आईआईटी कानपुर ने 900 माध्यमिक शिक्षकों के लिए शुरू किया डिजिटल कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम
रिपोर्ट – विवेक कृष्ण दीक्षित
कानपुर; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IIT Kanpur) ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के सहयोग से माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए डिजिटल कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का विस्तार किया है। डिजिटल साक्षरता एवं कम्प्यूटेशनल थिंकिंग अवधारणाएं (DLCCAI) कार्यक्रम के तहत अब प्रदेश के 900 प्रतिभागियों को डिजिटल साक्षरता, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीक आधारित शिक्षण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करना और उन्हें कक्षा शिक्षण के साथ-साथ अपने प्रशासनिक कार्यों में डिजिटल उपकरणों के प्रभावी इस्तेमाल के लिए सक्षम बनाना है। कार्यक्रम में माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) के प्रवक्ता और SCERT से संबद्ध इकाइयों के अधिकारी शामिल होंगे।
छह बैचों में होगा प्रशिक्षण
आईआईटी कानपुर के आउटरीच कार्यालय और डिजाइन विभाग की ओर से संचालित इस कार्यक्रम को छह बैचों में आयोजित किया जाएगा। प्रत्येक बैच में 150 प्रतिभागी होंगे। प्रशिक्षण का प्रारूप मिश्रित शिक्षण यानी ब्लेंडेड लर्निंग पर आधारित होगा। इसके तहत आईआईटी कानपुर में कक्षा आधारित प्रशिक्षण के साथ ऑनलाइन शिक्षण, मार्गदर्शन और व्यावहारिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
कार्यक्रम की शुरुआत आईआईटी कानपुर में पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण से होगी। इस दौरान प्रतिभागियों को डिजिटल तकनीक की बुनियादी जानकारी के साथ कार्यकुशलता बढ़ाने वाले डिजिटल टूल, स्प्रेडशीट, रचनात्मकता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉक आधारित प्रोग्रामिंग और पायथन की प्रारंभिक जानकारी दी जाएगी।
इसके बाद दूसरे से सातवें सप्ताह तक Google Classroom के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षण जारी रहेगा। साथ ही, प्रतिभागियों के लिए साप्ताहिक मार्गदर्शन और लाइव डाउट सॉल्विंग सेशन भी आयोजित किए जाएंगे। अंत में आईआईटी कानपुर में दो दिवसीय प्रदर्शन और प्रस्तुति कार्यक्रम होगा, जहां प्रतिभागी अपनी परियोजनाएं प्रस्तुत करेंगे और अपने अनुभव साझा करेंगे।
बिना तकनीकी अनुभव वाले शिक्षक भी ले सकेंगे प्रशिक्षण
खास बात यह है कि इस कार्यक्रम को ऐसे प्रतिभागियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिन्हें कंप्यूटर, कोडिंग या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पहले से बहुत कम या कोई अनुभव नहीं है। इसलिए प्रशिक्षण में कठिन तकनीकी अवधारणाओं के बजाय व्यावहारिक और रोजमर्रा के उदाहरणों पर जोर दिया जाएगा।
शिक्षक नोटिस और पाठ तैयार करने, मार्कशीट बनाने, प्रस्तुतियां तैयार करने, मूल्यांकन करने और डिजिटल शिक्षण सामग्री विकसित करने जैसे वास्तविक शैक्षणिक कार्यों के माध्यम से तकनीक का इस्तेमाल सीखेंगे। इसके अलावा ऑपरेटिंग सिस्टम, एमएस ऑफिस, Google Workspace, डिजिटल संचार, साइबर सुरक्षा और डिजिटल नागरिकता जैसे विषय भी प्रशिक्षण का हिस्सा होंगे।
वहीं, Scratch के माध्यम से ब्लॉक आधारित प्रोग्रामिंग और Python की मूलभूत जानकारी दी जाएगी। प्रतिभागियों को ChatGPT, Google Classroom और Khan Academy जैसे डिजिटल उपकरणों का व्यावहारिक इस्तेमाल भी कराया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों को पाठ योजना, सामग्री निर्माण, मूल्यांकन और अन्य पेशेवर कार्यों में तकनीक का उपयोग करने के लिए तैयार करना है।
रोबोटिक्स से बढ़ेगी समस्या समाधान की क्षमता
कार्यक्रम में रोबोटिक्स का व्यावहारिक घटक भी जोड़ा गया है। इसके तहत प्रतिभागियों को रोबोट संयोजन और सेंसर आधारित गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद रोबोटिक्स चुनौती आयोजित की जाएगी। इसके माध्यम से शिक्षकों में समस्या समाधान, प्रयोग करने और जिज्ञासा आधारित सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम की सभी आवश्यक प्रश्नोत्तरी, असाइनमेंट, परियोजनाएं और अंतिम समेकित परियोजना प्रस्तुति पूरी करने वाले प्रतिभागियों को SCERT उत्तर प्रदेश और आईआईटी कानपुर की ओर से संयुक्त प्रमाण-पत्र दिया जाएगा।
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसरों ने रखी अपनी बात
कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. रामकुमार जे. ने कहा कि कोडिंग, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और एआई जैसे विषय अब केवल इंजीनियरिंग संस्थानों तक सीमित नहीं हैं। माध्यमिक शिक्षा में भी इन अवधारणाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को कम उम्र से समस्याओं को छोटे हिस्सों में बांटने, विचारों को आजमाने और उनमें सुधार करने की आदत विकसित करने से भविष्य की चुनौतियों से निपटने की क्षमता मजबूत हो सकती है।
वहीं, डिजाइन विभाग के प्रमुख और कार्यक्रम के शैक्षणिक प्रमुख प्रो. सत्यकी राय ने कहा कि डिजिटल तकनीक शिक्षण को सहयोग और बेहतर बना सकती है, लेकिन शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। उनके अनुसार शिक्षक का विवेक, संवेदनशीलता और व्यक्तिगत उपस्थिति प्रभावी शिक्षण के केंद्र में है।
इसके अलावा, आउटरीच गतिविधियां कार्यालय के प्रभारी प्रोफेसर प्रो. विमल कुमार ने कहा कि आईआईटी कानपुर परिसर से बाहर भी ज्ञान के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने SCERT उत्तर प्रदेश के साथ इस सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए भविष्य में ऐसे और कार्यक्रमों की संभावना व्यक्त की।
पहले 750 प्राथमिक शिक्षकों को दिया जा चुका है प्रशिक्षण
आईआईटी कानपुर के अनुसार, इस पहल के तहत इससे पहले 750 प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया था। इससे 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों तक तकनीक आधारित शिक्षण पहुंचाने में मदद मिली। अब माध्यमिक शिक्षा तक कार्यक्रम के विस्तार से इसकी पहुंच और बढ़ने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप तैयार किए गए DLCCAI कार्यक्रम का पाठ्यक्रम SCERT की कक्षा 6 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों में भी शामिल किया जा चुका है। इससे उत्तर प्रदेश में अनुमानित 48 लाख विद्यार्थियों तक इन अवधारणाओं की पहुंच बनी है।
इस प्रकार, आईआईटी कानपुर और SCERT के बीच यह साझेदारी शिक्षकों को डिजिटल तकनीक, कम्प्यूटेशनल सोच और एआई से जुड़ी बुनियादी समझ देने के साथ उन्हें कक्षा शिक्षण में इनका व्यावहारिक उपयोग करने के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

