कानपुर सेंट्रल RPF ने अपहृत 13 वर्षीय बालिका को सकुशल बचाया, गुजरात पुलिस को किया सुपुर्द

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) पोस्ट कानपुर सेंट्रल ने सतर्कता, त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील कार्यशैली का परिचय देते हुए गुजरात से अपहृत एक 13 वर्षीय नाबालिग बालिका को सकुशल रेस्क्यू कर उसके परिजनों और गुजरात पुलिस को विधिवत सुपुर्द कर दिया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया कि रेलवे सुरक्षा बल यात्रियों, विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 07 जुलाई 2026 को रेलवे हेल्पलाइन के माध्यम से एक महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट कानपुर सेंट्रल ने बिना समय गंवाए कार्रवाई शुरू कर दी। इसके बाद उप निरीक्षक एस.के. कटियार के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें सहायक उप निरीक्षक हरिशंकर त्रिपाठी तथा महिला प्रधान आरक्षक वंदना कटियार शामिल थीं।

प्लेटफार्म संख्या 8 पर की गई गहन जांच

सूचना के आधार पर आरपीएफ टीम ने गाड़ी संख्या 19201 के कानपुर सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 8 पर पहुंचने का इंतजार किया। ट्रेन के आगमन के बाद सामान्य कोचों की बारीकी से जांच शुरू की गई। जांच के दौरान एक किशोरी संदिग्ध परिस्थितियों में अकेली मिली।

स्थिति को देखते हुए आरपीएफ टीम ने तत्काल बालिका को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद उसे रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट लाया गया, जहां महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से उसे “मेरी सहेली” टीम की निगरानी में रखा गया। वहीं, पूरी संवेदनशीलता के साथ उससे बातचीत और आवश्यक पूछताछ की गई।

पूछताछ में सामने आई पहचान

पूछताछ के दौरान बालिका ने अपना नाम बबली बताया। उसने बताया कि वह विजय सिंह निषाद की पुत्री है तथा उसकी आयु लगभग 13 वर्ष है। साथ ही उसने अपना निवास भावनगर, गुजरात बताया।

इसके बाद आरपीएफ टीम ने नियमानुसार उसकी जामा तलाशी ली। तलाशी के दौरान उसके पास मौजूद एक पिट्ठू बैग से 30 हजार रुपये नकद, पीली धातु के दो मंगलसूत्र, एक चैन, एक नाक की कील तथा सफेद धातु की एक जोड़ी पायल बरामद हुई। इन सभी सामानों की अनुमानित कीमत करीब चार लाख रुपये बताई गई।

बरामद सामान को रेलवे सुरक्षा बल ने पूरी सुरक्षा के साथ अपने कब्जे में रखा तथा इसकी जानकारी तत्काल संबंधित राज्य पुलिस को दी गई।

गुजरात पुलिस से किया गया तत्काल संपर्क

जैसे ही बालिका की पहचान और उसके निवास संबंधी जानकारी मिली, रेलवे सुरक्षा बल ने बिना देरी किए भावनगर (गुजरात) पुलिस से संपर्क स्थापित किया। दोनों राज्यों के सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित होने के बाद मामले की पुष्टि की प्रक्रिया शुरू हुई।

कुछ समय बाद भावनगर पुलिस के हेड कांस्टेबल करण सिंह मनुभाई, महिला पुलिस कांस्टेबल रश्मिता बहन जयसुखलाल तथा बालिका के पिता विजय सिंह निषाद रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट कानपुर सेंट्रल पहुंचे।

एफआईआर से हुई अपहरण की पुष्टि

भावनगर पुलिस द्वारा थाना भावनगर में दर्ज एफआईआर संख्या 111980062617228/2026, धारा 137(2) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), दिनांक 07 जुलाई 2026 की प्रति प्रस्तुत की गई। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद यह स्पष्ट हो गया कि बरामद बालिका उसी अपहरण प्रकरण में वांछित एवं अपहृत थी, जिसकी रिपोर्ट गुजरात में दर्ज कराई गई थी।

इसके बाद रेलवे सुरक्षा बल ने सभी कानूनी दस्तावेजों का मिलान किया तथा आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं।

विधिक प्रक्रिया के बाद किया सुपुर्द

सभी दस्तावेजों और पहचान संबंधी औपचारिकताओं के पूर्ण होने के बाद रेलवे सुरक्षा बल, कानपुर सेंट्रल ने बालिका को उसके पास से बरामद समस्त सामान सहित विधिवत भावनगर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। इस दौरान पूरी प्रक्रिया नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से संपन्न की गई, ताकि बालिका की सुरक्षा और उसके अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जा सके।

बालिका के सुरक्षित मिलने पर उसके परिजनों ने राहत व्यक्त की तथा रेलवे सुरक्षा बल की तत्परता और संवेदनशील कार्यप्रणाली की सराहना की।

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए आरपीएफ की विशेष पहल

रेलवे सुरक्षा बल लगातार यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई विशेष अभियान चला रहा है। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे स्टेशनों एवं ट्रेनों में नियमित निगरानी की जाती है। इसके अलावा “मेरी सहेली” जैसी पहल महिला यात्रियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इसी प्रकार, हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करना भी आरपीएफ की प्राथमिकताओं में शामिल है। यही कारण है कि समय रहते मिली सूचना और सतर्क निगरानी के कारण इस मामले में भी सकारात्मक परिणाम सामने आया।

अंतरराज्यीय समन्वय बना सफलता की बड़ी वजह

इस पूरे मामले में रेलवे सुरक्षा बल और गुजरात पुलिस के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। समय पर सूचना का आदान-प्रदान, दस्तावेजों का सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचाना इस कार्रवाई की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में विभिन्न राज्यों की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय से पीड़ितों को शीघ्र सहायता मिलती है और जांच प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनती है।

यात्रियों से भी की गई सहयोग की अपील

रेलवे सुरक्षा बल ने यात्रियों से अपील की है कि यदि यात्रा के दौरान कोई बच्चा, महिला या अन्य व्यक्ति संदिग्ध परिस्थिति में दिखाई दे अथवा किसी प्रकार की सुरक्षा संबंधी जानकारी मिले तो उसकी सूचना तुरंत रेलवे हेल्पलाइन या निकटतम आरपीएफ कर्मियों को दें। समय पर दी गई सूचना कई बार किसी बड़ी घटना को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कानपुर सेंट्रल रेलवे सुरक्षा बल की यह कार्रवाई सतर्कता, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। हेल्पलाइन पर प्राप्त सूचना के आधार पर समय रहते की गई जांच, बालिका की सुरक्षित बरामदगी, उसके सामान की सुरक्षा, गुजरात पुलिस से समन्वय तथा सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए बालिका को उसके परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाना आरपीएफ की पेशेवर कार्यशैली को दर्शाता है।

भविष्य में भी ऐसी सक्रियता यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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