कानपुर डफरिन अस्पताल में स्तनपान जागरूकता कार्यक्रम, माताओं को बांटे गए फीडिंग एप्रन 

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रिपोर्ट- हनुमन्त सिंह पिन्टू

कानपुर। विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर कानपुर के डफरिन अस्पताल में माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कॉस्मोपॉलिटन राउंड टेबल 111 (KCRT 111) एवं कानपुर कॉस्मोपॉलिटन लेडीज सर्कल 191 (KCLC 191) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ माताओं को सार्वजनिक स्थानों पर स्तनपान कराने के दौरान सुविधा और आत्मविश्वास प्रदान करना रहा।

कार्यक्रम का आयोजन चेयरपर्सन सीए प्रिंसी भाटिया के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान अस्पताल में भर्ती माताओं को फीडिंग एप्रन वितरित किए गए। आयोजकों के अनुसार, यह पहल माताओं को स्तनपान के दौरान आवश्यक गोपनीयता और सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक सामाजिक प्रयास है।

माताओं को उपलब्ध कराई गई सुविधा

कार्यक्रम के दौरान माताओं को फीडिंग एप्रन वितरित करते हुए उन्हें स्तनपान के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। आयोजकों का कहना है कि बच्चे के शुरुआती विकास में मां के दूध की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में माताओं को स्तनपान के लिए सहज और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है।

चेयरपर्सन सीए प्रिंसी भाटिया ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन माताओं को सुविधा, गोपनीयता और आत्मविश्वास प्रदान करना है, जो सार्वजनिक स्थानों पर अपने शिशु को स्तनपान कराती हैं। उन्होंने कहा कि कई बार सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण माताओं को असहजता महसूस हो सकती है। ऐसे में फीडिंग एप्रन उनके लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मां को अपने बच्चे की जरूरत के अनुसार स्तनपान कराने में किसी तरह का संकोच महसूस नहीं होना चाहिए। समाज में भी इस विषय को लेकर सकारात्मक और संवेदनशील सोच विकसित करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए KCRT 111 और KCLC 191 की ओर से यह सामाजिक पहल की गई।

डफरिन अस्पताल में जागरूकता पर जोर

डफरिन अस्पताल की सीएमएस डॉ. रूचि जैन ने भी कार्यक्रम के दौरान स्तनपान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मां का दूध शिशु के स्वास्थ्य और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए स्तनपान को लेकर समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि नवजात शिशु के लिए शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान मां और बच्चे के बीच बेहतर जुड़ाव के साथ-साथ शिशु के पोषण का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में स्तनपान को लेकर परिवार और समाज दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

डॉ. रूचि जैन ने कहा कि माताओं को स्तनपान से संबंधित सही जानकारी उपलब्ध कराना और उनकी आवश्यकताओं को समझना स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों को भी माताओं का सहयोग करना चाहिए, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपने शिशु की देखभाल कर सकें।

विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य

विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान दुनियाभर में मां के दूध और स्तनपान के महत्व को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इसका उद्देश्य माताओं, परिवारों और समाज को स्तनपान के लाभों के बारे में जानकारी देना तथा स्तनपान के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर देना है।

इसी क्रम में कानपुर में आयोजित यह कार्यक्रम भी जागरूकता और सामाजिक सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। कार्यक्रम में यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि स्तनपान एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और इसे लेकर समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण होना चाहिए।

इसके अलावा, सार्वजनिक स्थानों पर माताओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। यदि अस्पतालों, सार्वजनिक स्थलों और अन्य स्थानों पर माताओं के लिए उचित फीडिंग स्पेस उपलब्ध हों, तो उन्हें अपने बच्चों को स्तनपान कराने में अधिक सुविधा मिल सकती है।

फीडिंग एप्रन वितरण से क्या मिलेगा लाभ?

फीडिंग एप्रन का वितरण कार्यक्रम की प्रमुख पहल रही। इसके माध्यम से माताओं को स्तनपान के दौरान अतिरिक्त सुविधा और गोपनीयता देने का प्रयास किया गया। विशेष रूप से अस्पताल में भर्ती माताओं के लिए यह पहल उपयोगी हो सकती है।

आयोजकों का मानना है कि ऐसी छोटी लेकिन उपयोगी पहलें माताओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करती हैं। साथ ही, इससे समाज में यह संदेश भी जाता है कि मातृत्व से जुड़ी आवश्यकताओं को समझना और उनका सम्मान करना सामूहिक जिम्मेदारी है।

हालांकि, केवल उपकरण या सुविधा उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही माताओं को स्तनपान से जुड़ी सही स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसलिए अस्पतालों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

परिवार और समाज की भूमिका अहम

स्तनपान को लेकर जागरूकता बढ़ाने में परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। नई मां को पर्याप्त आराम, पोषण और मानसिक सहयोग की आवश्यकता होती है। ऐसे में परिवार के सदस्यों को उसकी जरूरतों को समझते हुए सहयोग करना चाहिए।

इसके साथ ही समाज को भी माताओं के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर यदि कोई मां अपने बच्चे को स्तनपान करा रही है, तो उसे असहज महसूस कराने के बजाय सम्मान और सहयोग का वातावरण दिया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के माध्यम से इसी सकारात्मक सोच को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि माताओं को अपने बच्चों की जरूरत के अनुसार स्तनपान कराने में किसी प्रकार की झिझक नहीं होनी चाहिए।

सामाजिक संगठनों की पहल से बढ़ेगी जागरूकता

KCRT 111 और KCLC 191 की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम ने सामाजिक संगठनों की स्वास्थ्य जागरूकता में भूमिका को भी सामने रखा। माताओं को फीडिंग एप्रन उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्तनपान को लेकर सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया गया।

ऐसी सामाजिक पहलें अस्पतालों और समुदाय के बीच जागरूकता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जैसे विषयों पर निरंतर संवाद की जरूरत है। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थानों, सामाजिक संगठनों और परिवारों को मिलकर काम करना होगा।

कानपुर के डफरिन अस्पताल में आयोजित इस कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि मां और शिशु के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्तनपान के लिए सहयोगी और सम्मानजनक वातावरण तैयार किया जाए।

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