मथुरा-वृंदावन में जलापूर्ति और जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा, 10 दिन में तकनीकी रिपोर्ट के निर्देश

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रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज

मथुरा-वृंदावन: शहर में जलापूर्ति व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए नगर निगम ने कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में नगर आयुक्त श्री ओजस्वी राज ने जलकल विभाग के अधिकारियों के साथ नगर की गंगाजल आपूर्ति, जल निकासी और जलभराव से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों को तकनीकी आधार पर स्थायी समाधान तैयार करने और निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में महाप्रबंधक जलकल श्री मोहम्मद अनवर ख्वाजा, मुख्य अभियंता निर्माण श्री संजय सिंह, सहायक जलकल अभियंता श्री हेमंत गौतम सहित जलकल विभाग के सभी अवर अभियंता मौजूद रहे। इस दौरान शहर के विभिन्न क्षेत्रों में वर्तमान जलापूर्ति व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य में बढ़ने वाली जलापूर्ति की जरूरतों को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली गई।

वार्ड 47 और 54 में गंगाजल आपूर्ति की समीक्षा

बैठक के दौरान विशेष रूप से वार्ड संख्या 47 द्वारकापुरी और वार्ड संख्या 54 प्रताप नगर में गंगाजल आपूर्ति की स्थिति पर चर्चा हुई। नगर आयुक्त ने अधिकारियों से इन दोनों वार्डों में वर्तमान में उपलब्ध जलापूर्ति व्यवस्था, पानी की उपलब्धता और उपभोक्ताओं तक पानी पहुंचने की स्थिति की जानकारी प्राप्त की।

इसके साथ ही भविष्य में प्रस्तावित पाइपलाइन के माध्यम से अतिरिक्त जलापूर्ति की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। नगर आयुक्त ने कहा कि किसी भी नई पाइपलाइन या जलापूर्ति व्यवस्था को लागू करने से पहले उसका तकनीकी आकलन जरूरी है। इसलिए वर्तमान और प्रस्तावित दोनों व्यवस्थाओं की क्षमता का विस्तृत मूल्यांकन करने के निर्देश दिए गए।

पांच सदस्यीय समिति करेगी तकनीकी आकलन

गंगाजल आपूर्ति की वर्तमान स्थिति और प्रस्तावित नई पाइपलाइन से होने वाली अतिरिक्त जलापूर्ति की संभावनाओं का आकलन करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति में जलकल विभाग और जल निगम नगरीय विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है।

समिति में जलकल विभाग के महाप्रबंधक श्री मोहम्मद अनवर ख्वाजा, सहायक अभियंता श्री हेमेंद्र गौतम और अवर अभियंता श्रीमती प्रतिभा ओझा को शामिल किया गया है। इसके अलावा जल निगम नगरीय विभाग से अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता भी समिति का हिस्सा होंगे।

नगर आयुक्त ने समिति को निर्देश दिया है कि वह मौके की वास्तविक स्थिति और उपलब्ध तकनीकी आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करे। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाना है कि वर्तमान में CWR यानी Clear Water Reservoir से कितने लोगों को जलापूर्ति उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, प्रस्तावित नई पाइपलाइन के माध्यम से कितने अतिरिक्त लोगों तक पानी पहुंचाया जा सकता है, इसका भी विस्तृत आकलन किया जाएगा।

इसके लिए पाइपलाइन की क्षमता, मौजूदा जलापूर्ति नेटवर्क, संभावित अतिरिक्त उपभोक्ता और जल वितरण की तकनीकी आवश्यकताओं का अध्ययन किया जाएगा। नगर आयुक्त ने समिति को 10 दिन के भीतर तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा निर्णय

नगर निगम का उद्देश्य केवल तत्काल समस्या का समाधान करना नहीं, बल्कि आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना है। इसी वजह से प्रस्तावित पाइपलाइन से कितनी अतिरिक्त आबादी को लाभ मिल सकता है, इसका वैज्ञानिक और तकनीकी आकलन कराया जा रहा है।

दरअसल, शहर में आबादी बढ़ने के साथ जलापूर्ति की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में वर्तमान व्यवस्था की क्षमता और भविष्य की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। तकनीकी समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद उपलब्ध संसाधनों और संभावित जरूरतों के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जा सकेगी।

भूतेश्वर अंडरपास में जलभराव पर भी चर्चा

बैठक में केवल पेयजल आपूर्ति ही नहीं, बल्कि बारिश के दौरान जल निकासी की समस्या पर भी गंभीरता से चर्चा की गई। विशेष रूप से भूतेश्वर अंडरपास में बारिश के बाद होने वाले जलभराव और पानी की निकासी में लगने वाले समय की समीक्षा की गई।

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में बारिश के बाद अंडरपास में जमा पानी को बाहर निकालने में लगभग दो घंटे का समय लग रहा है। नगर आयुक्त ने इस अवधि को कम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि जल निकासी की क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक तकनीकी उपायों की पहचान की जाए।

नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि बारिश के दौरान जलभराव से आमजन को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए पहले से प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। इसके अलावा जल निकासी की मौजूदा व्यवस्था की क्षमता, पंपिंग सिस्टम और नाले की स्थिति का भी परीक्षण करने की जरूरत पर जोर दिया गया।

श्रीजी बाबा आश्रम के पास नाले की बाउंड्री का निर्देश

भूतेश्वर अंडरपास के समीप श्रीजी बाबा आश्रम के पास स्थित नाले को लेकर भी बैठक में निर्देश जारी किए गए। नगर आयुक्त ने मुख्य अभियंता निर्माण को नाले की बाउंड्री का निर्माण कराने के निर्देश दिए।

इससे नाले के आसपास की व्यवस्था को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, जल निकासी से संबंधित ढांचे को बेहतर बनाने और क्षेत्र में साफ-सफाई एवं सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने में भी सुविधा हो सकती है।

स्थायी समाधान पर नगर निगम का जोर

नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जलापूर्ति और जल निकासी से जुड़े कार्य केवल अस्थायी उपायों तक सीमित न रहें। बल्कि तकनीकी आकलन के आधार पर ऐसे समाधान तैयार किए जाएं, जो लंबे समय तक प्रभावी रहें।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी कार्य को आगे बढ़ाने से पहले उसकी तकनीकी उपयोगिता, क्षमता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। इससे एक ओर जहां लोगों को पर्याप्त और बेहतर जलापूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को भी प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।

मथुरा-वृंदावन जैसे धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले शहर में जलापूर्ति तथा जल निकासी दोनों व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हैं। यहां स्थानीय निवासियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक भी पहुंचते हैं। इसलिए शहर की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना नगर निगम की प्राथमिकताओं में शामिल है।

10 दिन की समयसीमा में रिपोर्ट से आगे की राह होगी तय

फिलहाल सभी की नजर पांच सदस्यीय समिति की तकनीकी रिपोर्ट पर रहेगी। 10 दिन के भीतर प्रस्तुत होने वाली रिपोर्ट में वर्तमान गंगाजल आपूर्ति की स्थिति और प्रस्तावित पाइपलाइन से मिलने वाले संभावित अतिरिक्त लाभ का विस्तृत विवरण सामने आएगा।

इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर जलापूर्ति नेटवर्क को मजबूत करने और अतिरिक्त आबादी तक पानी पहुंचाने के संबंध में आगे की कार्रवाई तय की जा सकेगी। इसी तरह भूतेश्वर अंडरपास में पानी की निकासी का समय कम करने के लिए तैयार की जाने वाली कार्ययोजना भी जलभराव की समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है

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