एटा में 150 परिवारों ने आवास के लिए राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा, 2002 में टूटे थे मकान
रिपोर्ट- नन्द कुमार
एटा। उत्तर प्रदेश के एटा जिले में लंबे समय से आवास की समस्या से जूझ रहे करीब 150 परिवारों ने स्थायी घर की मांग को लेकर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के सकीट रोड स्थित हिन्दूनगर मोहल्ले में रहने वाले इन परिवारों का कहना है कि वे पिछले करीब 24 वर्षों से झुग्गी-झोपड़ी और पन्नियों के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर हैं। शुक्रवार को बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हुए और राष्ट्रपति के नाम एसडीएम एआर फारूखी को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप और स्थायी आवास की व्यवस्था कराने की मांग की।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हिन्दूनगर क्षेत्र में कभी करीब 150 परिवारों के मकान बने हुए थे। ज्ञापन में दावा किया गया है कि इन मकानों को वर्ष 2002 में भारतीय सेना की कार्रवाई के दौरान तोड़ दिया गया था। इसके बाद से प्रभावित परिवारों के पास रहने के लिए स्थायी आवास नहीं है। लोगों का कहना है कि इतने लंबे समय के बाद भी उनकी आवास संबंधी समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
24 साल से झुग्गी-झोपड़ी में रहने का दावा
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वर्ष 2002 में मकान टूटने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। उस समय से लेकर अब तक कई परिवार अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे हैं। उनका आरोप है कि करीब 24 वर्षों के दौरान उन्होंने कई स्तरों पर अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी, लेकिन अभी तक उन्हें स्थायी आवास उपलब्ध नहीं कराया गया।
परिवारों के अनुसार, झुग्गी-झोपड़ी में रहने के कारण उन्हें रोजमर्रा की कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मौसम बदलने के साथ उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। गर्मी के मौसम में तेज धूप, बारिश के दिनों में पानी और सर्दियों में ठंड के बीच परिवारों को बच्चों और बुजुर्गों के साथ रहना पड़ता है।
इसी वजह से प्रभावित परिवार अब चाहते हैं कि प्रशासन उनके मामले की गंभीरता से जांच करे और उन्हें जल्द से जल्द रहने के लिए सुरक्षित एवं स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे हिन्दूनगर क्षेत्र के लोग एकत्र होकर प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम अतिरिक्त एआर फारूखी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से परिवारों ने अपनी लंबे समय से चली आ रही आवास समस्या को सामने रखा।
ज्ञापन में मांग की गई है कि वर्ष 2002 में मकान टूटने से प्रभावित परिवारों के मामले की जांच कराई जाए। साथ ही, यदि नियमों के तहत संभव हो तो संबंधित जमीन पर दोबारा मकान बनाने की अनुमति दी जाए। अन्यथा प्रशासन की ओर से किसी वैकल्पिक स्थान पर स्थायी आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।
परिवारों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही आवास समस्या का शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान हासिल करना है।
छोटे बच्चों की शिक्षा को लेकर भी चिंता
ज्ञापन देने पहुंचे लोगों ने आवास के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और भविष्य को लेकर भी चिंता जाहिर की। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से अस्थायी परिस्थितियों में रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। परिवारों का मानना है कि यदि उन्हें स्थायी घर और बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलें तो बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
सदानंद गिहार ने कहा कि वर्ष 2002 में सेना द्वारा मकान तोड़े जाने के बाद से परिवारों को कोई स्थायी समाधान नहीं मिला है। उनके मुताबिक, करीब 24 साल से लोग झोपड़ियों और पन्नियों के सहारे रह रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों के लिए मकान बनवाए जाएं, ताकि बच्चों को बेहतर वातावरण मिल सके और वे शिक्षा की ओर आगे बढ़ सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से अस्थायी परिस्थितियों में रहने के कारण परिवारों को कई तरह की सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन को मानवीय आधार पर मामले को प्राथमिकता देते हुए उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रशासन से जांच और स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों ने ज्ञापन में यह भी मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि वर्ष 2002 में मकान तोड़े गए थे तो प्रभावित परिवारों की वर्तमान स्थिति और उनके आवास के अधिकार से जुड़े पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए।
परिवारों की मांग है कि प्रशासन उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करे। इसके बाद प्रभावित परिवारों को नियमों के अनुरूप आवास उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाया जाए।
लोगों का कहना है कि इतने लंबे समय तक किसी अस्थायी व्यवस्था में रहना परिवारों के लिए कठिन है। इसलिए अब वे चाहते हैं कि इस समस्या को केवल ज्ञापन और आश्वासन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसका व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान सदानंद गिहार, पवन लांगुरिया, अर्जुन, अजय, योगेश, रात्रि, शुलम, कलिया, रमन, राहुल, सुनील, सोनू, अनिल, मन्नू, रवि, शिशार, अमित और कृष्णा समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।
प्रदर्शन या विरोध के बजाय लोगों ने प्रशासन के माध्यम से अपनी मांग उच्च स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया। परिवारों को उम्मीद है कि राष्ट्रपति के नाम भेजे गए ज्ञापन के माध्यम से उनकी समस्या संबंधित अधिकारियों तक पहुंचेगी और लंबे समय से लंबित आवास के मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।
अब स्थायी घर मिलने की उम्मीद
हिन्दूनगर के इन परिवारों के लिए आवास की समस्या केवल चार दीवारों तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि स्थायी घर मिलने से बच्चों की पढ़ाई, परिवारों की सुरक्षा और रोजमर्रा के जीवन में स्थिरता आएगी। यही वजह है कि परिवार अब प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक इंतजार किया है और अब चाहते हैं कि संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच कर उचित निर्णय ले। यदि उसी स्थान पर आवास उपलब्ध कराना संभव नहीं है तो वैकल्पिक जमीन या सरकारी आवास योजना के माध्यम से प्रभावित परिवारों को राहत दी जाए

