गणेश चतुर्थी 2026: कल सोमवार को पधारेंगे गणपति बप्पा, जानिए विवाह बाधा दूर करने का खास मंत्र

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Digital UP News

गणपति बप्पा मोरया! ये तीन शब्द महज एक जयकारा नहीं, बल्कि भगवान गणेश के प्रति करोड़ों भक्तों की आस्था, प्रेम और विश्वास का प्रतीक हैं। गणेश चतुर्थी आते ही देशभर में भक्तिमय वातावरण बनने लगता है। घरों से लेकर मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों तक भगवान गणेश की स्थापना की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। वहीं, गणपति बप्पा के स्वागत के लिए भक्त उत्साह के साथ तैयार नजर आते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। इसलिए हर वर्ष इसी तिथि पर गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद कई स्थानों पर गणेशोत्सव कई दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ पर्व का समापन होता है।

कल सोमवार को होगा गणपति बप्पा का स्वागत

इस वर्ष गणेश जन्मोत्सव का पर्व सोमवार से शुरू हो रहा है। ऐसे में भक्तों के बीच विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर लोग अपने घरों और पूजा स्थलों पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इसके साथ ही सुबह और शाम आरती, पूजा तथा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।

भगवान गणेश को हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य देव माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान गणेश भक्तों के जीवन से बाधाओं को दूर करते हैं। इसी कारण उन्हें विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता भी कहा जाता है।

गणेशोत्सव के दौरान भक्त गणपति बप्पा से सुख, समृद्धि, शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। वहीं, कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष पूजा और मंत्र जाप भी करते हैं।

11 दिनों तक चलता है गणेशोत्सव

गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला गणेशोत्सव कई स्थानों पर 11 दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा को विशेष रूप से सजाया जाता है। प्रतिदिन पूजा-अर्चना और आरती के साथ भक्त भगवान गणेश का स्मरण करते हैं।

इसके अलावा, सार्वजनिक गणेश पंडालों में भी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भक्त बड़ी संख्या में इन कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे लगाते हैं। धीरे-धीरे पूरा वातावरण गणेश भक्ति से सराबोर हो जाता है।

अनंत चतुर्दशी के दिन श्रद्धा के साथ गणपति की विदाई की जाती है। भक्तों का विश्वास है कि गणपति बप्पा अपने साथ घर-परिवार के दुख और परेशानियां भी दूर ले जाते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर अगले वर्ष फिर आने का वादा करते हैं।

विवाह संबंधी बाधाओं के लिए किया जाता है इस मंत्र का जाप

धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभ कार्यों का देवता माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, विवाह संबंधी कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए गणेश जी के विशेष मंत्र का जाप किया जाता है। इसे ‘त्रैलोक्य मोहन गणेश मंत्र’ के नाम से जाना जाता है।

मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा के दौरान इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से विवाह संबंधी बाधाएं दूर करने की प्रार्थना की जाती है। साथ ही, अविवाहित युवक-युवतियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना के साथ गणेश जी की आराधना करते हैं।

हालांकि, धार्मिक मंत्रों का जाप आस्था और परंपरा का विषय है। इसलिए इसे किसी निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं, बल्कि श्रद्धा और सकारात्मक भाव से की जाने वाली धार्मिक साधना के रूप में देखना उचित है।

त्रैलोक्य मोहन गणेश मंत्र

‘ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।’

गणेश चतुर्थी के दिन भक्त इस मंत्र का जाप भगवान गणेश का ध्यान करते हुए कर सकते हैं। इसके साथ ही गणेश जी को दूर्वा, मोदक और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा भी है।

गणपति के आगमन से भक्तों में नई ऊर्जा

गणेश चतुर्थी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, उत्साह और सामूहिक भक्ति का उत्सव भी है। गणपति की स्थापना के साथ ही घरों और पंडालों में सकारात्मक वातावरण बनने लगता है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस पर्व में अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं।

वहीं, गणपति विसर्जन के समय भक्त भावुक होकर भगवान गणेश को विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर आने की कामना करते हैं। ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ भक्त भगवान गणेश से परिवार और समाज की सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।

इस प्रकार गणेश चतुर्थी भक्तों के लिए आस्था, विश्वास और उमंग का पर्व बन जाती है। भगवान गणेश के आगमन से जहां वातावरण भक्तिमय होता है, वहीं यह पर्व लोगों को मिल-जुलकर उत्सव मनाने और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने का संदेश भी देता है।

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