बिजनौर में बढ़ती जा रहीं हैं किसानों और ग्रामीणों की मुश्किलें, पढ़िए अब बारिश से जिले का रेलवे अंडरपास हुआ जलमग्न

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रिपोर्ट – ताबिश मिर्जा 

बिजनौर: उत्तर प्रदेश में मानसून सक्रिय होने के साथ ही कई जिलों में जलभराव की समस्या सामने आने लगी है। बिजनौर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लगातार हो रही बारिश ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। विशेष रूप से गांव झलरा में बना रेलवे अंडरपास भारी बारिश के दौरान पूरी तरह पानी से भर जाता है, जिससे किसानों, ग्रामीणों और विद्यार्थियों के दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस अंडरपास का निर्माण सुरक्षित और सुगम आवागमन के उद्देश्य से किया गया था, वही अब बरसात के दिनों में सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

सड़क सुरक्षा के लिए बनाया गया था अंडरपास

मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने, रेल यातायात को अधिक सुरक्षित बनाने और सड़क पर लगने वाले जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास से कई स्थानों पर रेलवे अंडरपास बनाए गए। बिजनौर के झलरा गांव में भी इसी योजना के तहत लगभग तीन वर्ष पहले रेलवे अंडरपास का निर्माण कराया गया था।

निर्माण के समय उम्मीद जताई गई थी कि इससे ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। हालांकि, बरसात के मौसम में यह अंडरपास जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है।

बारिश होते ही अंडरपास में भर जाता है पानी

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जैसे ही तेज बारिश होती है, अंडरपास में करीब 10 फुट तक पानी भर जाता है। परिणामस्वरूप लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। कई बार पानी कई दिनों तक भरा रहता है, जिससे स्थिति और अधिक कठिन हो जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि अंडरपास में जलभराव होने के कारण वे रेलवे लाइन के दूसरी ओर स्थित अपने खेतों तक नहीं पहुंच पाते। इससे खेती-किसानी के कार्य प्रभावित होते हैं और समय पर कृषि संबंधी काम पूरे करने में कठिनाई आती है।

किसानों के सामने बढ़ी परेशानी

झलरा गांव सहित आसपास के करीब एक दर्जन गांवों के किसान इस अंडरपास का उपयोग खेतों तक पहुंचने के लिए करते हैं। बरसात के दौरान जब अंडरपास पानी से भर जाता है, तब किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर कई किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है।

इसके अलावा पशुपालकों को भी पशुओं के लिए हरा चारा लाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्रामीणों का कहना है कि खेत दूसरी ओर होने के कारण रोजमर्रा के कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।

एक दर्जन गांवों के लोगों पर पड़ रहा असर

ग्रामीणों के अनुसार, इस अंडरपास का उपयोग केवल झलरा गांव ही नहीं बल्कि आसपास के लगभग एक दर्जन गांवों के लोग भी करते हैं। इनमें किसान, मजदूर, छात्र और अन्य नागरिक शामिल हैं।

चूंकि रेलवे लाइन पार करने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है, इसलिए लोगों की निर्भरता पूरी तरह इसी अंडरपास पर है। ऐसे में जलभराव होने पर बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन प्रभावित हो जाता है।

जल निकासी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि अंडरपास निर्माण के दौरान जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप हर वर्ष मानसून में यही समस्या दोहराई जाती है।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि अंडरपास में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, उच्च क्षमता वाले पंप और नियमित सफाई की व्यवस्था की जाए, तो जलभराव की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की स्थायी समाधान की मांग

झलरा गांव के निवासी प्रशासन और संबंधित विभागों से इस समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि केवल बारिश के समय अस्थायी रूप से पानी निकालना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे भविष्य में अंडरपास में पानी जमा ही न हो।

ग्रामीणों ने यह भी सुझाव दिया है कि मानसून शुरू होने से पहले अंडरपास की नियमित सफाई, नालियों की जांच और जल निकासी प्रणाली का परीक्षण किया जाए।

ग्रामीण ने बताई अपनी परेशानी

स्थानीय ग्रामीण फहीम अहमद ने बताया कि बारिश के दौरान अंडरपास पूरी तरह पानी से भर जाता है। इसके कारण खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है और पशुओं के लिए चारा लाने में भी काफी दिक्कत होती है। उन्होंने संबंधित विभाग से जल्द समाधान की मांग की है ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।

प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई

विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे अंडरपास जैसी परियोजनाओं में निर्माण के साथ-साथ जल निकासी की दीर्घकालिक व्यवस्था भी आवश्यक होती है। यदि समय रहते उचित तकनीकी उपाय किए जाएं, तो मानसून के दौरान होने वाले जलभराव से काफी हद तक बचा जा सकता है।

इसके अलावा संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण, ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और आवश्यकतानुसार पंपिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने से भी लोगों को राहत मिल सकती है।

बिजनौर के झलरा गांव में रेलवे अंडरपास का निर्माण सड़क सुरक्षा और सुगम आवागमन के उद्देश्य से किया गया था। हालांकि, लगातार बारिश के दौरान होने वाला जलभराव अब किसानों और ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। खेतों तक पहुंचने, पशुओं के लिए चारा लाने और दैनिक आवागमन में आने वाली कठिनाइयों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभाग इस समस्या का स्थायी समाधान खोजें और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाएं, ताकि अंडरपास अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन का माध्यम बन सके।

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