कानपुर में 5600 करोड़ की साइबर ठगी के दो आरोपी हैदराबाद से गिरफ्तार, 86 शिकायतों से जुड़े तार
रिपोर्ट- हनुमन्त सिंह पिन्टू
कानपुर। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच कानपुर पुलिस की साइबर टीम को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने कथित तौर पर करीब 5600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े मामले में दो आरोपियों को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को 48 घंटे के ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर लाया गया है। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर कथित साइबर नेटवर्क, बैंक खातों और रकम के लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बेकनगंज निवासी शाहवेज वारिस और चमनगंज निवासी सलमान के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में शाहवेज वारिस की भूमिका अहम बताई जा रही है। उसके खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल यानी एनसीआरपी पर पहले से 86 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में पुलिस इन शिकायतों को मौजूदा जांच से जोड़कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां तलाशने में जुटी है।
5600 करोड़ की रकम से जुड़ा मामला
पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े मामले की जांच के दौरान की गई। सामने आई जानकारी के अनुसार, मामले में करीब 5600 करोड़ रुपये की रकम से जुड़े कथित लेनदेन की जांच की जा रही है। इतनी बड़ी राशि सामने आने के बाद साइबर टीम ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
हालांकि, जांच के इस चरण में पुलिस का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इतनी बड़ी रकम किन-किन खातों से होकर गुजरी और इस पूरी प्रक्रिया में आरोपियों की वास्तविक भूमिका क्या रही। इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित ठगी से जुड़े लेनदेन में कितने बैंक खाते इस्तेमाल हुए और इन खातों को संचालित करने वाले लोग कौन हैं।
शाहवेज वारिस के खिलाफ 86 शिकायतें
जांच में सामने आए महत्वपूर्ण तथ्यों में शाहवेज वारिस के खिलाफ एनसीआरपी पर दर्ज 86 शिकायतें भी शामिल हैं। साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों के इस रिकॉर्ड को पुलिस गंभीरता से देख रही है। अब इन शिकायतों का सत्यापन किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनमें से कितने मामलों में आरोपी की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही है।
इसके अलावा, पुलिस अलग-अलग राज्यों और शहरों से सामने आई शिकायतों का भी मिलान कर सकती है। इससे कथित नेटवर्क के विस्तार और उसके काम करने के तरीके को समझने में मदद मिल सकती है। यदि शिकायतों और बैंक लेनदेन के बीच कोई समानता सामने आती है, तो जांच एजेंसियों को नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
पुराने साइबर ठगी के मामलों से भी जुड़े तार
पुलिस की प्रारंभिक जांच में दोनों आरोपियों के तार कानपुर में पहले सामने आए साइबर ठगी के कुछ पुराने मामलों से जुड़े होने की बात कही गई है। इनमें ऑनलाइन निवेश, डिजिटल लेनदेन और अलग-अलग तरीकों से लोगों को झांसे में लेकर रकम हासिल करने से संबंधित शिकायतें शामिल बताई गई हैं।
इसी वजह से साइबर टीम अब पुराने मुकदमों और एनसीआरपी पर दर्ज शिकायतों का मिलान कर रही है। इसके माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या एक ही नेटवर्क अलग-अलग मामलों में सक्रिय था या फिर आरोपियों की भूमिका अलग-अलग घटनाओं में रही है।
दरअसल, साइबर अपराध के मामलों में आरोपी अक्सर अलग-अलग बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए किसी एक मामले की जांच से सामने आने वाली जानकारी दूसरे मामलों की कड़ियों को जोड़ने में भी मदद कर सकती है।
हैदराबाद से गिरफ्तारी के बाद कानपुर लाए गए आरोपी
कानपुर पुलिस की साइबर टीम ने जांच के दौरान आरोपियों की लोकेशन हैदराबाद में होने की जानकारी हासिल की। इसके बाद टीम ने वहां कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें 48 घंटे के ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर लाया गया।
अब कानपुर में दोनों आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पुलिस की कोशिश है कि कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। साथ ही उन बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर रकम के लेनदेन में किया गया।
बैंक खातों और रकम के प्रवाह की जांच
पुलिस जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कथित ठगी की रकम के प्रवाह का पता लगाना है। इसके लिए बैंक खातों से जुड़े लेनदेन, संदिग्ध ट्रांजैक्शन और आरोपियों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
पुलिस यह समझने का प्रयास कर रही है कि रकम कहां से आई, किन खातों में पहुंची और उसके बाद उसे किन माध्यमों से आगे ट्रांसफर किया गया। इसके अलावा, कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए बैंक खातों के वास्तविक धारकों और खातों के संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
यदि जांच में कई खातों के बीच आपसी लेनदेन की कड़ियां सामने आती हैं, तो इससे कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में संपर्क के संकेत
प्रारंभिक जांच में आरोपियों के देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद लोगों से संपर्क होने के संकेत भी मिले हैं। पुलिस अब इन संपर्कों की प्रकृति और उनके बीच हुए वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
साइबर अपराध के मामलों में अलग-अलग स्थानों पर मौजूद लोगों के बीच डिजिटल माध्यम से संपर्क और वित्तीय लेनदेन की जांच महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में पुलिस कॉल डिटेल, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा सकती है।
हालांकि, इन सभी पहलुओं की पुष्टि विस्तृत जांच और पूछताछ के बाद ही स्पष्ट रूप से हो सकेगी।
अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस का ध्यान कथित गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने पर है। पूछताछ में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपियों के साथ कौन-कौन लोग काम करते थे और कथित साइबर ठगी में उनकी क्या भूमिका थी।
इसके अलावा, पुलिस फर्जी या संदिग्ध बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और रकम के संभावित वितरण की भी जांच कर रही है। यदि इस दौरान अन्य संदिग्धों के नाम सामने आते हैं, तो पुलिस उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
साइबर अपराध पर पुलिस की सख्ती
कानपुर पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासतौर पर ऐसे मामलों में जहां बड़ी रकम से जुड़े लेनदेन की जानकारी सामने आती है, पुलिस के सामने नेटवर्क की पूरी संरचना का पता लगाने की चुनौती रहती है।

