लखीमपुर खीरीः शिवपुरी में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना को लेकर शिकायत, रामगुनी ने जनसुनवाई पोर्टल पर लगाई गुहार

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रिपोर्ट- शरद अवस्थी 

लखीमपुर खीरी/मितौली। सरकार की ओर से संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुंचाना है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, लखीमपुर खीरी जिले के मितौली क्षेत्र की ग्राम पंचायत शिवपुरी के मजरा कैम सराय से आवास को लेकर एक शिकायत सामने आई है। गांव निवासी रामगुनी पत्नी बृजेश कुमार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का लाभ दिलाए जाने की मांग करते हुए जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायतकर्ता की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत अब खंड विकास अधिकारी, मितौली के स्तर पर लंबित बताई जा रही है। ऐसे में मामले में विभागीय जांच और पात्रता के परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परिवार योजना के निर्धारित मानकों को पूरा करता है या नहीं।

सात सदस्यीय परिवार ने आवास की मांग उठाई

प्राप्त शिकायत विवरण के अनुसार रामगुनी पत्नी बृजेश कुमार का परिवार कुल सात सदस्यों का है। परिवार में बड़ी बेटी माधुरी की उम्र 18 वर्ष बताई गई है। इसके अलावा श्यामू 14 वर्ष, पंकज 12 वर्ष, सुमित 8 वर्ष और निर्मल 5 वर्ष के हैं।

परिवार की ओर से प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि परिवार को आवास की आवश्यकता है और इसी उम्मीद के साथ उन्होंने शासन के जनसुनवाई पोर्टल का सहारा लिया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं में शामिल है। इसलिए आवास से संबंधित किसी भी शिकायत में वास्तविक स्थिति का सत्यापन और पात्रता की जांच विशेष महत्व रखती है।

जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज हुई शिकायत

रामगुनी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत का नंबर 92615300087871 बताया गया है। उपलब्ध शिकायत विवरण के मुताबिक इसे 8 सितंबर 2026 को खंड विकास अधिकारी, मितौली, जनपद खीरी के स्तर पर अग्रसारित किया गया।

वहीं, पोर्टल पर उपलब्ध स्थिति के अनुसार 14 सितंबर 2026 तक शिकायत कार्यालय स्तर पर लंबित दर्शाई गई थी। शिकायत के निस्तारण की निर्धारित तिथि 8 अक्टूबर 2026 बताई गई है।

इस स्थिति में अब संबंधित विभाग की ओर से शिकायत की जांच किए जाने और निर्धारित समय सीमा के भीतर उसका निस्तारण किए जाने की उम्मीद है। शिकायत के निस्तारण के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि परिवार को योजना का लाभ मिलेगा या नहीं।

पात्रता की जांच के बाद तय होगी वास्तविक स्थिति

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत लाभ देने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता और अन्य मानकों का पालन किया जाता है। इसलिए केवल शिकायत दर्ज होने के आधार पर किसी परिवार को योजना का पात्र मानना उचित नहीं होगा। संबंधित विभाग को उपलब्ध रिकॉर्ड, परिवार की आर्थिक और आवासीय स्थिति तथा योजना के निर्धारित मानकों के आधार पर मामले का परीक्षण करना होगा।

यदि जांच के दौरान रामगुनी का परिवार योजना के सभी निर्धारित मानकों को पूरा करता पाया जाता है, तो नियमानुसार उसे योजना का लाभ दिलाने की दिशा में कार्रवाई की जानी चाहिए। दूसरी ओर, यदि परिवार पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करता है तो शिकायत के निस्तारण में इसका स्पष्ट कारण भी बताया जाना जरूरी होगा।

इस तरह पारदर्शी जांच से न केवल शिकायतकर्ता को स्थिति की जानकारी मिलेगी, बल्कि सरकारी योजना के क्रियान्वयन में भी विश्वास कायम रहेगा।

ग्रामीण परिवारों के लिए आवास योजना का महत्व

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, जिन्हें इसकी आवश्यकता है। आवास किसी भी परिवार की मूलभूत जरूरतों में शामिल है। विशेषकर बड़े परिवारों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त आवास का महत्व और बढ़ जाता है।

इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में आवास योजना से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लेना जरूरी है। यदि कोई पात्र परिवार किसी कारण से योजना के लाभ से वंचित रह जाता है, तो शिकायत निवारण व्यवस्था उसके लिए अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम बनती है।

रामगुनी की शिकायत भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अब संबंधित अधिकारियों की जांच से यह पता चलेगा कि शिकायतकर्ता का परिवार योजना के लिए पात्र है या नहीं और यदि पात्र है तो उसे लाभ दिलाने के लिए आगे क्या कार्रवाई की जानी है।

पारदर्शी प्रक्रिया से दूर हो सकता है भ्रम

सरकारी योजनाओं को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार पात्रता, सूची में नाम और लाभ मिलने की प्रक्रिया से संबंधित सवाल सामने आते हैं। ऐसे में विभागीय स्तर पर पारदर्शी जांच और स्पष्ट जानकारी बेहद जरूरी हो जाती है।

शिकायतकर्ता को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उसके आवेदन या शिकायत पर क्या जांच की गई, पात्रता के कौन-कौन से मानक देखे गए और अंतिम निर्णय किस आधार पर लिया गया। इससे किसी भी प्रकार के भ्रम की स्थिति को कम किया जा सकता है।

इसके अलावा, योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे, इसके लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा अभिलेखों और जमीनी स्थिति का मिलान करना भी महत्वपूर्ण है। इस प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखना सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।

8 अक्टूबर तक निस्तारण पर टिकी निगाहें

जनसुनवाई पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार शिकायत के निस्तारण की निर्धारित तिथि 8 अक्टूबर 2026 है। ऐसे में अब शिकायतकर्ता और ग्रामीणों की निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं।

आने वाले दिनों में संबंधित विभाग शिकायत की जांच कर परिवार की पात्रता का परीक्षण कर सकता है। इसके बाद नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। यदि परिवार पात्र पाया जाता है तो योजना का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। वहीं, पात्रता नहीं मिलने पर शिकायत के निस्तारण में उसका कारण दर्ज किया जाना अपेक्षित होगा।

फिलहाल इस मामले में अंतिम निर्णय विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा। इसलिए शिकायत में लगाए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।

शिकायत निवारण व्यवस्था से उम्मीद

जनसुनवाई पोर्टल आम नागरिकों को अपनी समस्याएं संबंधित विभाग और प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम उपलब्ध कराता है। ऐसे में किसी भी सरकारी योजना से जुड़ी शिकायत के बाद समयबद्ध और पारदर्शी निस्तारण महत्वपूर्ण है।

रामगुनी पत्नी बृजेश कुमार की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत भी अब इसी प्रक्रिया में है। सात सदस्यीय परिवार की आवास संबंधी मांग पर विभागीय जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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