लखीमपुरःपलिया कलां में युवा संवाद: विद्यार्थियों ने सीखा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका का महत्व
रिपोर्ट- शरद अवस्थी
लखीमपुर खीरी। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, पलिया कलां में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में युवा विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ रहा। इस दौरान विद्यार्थियों को राष्ट्र के विकास में युवाओं की जिम्मेदारी, चरित्र निर्माण, अनुशासन, परिश्रम और स्वावलंबन के महत्व के बारे में बताया गया। वक्ताओं ने युवाओं से अपने जीवन में राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसके बाद आचार्य सुनीत ने कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों तथा विद्यालय की प्रबंध समिति के पदाधिकारियों का परिचय कराया। कार्यक्रम में विद्यालय के आचार्य-आचार्या के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।
युवाओं को बताया राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जिला प्रचारक आकाश ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। देश की वर्तमान और भविष्य की दिशा तय करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए विद्यार्थियों को अभी से अपने व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना केवल एक विचार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे युवाओं के दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम, जिम्मेदारी और स्वावलंबन जैसे गुणों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य वक्ता ने कहा कि किसी भी मजबूत राष्ट्र की नींव उसके नागरिकों के संस्कार और जिम्मेदारी की भावना पर टिकी होती है। ऐसे में युवाओं का शिक्षित होने के साथ-साथ संस्कारवान और जिम्मेदार होना भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत करने का संदेश दिया।
चरित्र निर्माण पर दिया जोर
युवा विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम के दौरान चरित्र निर्माण को विशेष महत्व दिया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार और बेहतर नागरिक बनना भी है।
वक्ताओं के अनुसार, विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के भविष्य की नींव तैयार करता है। इसलिए इस दौरान विकसित की गई आदतें आगे चलकर व्यक्तित्व को प्रभावित करती हैं। इसी कारण विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने, नियमित दिनचर्या अपनाने और अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की सलाह दी गई।
इसके अलावा विद्यार्थियों से समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि युवा यदि अपने व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के हित के बारे में भी सोचें, तो इससे देश की प्रगति को नई दिशा मिल सकती है।
अनुशासन और परिश्रम को बताया सफलता की कुंजी
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अनुशासन और परिश्रम के महत्व के बारे में भी विस्तार से बताया गया। कहा गया कि जीवन में सफलता हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी है। किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए धैर्य और मेहनत की आवश्यकता होती है।
इसी क्रम में युवाओं से अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखने और समय का सही उपयोग करने की अपील की गई। विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि वे अपने अध्ययन के साथ खेल, शारीरिक गतिविधियों और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाएं।
साथ ही, स्वावलंबन को भी युवा जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। विद्यार्थियों को अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदारी लेने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर निरंजन लाल अग्रवाल, पलिया खण्ड प्रचारक विभोर, नगर कार्यवाह अभिषेक शुक्ला, विद्यालय प्रबंधक शिवपाल सिंह, नगर शारीरिक प्रमुख रजनेश कुमार, नगर सम्पर्क प्रमुख रविन्द्र और बिजुवा खण्ड बौद्धिक प्रमुख प्रणव सिंह सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा विद्यालय के आचार्य-आचार्या तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की अहम भूमिका
युवा विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करना रहा। वक्ताओं ने कहा कि युवा वर्ग में ऊर्जा, क्षमता और नए विचारों की कोई कमी नहीं होती। यदि इस ऊर्जा और क्षमता का सकारात्मक दिशा में उपयोग किया जाए, तो समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
वर्तमान समय में शिक्षा, तकनीक, नवाचार, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक अवसर मौजूद हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को अपने कौशल को विकसित करने के साथ ही सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ना चाहिए।
इसके साथ ही युवाओं से देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण होती है।
‘राष्ट्र प्रथम’ के संदेश के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के आचार्य ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों, आचार्य-आचार्याओं और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद दिया।
इसके बाद कार्यक्रम का समापन ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ हुआ। इस दौरान विद्यार्थियों में उत्साह देखने को मिला। युवा विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण, अनुशासन और जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विचार करने का अवसर दिया।

