सीएम योगी का दावा: 2017 से पहले यूपी में दंगे और भर्ती में अनियमितता थी, अब पारदर्शी प्रक्रिया से मिल रही नौकरी
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को सरकारी नौकरियों और प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा। नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में दंगे होते थे, भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती थीं और युवाओं के सामने रोजगार के साथ-साथ प्रदेश की पहचान का भी संकट था। मुख्यमंत्री के इन दावों की हालिया रिपोर्टों में भी चर्चा हुई है।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछली व्यवस्था में भर्ती बोर्ड और आयोगों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकारों ने भर्ती बोर्डों में अपने लोगों को बैठा रखा था, जिसके कारण युवाओं को निष्पक्ष अवसर नहीं मिल पाता था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उस समय एक भी भर्ती ईमानदारी से नहीं होती थी।
हालांकि, ये बातें मुख्यमंत्री द्वारा पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपने संबोधन में वर्तमान सरकार की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और शुचितापूर्ण बताया तथा नियुक्ति पत्र वितरण को इसका उदाहरण बताया।
2017 से पहले कानून-व्यवस्था को लेकर सीएम का दावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में आए दिन दंगे होते थे और कई स्थानों पर लंबे समय तक कर्फ्यू की स्थिति रहती थी। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में प्रदेश की छवि को लेकर लोगों के बीच अलग धारणा थी।
सीएम योगी ने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति का असर सामान्य जनजीवन के साथ-साथ कारोबार और रोजगार के अवसरों पर भी पड़ता था। उनके अनुसार, असुरक्षा की धारणा के कारण प्रदेश के विकास की गति प्रभावित हुई और युवाओं के सामने रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर जाने की स्थिति बनी।
इससे पहले भी मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश की वर्ष 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था को लेकर इसी तरह के दावे करते रहे हैं। एक रिपोर्ट में उनके हवाले से 2012-17 के दौरान 700 से अधिक दंगों का दावा दर्ज किया गया था।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने सरकारी भर्तियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले भर्ती निकलने से लेकर परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति तक युवाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती बोर्डों और आयोगों में भाई-भतीजावाद का प्रभाव था।
सीएम योगी ने कहा कि युवाओं को सरकारी नौकरी के लिए अपनी योग्यता के आधार पर अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और शुचिता पर जोर दिया है।
हालिया कार्यक्रम के संबंध में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने अब तक करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को विभिन्न विभागों में नियुक्ति पत्र दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगले छह महीनों में एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नियुक्ति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
‘नौकरी नहीं थी, पहचान का संकट भी था’
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रोजगार के साथ उत्तर प्रदेश की छवि का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के युवाओं के सामने केवल नौकरी का संकट नहीं था, बल्कि यूपी की पहचान को लेकर भी चुनौती थी।
सीएम योगी के अनुसार, उस समय प्रदेश के युवाओं को दूसरे राज्यों में रोजगार तलाशना पड़ता था और उत्तर प्रदेश की छवि के कारण उन्हें कई स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने पिछली सरकार की मानसिकता और कार्यप्रणाली को ‘बीमारू’ बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था और विकास पर पड़ा।
हालिया रिपोर्टों में भी मुख्यमंत्री के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश को अब ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में विकसित होने की बात कही।
पिछली सरकार की कार्यप्रणाली पर भ्रष्टाचार के आरोप
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार की कार्यप्रणाली को भ्रष्ट बताते हुए भर्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता नहीं होने के कारण युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ।
उन्होंने भर्ती आयोगों की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए एक पूर्व नियुक्ति का भी जिक्र किया और कहा कि उस मामले में न्यायालय तक मामला पहुंचा था। मुख्यमंत्री ने इसे पिछली भर्ती व्यवस्था की खामियों के उदाहरण के तौर पर पेश किया।
हालांकि, मुख्यमंत्री के इन आरोपों और राजनीतिक टिप्पणियों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। किसी भी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता या भ्रष्टाचार का निष्कर्ष संबंधित जांच, आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
वर्तमान सरकार की भर्ती प्रक्रिया का जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वर्तमान सरकार की ओर से चल रही भर्ती प्रक्रिया का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न भर्ती संस्थाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी सेवा का अवसर मिल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने पुलिस, होमगार्ड, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, शिक्षा चयन आयोग और लोक सेवा आयोग से जुड़ी आगामी भर्तियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपनी योग्यता और मेहनत पर भरोसा रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हो और योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिले।
रोजगार और विकास पर सरकार का जोर
सीएम योगी ने अपने संबोधन में रोजगार को प्रदेश के विकास से जोड़ते हुए कहा कि युवाओं को अवसर मिलने से आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलती है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और विकास की दिशा में बदलाव आया है।
वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को सरकारी नौकरी के साथ-साथ अन्य रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रही है। हालिया कार्यक्रम में उन्होंने अगले छह महीनों में एक लाख से अधिक नियुक्ति पत्र दिए जाने की बात दोहराई।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन में वर्ष 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया, रोजगार और उत्तर प्रदेश की छवि से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने पिछली सरकारों पर कई आरोप लगाए और वर्तमान सरकार की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बताया। दूसरी ओर, इन दावों से जुड़े राजनीतिक और प्रशासनिक पहलुओं को समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, भर्ती संस्थाओं के रिकॉर्ड और संबंधित न्यायिक मामलों को भी संदर्भ में देखना जरूरी है।

