आईआईटी कानपुर और DRDO ने रक्षा प्रणालियों के लिए HMI डिजाइन पर आयोजित किया तीन दिवसीय प्रशिक्षण
रिपोर्ट- शिवा शर्मा
कानपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने रक्षा प्रणालियों में ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन (HMI) डिजाइन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। आईआईटी कानपुर के डिजाइन विभाग के ह्यूमन फैक्टर्स एंड सोशियोटेक्निकल सिस्टम्स (HFSS) स्टूडियो की ओर से DRDO के सहयोग से तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में रक्षा क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया तथा जटिल रक्षा उपकरणों के लिए मानव-केंद्रित इंटरफेस तैयार करने के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रक्षा प्रणालियों में उपयोग होने वाले इंटरफेस को इस तरह डिजाइन करने की प्रक्रिया को समझाना था, जिससे उन्हें अंतिम उपयोगकर्ता के लिए अधिक सहज, प्रभावी और उपयोगी बनाया जा सके। विशेष रूप से भारतीय सैनिकों और रक्षा कर्मियों की फील्ड जरूरतों को ध्यान में रखते हुए HMI डिजाइन की उपयोगिता पर जोर दिया गया।
रक्षा क्षेत्र में मानव-केंद्रित डिजाइन पर जोर
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में आईआईटी कानपुर के अनुसंधान एवं विकास डीन प्रो. जयन्धरन जी. राव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने इस पहल को देश के रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार, तकनीकी रूप से उन्नत रक्षा प्रणालियों के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि उनका इंटरफेस उपयोगकर्ता की जरूरतों के अनुरूप हो।
दरअसल, आधुनिक रक्षा प्रणालियां तकनीकी रूप से लगातार जटिल होती जा रही हैं। ऐसे में किसी उपकरण की कार्यक्षमता केवल उसकी तकनीकी क्षमता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि उपयोगकर्ता उसे कितनी आसानी और प्रभावी तरीके से संचालित कर सकता है। इसलिए HMI डिजाइन रक्षा तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार प्रणालियों से जुड़ी DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. विवेक कांत ने किया।
HMI डिजाइन और उपयोगिता के मूल्यांकन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन के साथ-साथ इंटरफेस डिजाइन और रक्षा प्रणालियों की उपयोगिता के मूल्यांकन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि जटिल तकनीकी प्रणालियों को अंतिम उपयोगकर्ता के लिए अधिक सहज कैसे बनाया जा सकता है।
HMI यानी ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन ऐसा क्षेत्र है, जिसमें मनुष्य और तकनीकी प्रणाली के बीच होने वाले संवाद को बेहतर बनाने के लिए इंटरफेस तैयार किए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर किसी रक्षा उपकरण को संचालित करने के लिए उपलब्ध स्क्रीन, नियंत्रण, संकेत, बटन और अन्य डिजिटल माध्यम इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि उपयोगकर्ता उन्हें आसानी से समझ और इस्तेमाल कर सके।
इसी क्रम में प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी रक्षा प्रणाली का इंटरफेस तैयार करते समय केवल तकनीकी जरूरतों को देखना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ उपयोगकर्ता की क्षमता, कार्य का वातावरण, समय की आवश्यकता और मिशन से जुड़े उद्देश्यों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
सैनिकों और रक्षा कर्मियों की जरूरतों के अनुरूप डिजाइन
कार्यक्रम में जटिल रक्षा उपकरणों और प्रणालियों के लिए ऐसे इंटरफेस विकसित करने पर जोर दिया गया, जिन्हें भारतीय सैनिक और रक्षा कर्मी फील्ड ऑपरेशन के दौरान आसानी से इस्तेमाल कर सकें। मानव-केंद्रित डिजाइन का उद्देश्य तकनीकी प्रणाली को उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाना है।
इसका सीधा लाभ यह हो सकता है कि जटिल उपकरणों को संचालित करने की प्रक्रिया सरल हो। साथ ही, उपयोगकर्ताओं को किसी प्रणाली को समझने और उसका प्रभावी उपयोग करने में कम समय लग सकता है। इसके अलावा, बेहतर इंटरफेस परिचालन क्षमता को मजबूत करने में भी सहायक हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र में जहां कई प्रणालियों का इस्तेमाल चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किया जाता है, वहां इंटरफेस की स्पष्टता और उपयोगिता विशेष महत्व रखती है। इसलिए डिजाइन प्रक्रिया में अंतिम उपयोगकर्ता को शामिल करना और उसकी वास्तविक जरूरतों को समझना जरूरी है।
कक्षा सत्रों में डिजाइन प्रक्रिया और फ्रेमवर्क की जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आयोजित कक्षा सत्रों में प्रतिभागियों को ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन की डिजाइन प्रक्रिया, इसके मूल सिद्धांतों और विभिन्न डिजाइन फ्रेमवर्क के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि किसी तकनीकी प्रणाली के लिए इंटरफेस डिजाइन करते समय किन पहलुओं का ध्यान रखना चाहिए।
इसके अलावा, प्रतिभागियों को उपयोगिता मूल्यांकन से जुड़े तरीकों की भी जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य यह समझना था कि तैयार किए गए इंटरफेस को उपयोगकर्ता के नजरिए से किस प्रकार परखा जाए और आवश्यकता के अनुसार उसमें सुधार कैसे किया जाए।
HFSS स्टूडियो में हुआ प्रैक्टिकल प्रशिक्षण
कक्षा में सैद्धांतिक जानकारी देने के साथ-साथ आईआईटी कानपुर के HFSS स्टूडियो में व्यावहारिक सत्र भी आयोजित किए गए। इन सत्रों में प्रतिभागियों ने विभिन्न डिजाइन तरीकों और संबंधित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हुए जटिल रक्षा प्रणालियों के लिए उपयोग में आसान इंटरफेस तैयार करने का अभ्यास किया।
व्यावहारिक प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को केवल अवधारणाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक डिजाइन प्रक्रिया का अनुभव देना था। इस दौरान उन्होंने उपयोगकर्ता की जरूरतों को समझने, डिजाइन तैयार करने और उसकी उपयोगिता का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से जाना।
पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आईआईटी कानपुर परिसर में तीन दिनों तक किया गया।
समापन समारोह में DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक शामिल
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में DRDO के वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक भी शामिल हुए। DG, ECS कार्यालय के आउटस्टैंडिंग साइंटिस्ट एवं निदेशक (प्रशासन) श्री प्रभाकर राव गोमकर विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहे। वहीं, DRDO की LRDE के साइंटिस्ट जी श्री एस. डी. सुरेश मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
समापन अवसर पर प्रतिभागियों और अतिथियों ने रक्षा प्रणालियों के विकास में अंतिम उपयोगकर्ता की जरूरतों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। इसके साथ ही मानव-केंद्रित डिजाइन पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया।
भविष्य में भी आयोजित होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम
आईआईटी कानपुर और DRDO की इस पहल को रक्षा तकनीक के क्षेत्र में मानव-केंद्रित डिजाइन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भविष्य में आईआईटी कानपुर में DRDO और भारतीय सेना के साथ मिलकर ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन से जुड़े इसी तरह के अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।
इससे रक्षा क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को HMI डिजाइन के नवीन तरीकों को समझने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास में उपयोगकर्ता-केंद्रित डिजाइन को अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करने में भी मदद मिल सकती है।
स्वदेशी रक्षा तकनीक में HFSS स्टूडियो की भूमिका
आईआईटी कानपुर के डिजाइन विभाग में स्थित ह्यूमन फैक्टर्स एंड सोशियोटेक्निकल सिस्टम्स (HFSS) स्टूडियो ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन, ह्यूमन फैक्टर्स और सिस्टम डिजाइन से जुड़े क्षेत्रों में काम करता है। स्टूडियो का उद्देश्य जटिल सामाजिक-तकनीकी प्रणालियों के लिए मानव-केंद्रित डिजाइन को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा, HFSS स्टूडियो भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण से जुड़े अनुप्रयोगों के लिए भी कार्य करता है। ऐसे में आईआईटी कानपुर और DRDO के बीच इस प्रकार का सहयोग देश में विकसित की जा रही रक्षा प्रणालियों में उपयोगकर्ता-केंद्रित तकनीकी समाधान को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है।

