कानपुर में पंचायत सहायकों का धरना: मानदेय बढ़ाने और स्थायीकरण की मांग तेज, कार्य बहिष्कार की चेतावनी
रिपोर्ट- आनन्द तिवारी
बिल्हौर। उत्तर प्रदेश में पंचायत सहायकों ने मानदेय बढ़ाने, सेवा को स्थायी करने और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। इसी क्रम में मंगलवार को बिल्हौर ब्लॉक परिसर में पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर पंचायत सहायकों ने धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान पंचायत सहायकों ने शासन से अपनी लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निर्णय लेने की अपील की।
प्रदेशव्यापी आंदोलन के समर्थन में आयोजित इस धरना-प्रदर्शन में दो दर्जन से अधिक पंचायत सहायक शामिल हुए। प्रदर्शन का नेतृत्व यूनियन के प्रदेश सचिव संदीप ने किया। इस दौरान तान्या कटियार, रीतू, विनीता, सुनैना, आदर्श पांडे, मानसी, ज्योति, करिश्मा सक्सेना समेत बड़ी संख्या में पंचायत सहायकों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई।
सात सितंबर से लखनऊ में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना
पंचायत सहायकों ने बताया कि उनकी यूनियन की ओर से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 7 सितंबर से लखनऊ के ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से पंचायत सहायक इस आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं। इसी कड़ी में बिल्हौर में भी ब्लॉक स्तर पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।
पंचायत सहायकों का कहना है कि ग्राम पंचायतों में डिजिटल और प्रशासनिक कार्यों को पूरा करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों और मानदेय को लेकर लंबे समय से अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। इसलिए अब यूनियन के माध्यम से शासन तक अपनी मांगें मजबूती से पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
30 हजार रुपये मानदेय की मांग
धरने के दौरान पंचायत सहायकों की सबसे प्रमुख मांग मानदेय में बढ़ोतरी रही। यूनियन ने पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाकर ग्राम पंचायत सचिव के समकक्ष 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है। पंचायत सहायकों का कहना है कि यदि सरकार तत्काल इस स्तर पर मानदेय निर्धारित नहीं करती है तो कम से कम उन्हें न्यूनतम कुशल मजदूरी के बराबर मानदेय दिया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि वर्तमान सेवा व्यवस्था में काम की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। पंचायत स्तर पर विभिन्न योजनाओं, ऑनलाइन कार्यों और विभागीय गतिविधियों में पंचायत सहायकों की भूमिका रहती है। ऐसे में उनके मानदेय में उचित वृद्धि आवश्यक है।
संविदा व्यवस्था समाप्त करने और स्थायी सेवा नियमावली की मांग
पंचायत सहायकों ने अपनी सेवा को लेकर भी महत्वपूर्ण मांग रखी है। यूनियन का कहना है कि वर्तमान संविदा व्यवस्था को समाप्त कर स्थायी सेवा नियमावली बनाई जानी चाहिए। इसके साथ ही पंचायत सहायकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी उठाई गई।
पंचायत सहायकों के मुताबिक स्थायी सेवा व्यवस्था बनने से कर्मचारियों को भविष्य को लेकर अधिक सुरक्षा मिलेगी। साथ ही सेवा संबंधी नियम स्पष्ट होने से कर्मचारियों और विभाग के बीच जिम्मेदारियों को लेकर भी पारदर्शिता बढ़ सकती है।
महिला पंचायत सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश की मांग
धरना-प्रदर्शन के दौरान महिला पंचायत सहायकों से जुड़ी मांगें भी प्रमुखता से उठाई गईं। यूनियन ने महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश दिए जाने की मांग की है। पंचायत सहायकों का कहना है कि महिला कर्मचारियों को कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाएं और अवकाश संबंधी अधिकार मिलना जरूरी है।
इसके अलावा पंचायत सहायकों ने जरूरत के अनुसार स्थानांतरण और समायोजन की नीति लागू करने की मांग भी की। उनका कहना है कि स्थानांतरण और समायोजन के लिए स्पष्ट नीति होने से कर्मचारियों को अपनी परिस्थितियों के अनुसार राहत मिल सकेगी और विभागीय व्यवस्था भी बेहतर तरीके से संचालित की जा सकेगी।
ग्राम विकास अधिकारी भर्ती में 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की मांग
पंचायत सहायकों ने अपने अनुभव को रोजगार के अगले अवसरों से जोड़ने की मांग भी रखी है। यूनियन की ओर से कहा गया कि भविष्य में होने वाली ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी की भर्ती में पंचायत सहायकों को उनके अनुभव के आधार पर 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाए।
पंचायत सहायकों का तर्क है कि वे पहले से ही ग्राम पंचायत स्तर पर काम कर रहे हैं और उन्हें स्थानीय प्रशासनिक एवं ऑनलाइन कार्यों का अनुभव प्राप्त है। ऐसे में आगामी भर्तियों में उनके अनुभव का लाभ मिलना चाहिए। यूनियन का मानना है कि इससे पंचायत सहायकों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और अनुभवी कर्मचारियों को विभागीय व्यवस्था में उपयोग किया जा सकेगा।
ब्लॉक परिसर में दो दर्जन से अधिक पंचायत सहायक जुटे
बिल्हौर में आयोजित धरने में दो दर्जन से अधिक पंचायत सहायकों ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई और शासन से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
प्रदेश सचिव संदीप के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में तान्या कटियार, रीतू, विनीता, सुनैना, आदर्श पांडे, मानसी, ज्योति और करिश्मा सक्सेना सहित अन्य पंचायत सहायक मौजूद रहे। प्रदर्शन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर भी प्रदेशव्यापी आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखाई गई।
पंचायत सहायकों ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार और शासन तक अपनी समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाना है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल होती है तो कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
मांगें नहीं मानी गईं तो कार्य बहिष्कार की चेतावनी
धरने के दौरान पंचायत सहायकों ने स्पष्ट किया कि यदि आंदोलन के दौरान शासन स्तर से उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो यूनियन के आह्वान पर कार्य बहिष्कार किया जा सकता है।
पंचायत सहायकों ने कहा कि वे लगातार अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने रख रहे हैं। हालांकि, यदि लंबे समय तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए यूनियन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रह सकता है।
शासन के फैसले पर टिकी नजर
पंचायत सहायकों के आंदोलन के बीच अब सभी की नजर शासन स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में मानदेय बढ़ोतरी, स्थायी सेवा नियमावली, राज्य कर्मचारी का दर्जा, महिला सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश, स्थानांतरण एवं समायोजन नीति और आगामी ग्राम विकास अधिकारी तथा ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में अनुभव के आधार पर 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण शामिल है।

