मथुराः नवरात्रि में मांस बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग, फलाहारी महाराज ने CM योगी को लिखा पत्र

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रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज

मथुरा: शारदीय नवरात्रि के नजदीक आते ही ब्रज क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी क्रम में ब्रज के प्रसिद्ध संत फलाहारी महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान पूरे प्रदेश में मांस और मछली की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। संत ने कहा है कि नवरात्रि शक्ति की आराधना और सात्विक जीवन का पर्व है, इसलिए इस दौरान मांस बिक्री पर रोक लगाने से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा।

फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मांग पर तत्काल विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान करोड़ों श्रद्धालु व्रत रखते हैं और सात्विक भोजन का पालन करते हैं। ऐसे में धार्मिक स्थलों, मंदिरों और प्रमुख बाजारों के आसपास मांस की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। उनके मुताबिक, विशेष रूप से मंदिरों के आसपास इस प्रकार की दुकानों पर प्रशासन को प्रभावी निगरानी रखनी चाहिए।

नवरात्रि को लेकर संत ने रखी विशेष मांग

फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उपवास रखते हैं और पूजा-पाठ में शामिल होते हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसलिए उनका कहना है कि धार्मिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए नवरात्रि के दौरान मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगाने पर सरकार को विचार करना चाहिए।

संत ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है, बल्कि धार्मिक पर्व के दौरान श्रद्धालुओं के लिए अनुकूल और सात्विक वातावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने प्रशासन से धार्मिक स्थलों के आसपास स्वच्छता और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की भी अपील की है।

ब्रज की धार्मिक महत्ता का किया उल्लेख

अपने पत्र में फलाहारी महाराज ने ब्रजभूमि की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि ब्रज केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी पवित्र भूमि है। मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव सहित पूरा ब्रज क्षेत्र देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

महाराज के मुताबिक, ब्रज में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां मंदिरों के दर्शन तथा आध्यात्मिक अनुभव के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में धार्मिक स्थलों के आसपास स्वच्छ, शांत और सात्विक वातावरण बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ब्रज की धार्मिक पहचान को देखते हुए यहां धार्मिक भावनाओं से जुड़े विषयों पर प्रशासन को विशेष संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने नवरात्रि के दौरान पूरे उत्तर प्रदेश में एक समान नीति लागू करने की मांग भी रखी है।

दूसरे राज्यों और शहरों का दिया उदाहरण

फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में दावा किया कि देश के कई हिस्सों में धार्मिक पर्वों के दौरान मांस की बिक्री को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रतिबंध या नियमन लागू किया जाता रहा है। उन्होंने नवरात्रि, सावन और जैन समुदाय के प्रमुख पर्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के लिए कई स्थानों पर कुछ समय के लिए संबंधित गतिविधियों पर प्रशासनिक नियंत्रण किया जाता है।

उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में भी नवरात्रि के नौ दिनों के लिए इसी तरह की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। महाराज के अनुसार, यह स्थायी प्रतिबंध नहीं होगा, बल्कि धार्मिक पर्व की अवधि तक सीमित प्रशासनिक व्यवस्था होगी। उनका तर्क है कि इससे अलग-अलग समुदायों के बीच एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं के प्रति सम्मान की भावना मजबूत हो सकती है।

हालांकि, इस मांग पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार और संबंधित स्थानीय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में होगा। इसलिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

खुले में मांस बिक्री को लेकर भी उठाई आवाज

फलाहारी महाराज ने पत्र में खुले में मांस बिक्री और दुकानों के प्रदर्शन को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्य बाजारों, सड़कों और धार्मिक स्थलों के आसपास सार्वजनिक स्थानों पर खाद्य सामग्री की बिक्री करते समय स्वच्छता और स्थानीय नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जहां मांस की बिक्री की अनुमति है, वहां भी दुकानदारों को निर्धारित नियमों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाए। विशेष रूप से सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा के मानकों का ध्यान रखा जाए।

महाराज का कहना है कि नवरात्रि के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में प्रशासन को धार्मिक स्थलों के आसपास साफ-सफाई और सार्वजनिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

संत समाज ने मांग का समर्थन किया

फलाहारी महाराज की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र भेजे जाने के बाद ब्रज क्षेत्र के संत समाज और कुछ हिंदू संगठनों की ओर से भी इस मांग के समर्थन की बात सामने आई है। समर्थकों का कहना है कि नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं और धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।

संत समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि धार्मिक पर्वों के दौरान प्रशासन को श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं करनी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि किसी सीमित अवधि के लिए प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाती है, तो इससे धार्मिक आयोजनों के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस मांग को लेकर अंतिम निर्णय सरकार की ओर से लिया जाना है। ऐसे में सभी की नजरें अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य प्रशासन के अगले कदम पर हैं।

धार्मिक पर्यटन और स्थानीय व्यवस्था का मुद्दा

ब्रज क्षेत्र में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा और वृंदावन सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। त्योहारों के दौरान यह संख्या और बढ़ जाती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन के सामने यातायात, स्वच्छता, सुरक्षा और बाजार व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की चुनौती भी रहती है।

स्थानीय लोगों के एक वर्ग का मानना है कि धार्मिक स्थलों के आसपास साफ-सफाई और सुव्यवस्थित बाजार व्यवस्था से ब्रज की सकारात्मक छवि मजबूत होगी। वहीं, व्यापार से जुड़े लोगों और अलग-अलग समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रशासनिक निर्णय को कानून और निर्धारित नियमों के अनुरूप लागू करना जरूरी होगा।

फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उम्मीद जताई है कि सरकार नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करेगी। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और यदि कोई दिशा-निर्देश जारी होता है तो उसकी रूपरेखा क्या होगी।

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