जा रहा है।
3,567 शिक्षक लाखों विद्यार्थियों का करेंगे मार्गदर्शन
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि एक शिक्षक साल में औसतन 100 विद्यार्थियों के साथ संवाद करता है तो नियुक्त किए गए 3,567 शिक्षक एक वर्ष में करीब 3.5 लाख से अधिक बच्चों का मार्गदर्शन कर सकते हैं। इसलिए शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों की जिज्ञासा को दिशा देने, उनमें आत्मविश्वास विकसित करने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री ने तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए भारतीय शिक्षा परंपरा में गुरु की भूमिका को रेखांकित किया।
श्रीराम, चाणक्य, मालवीय और कलाम का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने श्रीराम के जीवन में गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि, अगस्त्य और चाणक्य के उदाहरण भी दिए। इसके अलावा महामना मदन मोहन मालवीय और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के संदर्भ से उन्होंने बताया कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है।
उन्होंने नवनियुक्त शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों को केवल विषय का ज्ञान न दें, बल्कि उन्हें देश, समाज और दुनिया में होने वाले महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से भी परिचित कराएं। विद्यार्थियों को महापुरुषों के जीवन और उपलब्धियों के बारे में जानकारी देना भी शिक्षक की जिम्मेदारी का हिस्सा होना चाहिए।
एनसीटीई को पत्र लिखने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में धरने पर बैठे युवाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंत्री से राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) को पत्र लिखने और ऐसे युवाओं के लिए उचित व्यवस्था या आवश्यक छूट की संभावनाओं पर विचार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे पात्र युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में अवसर मिल सके।
2047 के भारत के लिए तैयार होगी नई पीढ़ी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 के भारत का नेतृत्व आज की युवा पीढ़ी करेगी। आज जो विद्यार्थी 13 से 15 वर्ष की उम्र में हैं, वे 2047 में देश के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे होंगे। कोई डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक या सामाजिक कार्यकर्ता बनेगा।
उन्होंने नवनियुक्त शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों के भीतर सकारात्मक सोच, जिज्ञासा और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करें। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य का दायित्व केवल विद्यालय का अनुशासन बनाए रखना नहीं, बल्कि स्कूल को विद्यार्थियों की जिज्ञासा और सीखने का केंद्र बनाना भी है।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार, माध्यमिक शिक्षा विभाग की सचिव किंजल सिंह सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

