बाराबंकी में चंद्रशेखर आजाद का काफिला रोका, पुलिस से नोकझोंक, विनोद साहनी परिवार के लिए उठाई मांग
Digital UP News Desk
बाराबंकी: गोंडा के कारोबारी विनोद साहनी हत्याकांड के बाद उनके परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को बाराबंकी में पुलिस ने रोक लिया। बताया जा रहा है कि मसौली क्षेत्र के शहाबपुर टोल गेट पर चंद्रशेखर आजाद के काफिले को रोके जाने के बाद उनके समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच बहस हो गई। देखते ही देखते मौके पर तनाव की स्थिति बन गई और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की भी बात सामने आई।
काफिला रोके जाने की जानकारी मिलने के बाद चंद्रशेखर आजाद अपने वाहन से नीचे उतरे और मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों से तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद चंद्रशेखर आजाद अपने कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कथित व्यवहार को लेकर माफी मांगने की मांग की।
विनोद साहनी के परिवार से मिलने जा रहे थे चंद्रशेखर आजाद
दरअसल, गोंडा में कारोबारी विनोद साहनी की हत्या के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। इसी क्रम में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद भी साहनी के परिवार से मिलने गोंडा जा रहे थे। हालांकि, बाराबंकी में उनके काफिले को रोक दिया गया।
काफिला रोके जाने के बाद चंद्रशेखर आजाद ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से सवाल-जवाब किए। इसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ धरना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि किसी जनप्रतिनिधि और सांसद को इस तरह रोका जाना उचित नहीं है।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह विनोद साहनी से करीब दो महीने पहले मिले थे। उनके मुताबिक, साहनी आगामी विधानसभा चुनाव में सरनेलगंज क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। आजाद ने कहा कि इस मामले में पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा मिलना जरूरी है।
परिवार के लिए सुरक्षा, नौकरी और मुआवजे की मांग
चंद्रशेखर आजाद ने विनोद साहनी के परिवार के लिए कई मांगें उठाईं। उन्होंने परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने की भी मांग की।
आजाद का कहना है कि हत्या की घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर पुलिस या प्रशासन की भूमिका सामने आती है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और प्रशासन को इस मामले में जिम्मेदारी तय करनी होगी। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह किसी भी तरह की कथित गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं करेंगे और पीड़ित परिवार की आवाज उठाते रहेंगे।
पुलिस पर पत्थर फेंकने का चंद्रशेखर आजाद ने लगाया आरोप
धरने के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके और उनके समर्थकों की ओर कथित तौर पर पत्थर फेंके जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल नहीं हो सकी है।
आजाद ने कहा कि एक सांसद के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन उनके समर्थकों के साथ जातिगत आधार पर दुर्व्यवहार कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ लोगों को आगे करके जातिगत विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर अपमानित करने और लाठी उठाने का भी आरोप लगाया। आजाद ने इन आरोपों की जांच की मांग करते हुए कहा कि किसी भी नागरिक या जनप्रतिनिधि के साथ कानून के दायरे से बाहर जाकर व्यवहार नहीं होना चाहिए।
हालांकि, पुलिस की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। ऐसे में आरोपों की पुष्टि जांच और आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
‘सरकार और प्रशासन को जिम्मेदारी लेनी होगी’
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि अगर विनोद साहनी की हत्या के पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति या किसी अन्य स्तर की भूमिका सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए वह उनके साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी परिवार को राजनीतिक या सामाजिक दबाव के कारण न्याय से वंचित न होना पड़े। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन से भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार करने की अपील की।
चंद्रशेखर आजाद के धरने के चलते टोल गेट पर कुछ समय के लिए राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। उनके समर्थक उनके साथ मौजूद रहे और पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत का दौर चलता रहा।
एक दिन पहले अजय राय के प्रतिनिधिमंडल को भी रोका गया था
गौरतलब है कि चंद्रशेखर आजाद से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में गोंडा जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को भी बाराबंकी के मसौली टोल प्लाजा पर रोके जाने की खबर सामने आई थी।
अजय राय ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने विनोद साहनी की हत्या को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही की जानी चाहिए।
अजय राय ने कहा था कि जो व्यक्ति समाज की आवाज मजबूती से उठाता है, उसकी हत्या कर दी जाती है। उन्होंने भी मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
इस तरह लगातार दूसरे दिन बाराबंकी में गोंडा जाने वाले राजनीतिक प्रतिनिधिमंडलों को रोके जाने से मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
गोंडा हत्याकांड को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
विनोद साहनी हत्याकांड के बाद अब यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से मामले को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी तेज हो रही है।
ऐसे में पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की है। दूसरी ओर, राजनीतिक दल इस घटना को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
फिलहाल, चंद्रशेखर आजाद के काफिले को बाराबंकी में रोके जाने के बाद हुए घटनाक्रम ने विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। चंद्रशेखर आजाद ने स्पष्ट किया है कि वह पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा, सरकारी नौकरी और एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग पर कायम हैं।
अब इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा विनोद साहनी हत्याकांड की जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर सभी की नजर है। जांच के निष्कर्ष से ही यह स्पष्ट होगा कि हत्या के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

