बांदा में सिंचाई विभाग का टेंडर हुआ विवादित: पढ़िए ठेकेदार के आरोप, जांच समिति से रखी कार्रवाई की मांग

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रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के लघु डाल नहर खंड के सब डिवीजन-द्वितीय में टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है।

एक ठेकेदार ने विभाग के एक अवर अभियंता (जेई) पर काम दिलाने के नाम पर धन लेने, भुगतान से जुड़े विवाद तथा शिकायत के बाद धमकियां मिलने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

वहीं, मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन द्वारा समिति गठित किए जाने के बाद अब शिकायतकर्ता निष्पक्ष कार्रवाई और सुरक्षा की मांग कर रहा है।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभाग की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और जांच प्रक्रिया जारी है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

ठेकेदार का दावा- काम के बदले धन लिया गया

शिकायतकर्ता सुरेंद्र, जिन्होंने स्वयं को अनुसूचित जाति वर्ग का ठेकेदार बताया है, का आरोप है कि उन्हें विभाग में कार्य दिलाने के नाम पर धनराशि जमा कराई गई तथा एफडीआर भी जमा कराई गई।

उनके अनुसार बाद में भुगतान और हिसाब-किताब को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।

ठेकेदार का कहना है कि जब उन्होंने अपने बकाया और लेन-देन का विवरण मांगा, तब उन्हें अपेक्षित कार्य नहीं मिला और इसके बाद कथित रूप से मानसिक दबाव तथा धमकियां मिलने लगीं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने 1 जून 2026 को जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा अधीक्षण अभियंता को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की मांग की।

इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर एक जांच समिति गठित की गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने 23 जून 2026 तथा 1 जुलाई 2026 को समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपने दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत किए।

दूसरी ओर, संबंधित अवर अभियंता ने भी जांच समिति के सामने अपना पक्ष रखा इस प्रकार दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद जांच समिति मामले की समीक्षा कर रही है।

शिकायतकर्ता ने धमकी भरे कॉल आने का लगाया आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने के कुछ समय बाद उन्हें अज्ञात नंबरों से फोन कॉल आने लगे, जिनमें कथित रूप से शिकायत वापस लेने और दबाव बनाने का प्रयास किया गया।

हालांकि इन कॉल्स के संबंध में पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। यदि ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का विषय भी बन सकता है।

इसलिए शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

अधिकारियों से भी मांगा गया जवाब

मामले को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों से भी प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) से संपर्क करने पर उन्हें बताया गया कि वे मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियों में व्यस्त हैं।

हालांकि विभाग की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में जांच पूरी होने तक विभाग का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

किसानों और स्थानीय लोगों में भी चर्चा

लघु डाल नहर खंड का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाना और किसानों को पानी उपलब्ध कराना है।

इसलिए जब विभाग से जुड़े किसी टेंडर या कार्यप्रणाली को लेकर विवाद सामने आता है तो इसका असर केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्थानीय किसानों और आम नागरिकों के बीच भी चर्चा का विषय बन जाता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि किसी भी सरकारी विभाग में शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी समयबद्ध और पारदर्शी जांच होना आवश्यक है। इससे जनता का विश्वास भी बना रहता है और प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता भी मजबूत होती है।

निष्पक्ष जांच की मांग हुई तेज

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि जांच पूरी होने तक उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए ताकि वे बिना किसी दबाव के अपने साक्ष्य और पक्ष प्रस्तुत कर सकें।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि जांच पारदर्शी तरीके से होती है तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा मजबूत होता है।

प्रशासनिक पारदर्शिता की आवश्यकता

सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होना आवश्यक है। इससे न केवल सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित होता है, बल्कि योग्य ठेकेदारों को भी समान अवसर मिलता है।

यदि किसी पक्ष को प्रक्रिया में अनियमितता का संदेह हो तो उसका समाधान निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही होना चाहिए।

इसी कारण इस मामले में भी सभी पक्षों के तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा। बांदा के लघु डाल नहर खंड में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े इस विवाद ने कई सवाल खड़े किए हैं।

एक ओर ठेकेदार ने वसूली, धमकी और दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है। यदि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो इससे न केवल इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूती मिलेगी।

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