सैफ अली खान बोले- ‘धुरंधर’ ने बदल दी मेरी सोच, स्क्रिप्ट चयन और संगीत को लेकर दिया बड़ा बयान
Digital UP News Desk
मुंबई :बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता और अलग तरह की फिल्मों के चयन के लिए जाने जाते हैं। अपने तीन दशक से अधिक लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने कई यादगार फिल्मों में काम किया है।
हालांकि, हाल ही में दिए गए एक बयान ने फिल्म प्रेमियों और बॉलीवुड इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है।
सैफ अली खान ने निर्देशक आदित्य धर की चर्चित फिल्म ‘धुरंधर’ की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि इस फिल्म ने न केवल उन्हें प्रभावित किया है, बल्कि फिल्मों की स्क्रिप्ट चुनने और संगीत के उपयोग को लेकर उनकी पूरी सोच बदल दी है।
‘धुरंधर’ ने बदली सैफ अली खान की सोच
एक हालिया बातचीत के दौरान सैफ अली खान ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में कई बेहतरीन फिल्में देखी और की हैं, लेकिन ‘धुरंधर’ ऐसी फिल्म है जिसने उन्हें यह महसूस कराया कि अब हिंदी सिनेमा नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उनके अनुसार, इस फिल्म ने कहानी कहने के तरीके, संगीत के इस्तेमाल और दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की कला को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।
उन्होंने कहा कि पहले फिल्मों में गानों को अक्सर मनोरंजन का माध्यम माना जाता था, लेकिन अब संगीत कहानी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
यदि संगीत कथा को आगे बढ़ाए और पात्रों की भावनाओं को मजबूत करे, तभी उसका वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है।
स्क्रिप्ट चयन को लेकर कही महत्वपूर्ण बात
सैफ अली खान ने यह भी स्वीकार किया कि ‘धुरंधर’ देखने के बाद उन्होंने भविष्य में फिल्मों की स्क्रिप्ट चुनने के अपने दृष्टिकोण पर दोबारा विचार करना शुरू किया है।
उनके अनुसार, अब केवल मनोरंजक कहानी पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी स्क्रिप्ट होनी चाहिए जो दर्शकों के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित कर सके।
साथ ही फिल्म का प्रत्येक तत्व—कहानी, निर्देशन, अभिनय और संगीत—एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए।
उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में वह ऐसी फिल्मों को प्राथमिकता देंगे जिनमें दमदार कहानी के साथ तकनीकी गुणवत्ता और प्रभावी संगीत का संतुलित मेल हो।
संगीत केवल गाना नहीं, कहानी का हिस्सा
सैफ अली खान ने विशेष रूप से फिल्म के संगीत की प्रशंसा की। उनका कहना था कि ‘धुरंधर’ का संगीत केवल सुनने के लिए नहीं बनाया गया, बल्कि उसे कहानी का हिस्सा बनाया गया है।
उन्होंने फिल्म के गीत ‘शरारत’ की भी तारीफ करते हुए कहा कि यह पारंपरिक फिल्मी गानों से अलग अनुभव देता है और यह दिखाता है कि संगीत किस तरह कहानी को नई ऊंचाई तक पहुंचा सकता है।
सैफ के अनुसार, यदि किसी फिल्म का संगीत दर्शकों को कहानी के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ दे, तो उसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है।
आदित्य धर की निर्देशन शैली की सराहना
निर्देशक आदित्य धर पहले भी अपनी फिल्मों के लिए सराहना बटोर चुके हैं। सैफ अली खान का मानना है कि आदित्य धर केवल एक अच्छी कहानी नहीं सुनाते, बल्कि वे प्रत्येक दृश्य को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि दर्शक पूरी फिल्म के दौरान उससे जुड़े रहते हैं।
उन्होंने कहा कि निर्देशक का विजन ही किसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत होता है और ‘धुरंधर’ इसका शानदार उदाहरण है।
बदल रहा है हिंदी सिनेमा
सैफ अली खान ने अपने बयान में यह भी कहा कि हिंदी फिल्म उद्योग तेजी से बदल रहा है।
अब दर्शक केवल बड़े सितारों या भव्य सेटों से प्रभावित नहीं होते, बल्कि वे मजबूत कहानी, उत्कृष्ट अभिनय और प्रभावी निर्देशन को अधिक महत्व देते हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक कंटेंट की उपलब्धता ने दर्शकों की पसंद को काफी परिपक्व बना दिया है। इसलिए फिल्म निर्माताओं को भी नए प्रयोग करने होंगे।
नई पीढ़ी के फिल्म निर्माताओं के लिए संदेश
सैफ अली खान का मानना है कि युवा निर्देशकों और लेखकों को पारंपरिक फार्मूले से आगे बढ़कर नई कहानियों पर काम करना चाहिए।
उनके अनुसार, यदि फिल्म में मौलिकता होगी और संगीत कहानी के साथ स्वाभाविक रूप से जुड़ा होगा, तो दर्शक उसे अवश्य पसंद करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि आज का समय रचनात्मकता का है और फिल्म उद्योग को लगातार नए विचारों को अपनाने की आवश्यकता है।
प्रशंसकों के बीच बढ़ी चर्चा
सैफ अली खान के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी ‘धुरंधर’ को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कई प्रशंसकों ने सैफ की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि अच्छी कहानी और प्रभावी संगीत किसी भी फिल्म की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वहीं फिल्म समीक्षकों का भी मानना है कि जब उद्योग के अनुभवी अभिनेता किसी फिल्म की खुलकर सराहना करते हैं, तो उससे फिल्म के प्रति दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ जाती है।
सैफ अली खान की आगामी योजनाएं
वर्क फ्रंट की बात करें तो सैफ अली खान आने वाले समय में कई नए प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाले हैं।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह फिल्मों का चयन पहले से अधिक सावधानी से करेंगे और ऐसी कहानियों को प्राथमिकता देंगे जो दर्शकों पर स्थायी प्रभाव छोड़ सकें।
सैफ अली खान का यह बयान केवल एक फिल्म की प्रशंसा नहीं है, बल्कि हिंदी सिनेमा में हो रहे बदलाव की ओर भी संकेत करता है।
उनके अनुसार, अब समय आ गया है कि फिल्में केवल मनोरंजन तक सीमित न रहें, बल्कि मजबूत कहानी, प्रभावशाली निर्देशन और सार्थक संगीत के माध्यम से दर्शकों के साथ गहरा संबंध स्थापित करें।
यदि अनुभवी कलाकारों की यह सोच आने वाले समय में फिल्म उद्योग में और मजबूत होती है, तो दर्शकों को निश्चित रूप से अधिक गुणवत्ता वाली और यादगार फिल्में देखने को मिल सकती हैं।

