फर्रुखाबाद में हजरत खुदादीन चिश्ती साबरी का सालाना फातेहा संपन्न, कव्वाली और लंगर में उमड़ी जायरीनों की भीड़
रिपोर्ट: हर्ष वर्मा
फर्रुखाबाद: बनखड़िया स्थित हजरत पहलवान शाह रखा दरगाह परिसर में शनिवार को हजरत खुदादीन चिश्ती साबरी का सालाना फातेहा श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह पहुंचे और फातेहा में शामिल होकर तबर्रुक ग्रहण किया। पूरे दिन दरगाह परिसर में धार्मिक एवं सूफियाना माहौल बना रहा। इसके साथ ही जायरीनों के लिए लंगर की व्यवस्था की गई, जिसमें दाल-रोटी का भंडारा पूरे दिन चलता रहा।
सालाना फातेहा के अवसर पर सुबह से ही दरगाह परिसर में जायरीनों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने दरगाह पर पहुंचकर अपनी अकीदत पेश की और दुआ मांगी। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने धार्मिक रस्मों में हिस्सा लिया। वहीं, आयोजन स्थल पर मौजूद व्यवस्थापकों और सहयोगियों की ओर से जायरीनों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया।
मिन्हाज आलिम साहब ने अदा कराई फातेहा की रस्म
कार्यक्रम के दौरान मिन्हाज आलिम साहब ने फातेहा की रस्म अदा कराई। इस मौके पर बड़ी संख्या में जायरीन मौजूद रहे। फातेहा के दौरान देश में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे की दुआ की गई। इसके बाद जायरीनों ने तबर्रुक ग्रहण किया।
शाम करीब पांच बजे रस्म-ए-रंग के साथ कुल शरीफ संपन्न हुआ। इसके बाद उपस्थित जायरीनों ने दुआ में हिस्सा लिया। कुल शरीफ के समापन के बाद दरगाह परिसर में कव्वाली कार्यक्रम आयोजित किया गया। कव्वाली सुनने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और उन्होंने सूफियाना कलाम का आनंद लिया।
अमन और भाईचारे की दुआ
रखा दरगाह के बाबा अब्दुल हक चिश्ती साबरी ने इस अवसर पर देश में गंगा-जमुनी तहजीब, अमन-चैन और भाईचारा कायम रहने की दुआ की। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सूफियाना आयोजन समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों से लोग एक साथ शामिल होते हैं। इससे सामाजिक मेलजोल बढ़ता है और लोगों के बीच आपसी सौहार्द की भावना मजबूत होती है। कार्यक्रम में देश और समाज की खुशहाली के लिए भी दुआ की गई।
पूरे दिन चलता रहा लंगर
सालाना फातेहा के अवसर पर दरगाह परिसर में पूरे दिन लंगर की व्यवस्था की गई। जायरीनों के लिए दाल-रोटी का भंडारा चलता रहा। दरगाह आने वाले लोगों ने लंगर ग्रहण किया। आयोजन के दौरान सेवा और व्यवस्था में जुटे लोगों ने जायरीनों को भोजन उपलब्ध कराने में सहयोग किया।
इसके अलावा, दरगाह परिसर में आने वाले जायरीनों की सुविधा के लिए आयोजन से जुड़े लोगों ने व्यवस्थाओं को संभाला। सुबह से लेकर शाम तक परिसर में लोगों की आवाजाही बनी रही। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक रस्मों के साथ-साथ कव्वाली ने भी माहौल को सूफियाना रंग दिया।
आयोजन में इन लोगों ने किया सहयोग
सालाना फातेहा और कव्वाली कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में स्थानीय लोगों ने भी सहयोग किया। आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में मुजीव, सद्दाम, ताजुद्दीन अहमद, रामदास जी, नौशाद, पप्पू भैया, फुंदन, गोपाल, आनंद, दिलीप, विकास पाल, विनोद पाल, रवि यादव, टीटू, आलमगीर मंसूरी, अली हसन, इशू, अहमद्दीन, खुशहाल और रौनक सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया।
इन लोगों ने कार्यक्रम के दौरान आने वाले जायरीनों की सुविधा, लंगर व्यवस्था और अन्य आयोजन संबंधी जिम्मेदारियों में योगदान दिया। परिणामस्वरूप कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
दरगाह परिसर में बना रहा सूफियाना माहौल
कार्यक्रम के दौरान पूरे दिन दरगाह परिसर में जायरीनों की आवाजाही बनी रही। फातेहा, कुल शरीफ, दुआ और कव्वाली कार्यक्रम में लोगों ने श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया। वहीं, लंगर में भी बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण किया।
इस तरह हजरत खुदादीन चिश्ती साबरी का सालाना फातेहा धार्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव के संदेश के साथ संपन्न हुआ। आयोजन में शामिल लोगों ने देश में शांति, भाईचारे और खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम के समापन के बाद भी दरगाह परिसर में जायरीनों का आना-जाना जारी रहा।
रिपोर्ट: हर्ष वर्मा

