UP Weather: लखनऊ-कानपुर समेत कई शहरों में बारिश, 31 जिलों में अलर्ट-नदी में समाई 20 बीघा जमीन

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Digital UP News Desk

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई का समय नजदीक आते ही मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। शनिवार को राजधानी लखनऊ, कानपुर, बरेली, बहराइच और झांसी समेत प्रदेश के कई शहरों में बारिश देखने को मिली। कई इलाकों में अचानक बादल छाने के बाद तेज बौछारें पड़ीं। वहीं, मौसम में आए इस बदलाव के बीच प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक और बारिश को लेकर चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग मौसम अपडेट में प्रभावित जिलों की संख्या और चेतावनी की स्थिति में अंतर है।

कानपुर में दोपहर में छाया अंधेरा, फिर झमाझम बारिश

कानपुर में शनिवार दोपहर मौसम ने अचानक करवट बदली। करीब दो बजे आसमान में घने बादल छा गए और दिन के समय ही अंधेरा जैसा माहौल बन गया। इसके कुछ ही देर बाद तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण सड़कों पर पानी भरने की स्थिति बनी और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। कानपुर में मानसून की गतिविधि के बीच बारिश का यह दौर लंबे अंतराल के बाद देखने को मिला। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में दोपहर बाद हुई बारिश से उमस और गर्मी से कुछ राहत मिली।

हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग के कानपुर के एक स्थानीय स्टेशन के पूर्वानुमान में 19 सितंबर के लिए आंशिक रूप से बादल छाए रहने और कोई चेतावनी नहीं दिखाए जाने की जानकारी भी दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की स्थिति अलग हो सकती है।

लखनऊ में अचानक बदला मौसम

राजधानी लखनऊ में भी शनिवार दोपहर मौसम में अचानक बदलाव देखा गया। दोपहर करीब 12 बजे बादलों की आवाजाही बढ़ी और कई इलाकों में बारिश की स्थिति बनी। इससे पहले सुबह मौसम अपेक्षाकृत सामान्य था। मौसम विभाग के उपलब्ध शहर-विशेष पूर्वानुमान में लखनऊ के लिए 19 सितंबर को आंशिक रूप से बादल छाए रहने से लेकर आसमान साफ होने की संभावना दर्ज की गई थी।

इस बीच, प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी स्थानीय स्तर पर बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिलीं। मौसम के इस बदलाव ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि मानसून की वापसी के बावजूद कुछ इलाकों में बारिश का दौर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

31 जिलों में अलर्ट की चर्चा, जिलावार स्थिति पर नजर

शनिवार को उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश और गरज-चमक की संभावना को लेकर मौसम अपडेट जारी किए गए। कुछ रिपोर्टों में 31 जिलों के लिए अलर्ट की बात कही गई है। वहीं, एक अन्य मौसम अपडेट में 19 सितंबर को करीब 38 जिलों में हल्की बारिश की संभावना बताई गई थी और गंभीर मौसम संबंधी चेतावनी नहीं होने की जानकारी दी गई थी।

इसलिए लोगों के लिए जरूरी है कि वे अपने जिले के लिए जारी स्थानीय मौसम चेतावनी को प्राथमिकता दें। खासकर गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचना चाहिए। मौसम विभाग की ताजा जानकारी पर नजर रखना भी उपयोगी रहेगा।

नदियों का जलस्तर घटा, लेकिन कटान ने बढ़ाई चिंता

लगातार हुई मानसूनी बारिश का असर प्रदेश की नदियों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई दिया है। गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर कम होने के बाद कई गांवों से बाढ़ का पानी उतरने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 25 गांवों को राहत मिली है, जबकि करीब 10 गांव अभी भी बाढ़ की स्थिति से प्रभावित हैं। लगभग 8 हजार लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि, जलस्तर घटने के बावजूद नदी कटान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ाई है। कटान के कारण करीब 20 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समा जाने की जानकारी सामने आई है। इससे किसानों को जमीन और फसल दोनों स्तर पर नुकसान का सामना करना पड़ा है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन की निगरानी और सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

अस्पताल की ओपीडी में निकला कोबरा

बारिश और जलभराव के बीच बाराबंकी से एक अलग मामला भी सामने आया। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में कोबरा सांप दिखाई दिया। सांप को देखते ही अस्पताल में मौजूद मरीजों और कर्मचारियों के बीच हलचल मच गई। बाद में उसे सुरक्षित तरीके से हटाने की कार्रवाई की गई।

दरअसल, बारिश के मौसम में सांप और अन्य जीव-जंतु सुरक्षित और सूखे स्थानों की तलाश में मानव बस्तियों की ओर आ सकते हैं। इसलिए ग्रामीण और शहरी इलाकों में जलभराव वाले स्थानों तथा बंद कमरों की सफाई के दौरान सावधानी बरतना जरूरी है।

मानसून की विदाई के बीच बदलता रहेगा मौसम

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का दौर शुरू हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी की शुरुआत 19 सितंबर के आसपास होने की संभावना जताई थी। हालांकि, मानसून की विदाई का मतलब यह नहीं है कि प्रदेश के हर हिस्से में बारिश तत्काल पूरी तरह बंद हो जाएगी। स्थानीय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बनी रह सकती हैं।

ऐसे में उत्तर प्रदेश के लोगों को अगले कुछ दिनों तक मौसम पर नजर रखनी होगी। खासकर किसानों, नदी किनारे रहने वाले परिवारों और रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट के अनुसार अपनी गतिविधियों की योजना बनानी चाहिए।

कुल मिलाकर, मानसून की विदाई से पहले उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों में अचानक बारिश ने जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत दी, वहीं नदी कटान और जलभराव वाले इलाकों में चुनौतियां अभी बनी हुई हैं। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और आम लोगों की सतर्कता, दोनों जरूरी हैं।