UP Election 2027: बीजेपी के आंतरिक सर्वे में 67 विधायकों पर सवाल, टिकट बदलने की चर्चा

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Digital UP News

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में पार्टी के भीतर विधायकों के प्रदर्शन, संगठन से तालमेल और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता का आकलन किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि एक आंतरिक सर्वे में करीब 67 मौजूदा विधायकों की रिपोर्ट को कमजोर पाया गया है। हालांकि, इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

वहीं, अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में खराब रिपोर्ट कार्ड वाले विधायकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। सितंबर में प्रकाशित NDTV की एक रिपोर्ट में करीब 125-128 मौजूदा विधायकों के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी की बात कही गई थी। ऐसे में 67 विधायकों वाला आंकड़ा फिलहाल राजनीतिक सूत्रों से जुड़ा दावा माना जाना चाहिए।

2027 के लिए उम्मीदवारों के चयन पर जोर

उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं और भाजपा ने आगामी चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी अलग-अलग स्तरों पर फीडबैक जुटा रही है। इसमें मौजूदा विधायकों के कामकाज के साथ-साथ जनता और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी स्थिति का आकलन भी शामिल है।

जुलाई में सामने आई रिपोर्टों में बताया गया था कि भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन के लिए बहु-चरणीय सर्वे प्रक्रिया शुरू की है। इसमें किसान, व्यापारी, महिलाएं, युवा, सामाजिक संगठन और पार्टी कार्यकर्ताओं से भी फीडबैक लेने की बात कही गई थी।

इसका उद्देश्य केवल मौजूदा विधायकों का मूल्यांकन करना नहीं है, बल्कि उन सीटों पर भी संभावित उम्मीदवारों की स्थिति समझना है, जहां पार्टी को पिछले चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। भाजपा के सहयोगी दलों से जुड़ी सीटों पर भी फीडबैक लिए जाने की खबरें सामने आई थीं।

किन आधारों पर हो रहा विधायकों का आकलन?

सूत्रों के मुताबिक विधायक के मूल्यांकन में कई स्थानीय पहलुओं को महत्व दिया जा रहा है। इनमें क्षेत्र में सक्रियता, जनता से संपर्क, विकास कार्यों की स्थिति, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और स्थानीय स्तर पर विधायक की स्वीकार्यता जैसे मुद्दे शामिल हैं।

इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में पार्टी संगठन के साथ किस तरह काम कर रहा है। चुनावी राजनीति में बूथ स्तर का संगठन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए पार्टी के स्तर पर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि मौजूदा विधायक का स्थानीय संगठन के साथ तालमेल कितना प्रभावी है।

हालिया रिपोर्ट में भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े द्वारा विधायकों के साथ रिपोर्ट कार्ड को लेकर चर्चा किए जाने की बात भी सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी संगठन मौजूदा जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन को चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है।

एंटी-इंकम्बेंसी पर पार्टी की नजर

2027 के चुनाव में भाजपा के सामने मौजूदा विधायकों के प्रति स्थानीय असंतोष को संभालने की चुनौती भी होगी। ऐसे में पार्टी संभावित एंटी-इंकम्बेंसी को कम करने के लिए उम्मीदवारों में बदलाव का विकल्प खुला रख सकती है।

हालांकि, किसी विधायक का टिकट कटना या बरकरार रहना केवल एक सर्वे के आधार पर तय होगा, ऐसा अभी आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है। उम्मीदवारों के चयन में संगठनात्मक समीकरण, स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियां, गठबंधन और केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय जैसे कई पहलू भी भूमिका निभा सकते हैं।

इसी वजह से फिलहाल किसी भी विधायक का टिकट तय या कटना कहना जल्दबाजी होगी। अंतिम फैसला पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

लखनऊ से दिल्ली तक सक्रियता बढ़ने की चर्चा

आंतरिक सर्वे और संभावित टिकट बदलाव की चर्चाओं के बीच भाजपा के कई मौजूदा विधायक अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात और संगठन के साथ समन्वय बढ़ाने की कोशिशों को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

दरअसल, चुनाव से पहले विधायकों के लिए अपने क्षेत्र में सक्रियता दिखाना और संगठन के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में आने वाले महीनों में भाजपा के भीतर टिकट को लेकर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

नए चेहरों पर दांव की संभावना

यदि पार्टी के आंतरिक आकलन में किसी क्षेत्र में मौजूदा विधायक की स्थिति कमजोर पाई जाती है, तो वहां नए चेहरे को मौका देने का विकल्प अपनाया जा सकता है। इससे पार्टी स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी माहौल को कम करने की कोशिश कर सकती है।

हालांकि, नए चेहरों को मौका देने का अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व ही करेगा। इसलिए फिलहाल यह कहना उचित होगा कि सर्वे रिपोर्ट उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में एक इनपुट हो सकती है, अंतिम सूची नहीं।

मिशन-2027 में संगठन की भूमिका अहम

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर भाजपा लगातार संगठन को सक्रिय करने पर जोर दे रही है। हालिया बैठकों में बूथ स्तर पर संवाद और संगठन को मजबूत करने की बात भी सामने आई है।

ऐसे में आने वाले समय में विधायकों की रिपोर्ट, स्थानीय संगठन का फीडबैक और जनता के बीच उनकी स्थिति पार्टी की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल 67 विधायकों के कमजोर रिपोर्ट कार्ड का दावा चर्चा में है, लेकिन इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए टिकट कटने से जुड़े अंतिम निष्कर्ष के लिए भाजपा की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना जरूरी होगा। इतना जरूर है कि 2027 के चुनाव से पहले पार्टी मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन की समीक्षा और संभावित उम्मीदवारों के चयन को लेकर सक्रिय दिखाई दे रही है।