एक समाधान दिवस से दूसरे तक बदल गई रिंकी मिश्रा की दुनिया, चेहरे पर लौटी मुस्कान

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Digital UP News

कानपुर नगर: कभी करीब 18 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी फरियाद लेकर जिलाधिकारी तक पहुंचने वाली रिंकी मिश्रा के जीवन में अब बदलाव दिखाई देने लगा है। एक समाधान दिवस से दूसरे समाधान दिवस के बीच रिंकी के परिवार की परिस्थितियों में कई सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं। शनिवार को जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह बिरसिंहपुर स्थित रिंकी के घर पहुंचे तो वहां का नजारा पहले से अलग था। जिस परिवार के सामने कभी पक्के मकान, बेटियों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर कई चिंताएं थीं, वहां अब पक्के आशियाने का निर्माण आकार ले रहा है। साथ ही सरकारी योजनाओं और रोजगार के माध्यम से रिंकी को आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है।

18 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंची थी जिलाधिकारी के पास

रिंकी मिश्रा की कहानी 18 जुलाई के संपूर्ण समाधान दिवस से शुरू होती है। उस दिन घाटमपुर तहसील में आयोजित समाधान दिवस में सुनवाई समाप्त होने के बाद जिलाधिकारी अपनी गाड़ी की ओर बढ़ रहे थे। तभी रिंकी उनके पास पहुंची। उसके हाथ में कोई प्रार्थना पत्र भी नहीं था, लेकिन अपनी समस्याओं को लेकर उसे भरोसा था कि जिलाधिकारी उसकी बात जरूर सुनेंगे।

बिरसिंहपुर से घाटमपुर की दूरी करीब 18 किलोमीटर है। आर्थिक परेशानियों के बावजूद रिंकी पैदल चलकर वहां पहुंची थी। गांव के लोगों और शुभचिंतकों ने उसे जिलाधिकारी से अपनी समस्या बताने की सलाह दी थी। इसी उम्मीद के साथ वह लंबा रास्ता तय करके समाधान दिवस में पहुंची।

जिलाधिकारी ने उसकी बात सुनी और तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद उसी दिन उपजिलाधिकारी घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह रिंकी के घर पहुंचे और परिवार की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली।

अब खुद रिंकी के घर पहुंचे डीएम

19 सितंबर को घाटमपुर में फिर संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित हुआ। हालांकि इस बार रिंकी को अपनी समस्या लेकर वहां पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ी। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह खुद उसके घर पहुंचे और परिवार का हाल जाना।

यह मुलाकात रिंकी के लिए खास रही, क्योंकि पिछली बार वह अपनी फरियाद लेकर जिलाधिकारी के पास गई थी और इस बार जिलाधिकारी खुद उसके घर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पक्के मकान के निर्माण की प्रगति देखी और परिवार से बातचीत कर उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।

जिलाधिकारी की पहल और जनसहयोग से रिंकी का पक्का मकान बनवाया जा रहा है। मकान की दीवारें तैयार हो चुकी हैं और अब जल्द ही लिंटर डालने की तैयारी है। ऐसे में कमजोर आर्थिक स्थिति में रह रहे परिवार के लिए यह बदलाव बड़ी राहत के रूप में सामने आया है।

पति की मौत के बाद दो बेटियों की जिम्मेदारी

रिंकी मिश्रा की उम्र 41 वर्ष है। करीब 10 वर्ष पहले उनके पति राजीव मिश्रा की आकस्मिक मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी रिंकी के कंधों पर आ गई। उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी 16 वर्ष की है और पूर्णतः दिव्यांग होने के कारण उसे निरंतर देखभाल की जरूरत रहती है। वहीं छोटी बेटी अदिति 14 वर्ष की है।

पति की मृत्यु के बाद परिवार के पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। ऐसे में घर चलाने के साथ-साथ बेटियों की पढ़ाई, इलाज और भविष्य को लेकर रिंकी लगातार चिंतित रहती थीं। आर्थिक परिस्थितियां कमजोर होने के कारण उनके सामने कई तरह की चुनौतियां थीं।

हालांकि, अब सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक पहल के जरिए परिवार को कई स्तरों पर सहायता मिली है।

सरकारी योजनाओं से मिली आर्थिक और सामाजिक मदद

रिंकी का अंत्योदय राशन कार्ड बन चुका है। इसके अलावा परिवार को रसोई गैस कनेक्शन भी मिला है। निराश्रित महिला पेंशन शुरू होने से रिंकी को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है। वहीं आयुष्मान कार्ड के माध्यम से परिवार को इलाज से जुड़ी आर्थिक सुरक्षा मिली है।

रिंकी की दिव्यांग बेटी का यूनिक आईडी कार्ड भी बन चुका है। इससे उसे दिव्यांगजन कल्याण से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता आसान हुआ है। इसके साथ ही दोनों बेटियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से भी आच्छादित किया जा रहा है।

इस प्रकार, प्रशासन की पहल से परिवार को एक साथ कई सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य परिवार की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के साथ ही उसे सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

रोजगार मिलने से आत्मनिर्भर बनने की राह

रिंकी के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में रोजगार का मिलना भी शामिल है। उन्हें घर के निकट स्थित प्राथमिक विद्यालय में रसोइया के रूप में काम मिल गया है। इससे अब उनके पास अपनी आय का एक साधन है।

रोजगार मिलने से रिंकी के लिए परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इसके अलावा बेटियों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर भी उन्हें पहले की तुलना में अधिक भरोसा मिला है।

अदिति ने यूनिट टेस्ट में हासिल किया प्रथम स्थान

रिंकी की छोटी बेटी अदिति ने भी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी। आर्थिक परेशानियों के कारण उसकी शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की पहल पर उसका प्रवेश पंडित राम यश मेमोरियल एजुकेशन सेंटर में कराया गया और फीस भी जमा कराई गई।

अब कक्षा सात की छात्रा अदिति ने यूनिट टेस्ट में प्रथम स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि उसके परिवार के लिए खुशी का कारण बनी। जिलाधिकारी जब उसके घर पहुंचे तो अदिति ने कहा कि वह बड़ी होकर जिलाधिकारी बनना चाहती है और लोगों की मदद करना चाहती है।

रिंकी के परिवार के लिए यह बदलाव केवल सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार और आवास के स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। एक समाधान दिवस में अपनी समस्याएं लेकर पहुंची रिंकी के लिए अगले समाधान दिवस तक परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। पक्का घर, रोजगार, योजनाओं का लाभ और बेटी की पढ़ाई में सफलता ने उसके जीवन में नई उम्मीद पैदा की है।