गणेशोत्सव 2026: 12 दिनों तक विराजेंगे गणपति, 14 सितंबर को स्थापना और 25 सितंबर को विसर्जन

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Digital UP News Desk

गणेशोत्सव 2026: देशभर में गणेश चतुर्थी के साथ भगवान गणेश की आराधना और उत्सव की शुरुआत हो गई है। इस बार गणेशोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। इस वर्ष भगवान गणेश 14 सितंबर 2026 को स्थापित किए जाएंगे और 25 सितंबर को विसर्जन किया जाएगा। इस तरह कई स्थानों पर गणपति उत्सव करीब 12 दिनों तक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।

गणेशोत्सव हिंदू धर्म के प्रमुख धार्मिक पर्वों में शामिल है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा रही है। मान्यता है कि गणेश जी की आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

14 सितंबर को होगी गणपति की स्थापना

गणेशोत्सव की शुरुआत गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना के साथ होगी। श्रद्धालु अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों में विधि-विधान के साथ गणपति बप्पा की स्थापना करेंगे। इसके बाद प्रतिदिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना, आरती और भोग लगाया जाएगा।

सुबह से ही बाजारों में गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ दिखाई दे सकती है। इसके अलावा फूल, माला, पूजा सामग्री, मोदक, लड्डू और अन्य प्रसाद की भी मांग बढ़ेगी। वहीं, सार्वजनिक गणेश पंडालों में आकर्षक सजावट और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां की जाती हैं।

गणपति स्थापना के दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश का आह्वान करते हुए उन्हें अपने घर और पंडाल में विराजमान कराएंगे। इसके बाद श्रद्धा और विश्वास के साथ उनकी पूजा की जाएगी।

12 दिनों तक चलेगा गणपति उत्सव

इस बार गणेशोत्सव का विशेष आकर्षण यह है कि कई स्थानों पर भगवान गणेश 12 दिनों तक विराजमान रहेंगे। इस दौरान भक्त नियमित रूप से पूजा और आरती करेंगे। साथ ही गणेश पंडालों में भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन भी किए जा सकते हैं।

गणेशोत्सव केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह लोगों को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी जोड़ता है। मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। इसके परिणामस्वरूप आपसी मेल-जोल और भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिलता है।

हालांकि, सार्वजनिक आयोजनों के दौरान आयोजकों और श्रद्धालुओं से प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करने की अपेक्षा रहती है। विशेष रूप से ध्वनि, यातायात, स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़े निर्देशों का ध्यान रखना जरूरी होता है।

गणपति बप्पा को प्रिय है मोदक

भगवान गणेश की पूजा में मोदक का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मोदक गणपति बप्पा के प्रिय भोगों में शामिल है। इसलिए गणेश चतुर्थी के अवसर पर घरों में मोदक और अन्य मिठाइयां तैयार की जाती हैं।

इसके अलावा दूर्वा, फूल और फल भी भगवान गणेश को अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान गणेश की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं।

गणेश पूजा के दौरान गणेश जी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है। भक्त सुबह और शाम आरती में शामिल होकर भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

घरों और पंडालों में उत्सव का माहौल

गणेशोत्सव के दौरान घरों में विशेष सजावट की जाती है। वहीं सार्वजनिक पंडालों को भी अलग-अलग थीम के आधार पर सजाया जाता है। रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और सजावटी सामग्री से पंडालों को आकर्षक रूप दिया जाता है।

इसके साथ ही कई स्थानों पर बच्चों और युवाओं के लिए धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महिलाएं भी गणेश पूजा और भजन-कीर्तन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।

इस प्रकार गणेशोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी का भी महत्वपूर्ण अवसर बन जाता है। लोग मिलकर आयोजन की जिम्मेदारियां संभालते हैं और उत्सव को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में योगदान देते हैं।

पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर

वर्तमान समय में गणेशोत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इसी वजह से अनेक श्रद्धालु और आयोजन समितियां मिट्टी से बनी पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाओं को प्राथमिकता देती हैं।

विसर्जन के दौरान जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रशासन और स्थानीय निकायों की ओर से कई स्थानों पर निर्धारित विसर्जन स्थल बनाए जाते हैं। श्रद्धालुओं से भी अपील की जाती है कि वे धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी को समझें।

इसके अलावा पंडालों और पूजा स्थलों पर साफ-सफाई बनाए रखना भी जरूरी है। प्लास्टिक और अन्य अनुपयोगी सामग्री का कम से कम इस्तेमाल करके गणेशोत्सव को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।

25 सितंबर को होगा गणेश विसर्जन

गणेशोत्सव के अंतिम चरण में 25 सितंबर 2026 को गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। इससे पहले श्रद्धालु भगवान गणेश की विशेष पूजा और आरती करेंगे। इसके बाद श्रद्धा के साथ गणपति बप्पा को विदाई दी जाएगी।

विसर्जन के दौरान भक्त भगवान गणेश से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हैं। गणपति विसर्जन के समय वातावरण में भक्ति और उत्साह का माहौल रहता है। हालांकि, श्रद्धालुओं को विसर्जन के दौरान प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों और व्यवस्थाओं का पालन करना चाहिए।

विशेष रूप से भीड़ वाले क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था और सुरक्षा का ध्यान रखना आवश्यक है। परिवार के साथ विसर्जन में शामिल होने वाले लोगों को बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए।

गणेशोत्सव देता है एकता और सकारात्मकता का संदेश

गणेशोत्सव का धार्मिक महत्व तो है ही, साथ ही यह समाज में एकता, सहयोग और सकारात्मक सोच का संदेश भी देता है। अलग-अलग वर्गों और समुदायों के लोग कई स्थानों पर मिलकर आयोजन करते हैं।

भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए गणेशोत्सव के अवसर पर श्रद्धालु अपने जीवन में ज्ञान, सद्बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं।

इस वर्ष भी 14 सितंबर से शुरू होने वाला गणेशोत्सव श्रद्धालुओं के लिए विशेष अवसर लेकर आया है। 12 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान भक्त गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करेंगे और 25 सितंबर को श्रद्धापूर्वक उन्हें विदाई देंगे।

कुल मिलाकर, गणेशोत्सव 2026 धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक परंपरा का सुंदर संगम बनने जा रहा है। गणपति बप्पा के स्वागत से लेकर विसर्जन तक श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति के साथ पर्व मनाएंगे। साथ ही, यदि उत्सव के दौरान स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का ध्यान रखा जाए, तो यह पर्व और भी बेहतर एवं यादगार बनाया जा सकता है।