गणेश चतुर्थी 2026: देशभर में गणपति बप्पा के जयकारों से गूंजा माहौल, 11 दिवसीय उत्सव की हुई शुरुआत

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Digital UP News Desk

देशभर में भगवान गणेश के जन्मोत्सव का पर्व गणेश चतुर्थी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और देश के अन्य राज्यों में गणपति बप्पा की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही गणेशोत्सव का रंग दिखाई देने लगा है। मंदिरों, घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जा रही है। वहीं, श्रद्धालु गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के साथ सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।

गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि-विवेक के देवता के रूप में पूजा जाता है। इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा रही है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर भक्त विधि-विधान से पूजा करते हैं और भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, दूर्वा और लाल फूल अर्पित करते हैं।

घर-घर में स्थापित हो रहे गणपति

गणेश चतुर्थी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इसके अलावा विभिन्न मोहल्लों और बाजारों में भी सार्वजनिक गणेश पंडाल सजाए जाते हैं। पंडालों को आकर्षक ढंग से सजाने के लिए फूलों, रोशनी और रंग-बिरंगे सजावटी सामान का इस्तेमाल किया जाता है।

सुबह से ही श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा को घर या पूजा स्थल पर स्थापित करने की तैयारी करते हैं। इसके बाद पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन होता है। कई स्थानों पर शाम के समय सामूहिक आरती और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर भगवान गणेश का आशीर्वाद लेते हैं।

11 दिनों तक चलेगा गणेशोत्सव

गणेश चतुर्थी के साथ शुरू होने वाला गणेशोत्सव कई स्थानों पर करीब 10 से 11 दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान प्रतिदिन भगवान गणेश की पूजा, आरती और भजन-कीर्तन किए जाते हैं। हालांकि, अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में गणेश प्रतिमा के विसर्जन का समय अपनी परंपरा और धार्मिक मान्यता के अनुसार अलग हो सकता है।

गणेशोत्सव के अंतिम चरण में श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक विदाई देते हैं। इस अवसर पर गणपति विसर्जन किया जाता है। श्रद्धालु गणपति बप्पा से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हुए उन्हें विदा करते हैं।

महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की खास रौनक

गणेशोत्सव की सबसे विशेष छटा महाराष्ट्र में देखने को मिलती है। मुंबई, पुणे और राज्य के अन्य शहरों में गणेश चतुर्थी को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की जाती हैं। यहां घरों के साथ-साथ सार्वजनिक गणेश मंडलों में भी भव्य आयोजन होते हैं।

मुंबई में गणेश पंडालों को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई स्थानों पर भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन और आरती भी आयोजित की जाती है। गणेशोत्सव महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

गणेश पूजा में इन चीजों का है विशेष महत्व

गणेश पूजा के दौरान भगवान को दूर्वा घास, मोदक, लड्डू, लाल फूल और सिंदूर अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दूर्वा भगवान गणेश को विशेष रूप से प्रिय मानी जाती है। इसी तरह मोदक को भगवान गणेश का प्रिय भोग माना जाता है।

पूजा के दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश के मंत्रों का जाप भी करते हैं। इनमें ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इस मंत्र का जाप करके भगवान गणेश से बुद्धि, विवेक, सुख और समृद्धि की कामना करते हैं।

विवाह बाधा और शुभ कार्यों में गणेश जी की पूजा

धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है। यही कारण है कि विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार की शुरुआत और अन्य शुभ कार्यों में गणेश पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान गणेश की आराधना से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

विवाह संबंधी धार्मिक अनुष्ठानों में भी भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। हालांकि, किसी भी धार्मिक उपाय या मंत्र को अपनाते समय अपनी परंपरा और आस्था के अनुसार योग्य विद्वान या आचार्य से सलाह लेना उचित माना जाता है।

पूजा के साथ स्वच्छता और पर्यावरण का संदेश

गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से प्रतिमा विसर्जन के समय प्राकृतिक संसाधनों और जल स्रोतों की स्वच्छता का ध्यान रखने की अपील की जाती है। कई स्थानों पर पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनी गणेश प्रतिमाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इसके अलावा सार्वजनिक आयोजनों में साफ-सफाई, यातायात व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी स्थानीय स्तर पर तैयारियां की जाती हैं। श्रद्धालुओं से अपील की जाती है कि वे पूजा स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखें और धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से मनाएं।

श्रद्धालुओं में दिख रहा उत्साह

गणेश चतुर्थी के मौके पर बाजारों में भी विशेष रौनक देखने को मिल रही है। गणेश प्रतिमाओं, पूजा सामग्री, फूल-मालाओं, सजावटी सामान और मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। वहीं, बच्चे और युवा भी गणेशोत्सव को लेकर खासे उत्साहित नजर आते हैं।

सोशल मीडिया पर भी गणेश चतुर्थी की शुभकामनाओं और भगवान गणेश की तस्वीरों की भरमार है। लोग अपने परिवार, दोस्तों और परिचितों को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं दे रहे हैं। इसके साथ ही विभिन्न संस्थाओं और संगठनों की ओर से भी धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

गणेश चतुर्थी का आध्यात्मिक संदेश

गणेश चतुर्थी केवल उत्सव और पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक सोच, विवेक और अनुशासन का संदेश भी देती है। भगवान गणेश का स्वरूप बुद्धि, धैर्य और विवेक से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस पर्व के दौरान श्रद्धालु अपने जीवन में अच्छे विचारों और सकारात्मक ऊर्जा को अपनाने का संकल्प लेते हैं।

इसके अलावा गणेशोत्सव लोगों को एक साथ जोड़ने का भी माध्यम बनता है। सार्वजनिक पंडालों और सामूहिक आरती के जरिए समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग एक साथ आते हैं। इस प्रकार धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश भी मजबूत होता है।

गणपति बप्पा से सुख-समृद्धि की कामना

गणेश चतुर्थी 2026 के अवसर पर देशभर में श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। घरों और पंडालों में गूंजते गणपति बप्पा मोरया के जयकारे उत्सव के माहौल को और भक्तिमय बना रहे हैं।

आने वाले दिनों में गणेशोत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों के साथ यह उत्सव और अधिक रंगीन नजर आएगा। अंततः गणपति विसर्जन के साथ श्रद्धालु भगवान गणेश को भावपूर्ण विदाई देंगे और अगले वर्ष फिर उनके आगमन की प्रतीक्षा करेंगे।

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