ममता बनर्जी पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट, TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर चुनाव आयोग के फैसले को दी चुनौती

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Digital UP News

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें आयोग ने पार्टी के मूल नाम ‘All India Trinamool Congress’ और उसके पारंपरिक ‘Flowers and Grass’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाई थी। इसके बाद आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं।

ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका में चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस याचिका को 21 सितंबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए मेंशन किए जाने की संभावना है। ऐसे में अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को दिए अलग नाम और चिन्ह

चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम दिया गया है, जबकि उसके लिए ‘Football Player’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।

वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और ‘Envelope’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। आयोग के इस निर्णय के बाद दोनों गुट आगामी उपचुनावों में अपने-अपने आवंटित नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतर सकेंगे।

मूल TMC नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतरिम रोक

इससे पहले चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक ‘Flowers and Grass’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाई थी। आयोग के सामने दोनों पक्षों की ओर से पार्टी पर नियंत्रण, संगठनात्मक अधिकार और नाम एवं चुनाव चिन्ह को लेकर दावे पेश किए गए थे।

आयोग के मुताबिक, दोनों गुट खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बता रहे थे। ऐसे में विवाद के अंतिम समाधान तक दोनों पक्षों को अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था फिलहाल संबंधित उपचुनावों के संदर्भ में लागू की गई है।

ममता गुट को मिला ‘Football Player’ चिन्ह

चुनाव आयोग के आदेश के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की नई चुनावी पहचान ‘Mamata All India Trinamool Congress’ और ‘Football Player’ चिन्ह होगी। दूसरी ओर, अरूप रॉय गुट ‘Democratic Trinamool Congress’ के नाम से और ‘Envelope’ चिन्ह के साथ चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेगा।

इसके अलावा, आयोग ने दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में मानने की बात कही है। यह व्यवस्था दोनों गुटों को आगामी चुनावी प्रक्रिया में अलग-अलग पहचान के साथ आगे बढ़ने का अवसर देती है।

आगामी उपचुनावों पर पड़ेगा असर

चुनाव आयोग का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। इसके अलावा असम की नगांव लोकसभा सीट के लिए भी उपचुनाव की चुनावी प्रक्रिया से इसका संबंध बताया गया है।

दोनों गुटों की ओर से चुनावी नामांकन को लेकर अलग-अलग दावे किए गए थे। इसलिए आयोग ने नई पहचान और चुनाव चिन्ह आवंटित करने की व्यवस्था की, ताकि उम्मीदवारों की चुनावी प्रक्रिया स्पष्ट रूप से आगे बढ़ सके।

सुप्रीम कोर्ट में अब क्या होगा?

ममता बनर्जी की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की संभावना है। रिपोर्टों के अनुसार, मामले को 21 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम रूप से मामले की सुनवाई कब और किस रूप में होगी, यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्पष्ट होगा।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले और पार्टी के नाम एवं चुनाव चिन्ह से जुड़ा विवाद होगा। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया और दोनों गुटों को दी गई अलग-अलग पहचान भी कानूनी सुनवाई का हिस्सा बन सकती है।

पार्टी की पहचान को लेकर जारी है कानूनी प्रक्रिया

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद अब चुनाव आयोग से आगे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। फिलहाल आयोग के आदेश के तहत दोनों गुट अलग-अलग नाम और चिन्ह के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ेंगे। वहीं, ममता बनर्जी की याचिका के बाद इस व्यवस्था को लेकर न्यायिक समीक्षा की संभावना बन गई है।

इस प्रकार आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस विवाद की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, अदालत का फैसला आने तक चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित अंतरिम व्यवस्था प्रभावी रहेगी। इसलिए 21 सितंबर को संभावित मेंशनिंग और उसके बाद होने वाली न्यायिक कार्यवाही पर सभी की नजर रहेगी।

फिलहाल, इस पूरे मामले में दो स्तरों पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। एक ओर चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिन्ह दे दिए हैं, वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब आगे की स्थिति न्यायालय की सुनवाई और आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।