श्रावस्ती में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद भव्य शोभायात्रा, जयकारों से भक्तिमय हुआ पटना-जमुनहा क्षेत्र

1

रिपोर्ट- सूर्यप्रकाश शुक्ला 

श्रावस्ती: श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद श्रावस्ती जिले के पटना-जमुनहा क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह से भरी भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान डीजे, ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे की धुन पर श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए। पूरे क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों की गूंज सुनाई दी, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।

शोभायात्रा के दौरान स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और श्रद्धालुओं का स्वागत किया। विशेष रूप से मल्हीपुर मुख्य चौराहे पर लोगों ने फूल बरसाकर शोभायात्रा में शामिल भक्तों का अभिनंदन किया। इसके बाद श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के साथ राप्ती नदी स्थित माधवापुर पुल की ओर रवाना हुए। यहां वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमा का विसर्जन किया गया।

पटना बीरगंज और शिकारी चौराहा से शुरू हुई शोभायात्रा

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के उपरांत आयोजित इस धार्मिक शोभायात्रा की शुरुआत पटना बीरगंज और शिकारी चौराहा क्षेत्र से हुई। शोभायात्रा में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के साथ आगे बढ़े। जैसे-जैसे शोभायात्रा आगे बढ़ती गई, लोगों की संख्या भी बढ़ती गई।

श्रद्धालुओं के बीच भगवान श्रीकृष्ण के प्रति आस्था और उत्साह देखने को मिला। लोग जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। वहीं, डीजे और ढोल-नगाड़ों की धुन ने पूरे माहौल को और उत्साहपूर्ण बना दिया। धार्मिक गीतों और भजनों के बीच श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए।

इसके अलावा, कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। लोगों ने श्रद्धालुओं के लिए स्वागत की व्यवस्था की और पुष्पवर्षा कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इससे शोभायात्रा में शामिल लोगों का उत्साह और बढ़ गया।

श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजा पूरा इलाका

शोभायात्रा के दौरान पटना-जमुनहा क्षेत्र में जगह-जगह भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए गए। श्रद्धालुओं ने धार्मिक उत्साह के साथ शोभायात्रा में भाग लिया। वातावरण में लगातार ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारे गूंजते रहे।

धार्मिक आयोजन होने के कारण क्षेत्र के लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। युवा, बुजुर्ग और अन्य श्रद्धालु भी शोभायात्रा का हिस्सा बने। वहीं, मार्ग में मौजूद लोगों ने भी शोभायात्रा को देखा और श्रद्धालुओं का स्वागत किया।

दरअसल, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद प्रतिमा विसर्जन से पहले निकाली जाने वाली शोभायात्रा धार्मिक परंपरा और सामुदायिक सहभागिता का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसी क्रम में श्रावस्ती में भी श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक शोभायात्रा निकाली।

मल्हीपुर मुख्य चौराहे पर हुआ स्वागत

शोभायात्रा जब मल्हीपुर मुख्य चौराहे पर पहुंची तो स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं का फूल बरसाकर स्वागत किया। इस दौरान वातावरण में धार्मिक उत्साह देखने को मिला। लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के दर्शन किए और अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

मल्हीपुर मुख्य चौराहे से गुजरते समय शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। डीजे और ढोल-नगाड़ों की धुन के साथ श्रद्धालु आगे बढ़ते रहे। वहीं, रास्ते में मौजूद लोगों ने भी धार्मिक आयोजन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

इसके बाद शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ राप्ती नदी के माधवापुर पुल की ओर रवाना हुई। यात्रा के दौरान श्रद्धालु लगातार भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते रहे।

माधवापुर पुल पर विधि-विधान से हुआ विसर्जन

शोभायात्रा के राप्ती नदी के माधवापुर पुल पहुंचने के बाद धार्मिक विधि-विधान से प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की गई। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार किया गया और पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धा प्रकट की।

पूजा-अर्चना के बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस दौरान आयोजन से जुड़े लोगों और श्रद्धालुओं ने निर्धारित धार्मिक प्रक्रिया का पालन किया। विसर्जन के साथ ही श्रीकृष्ण जन्मोत्सव से जुड़े इस आयोजन का समापन हुआ।

शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामूहिक सहभागिता का भी रहा। पूरे आयोजन के दौरान लोगों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना रहा।

मल्हीपुर पुलिस ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था

शोभायात्रा को देखते हुए मल्हीपुर पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सक्रिय रही। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने आयोजन के दौरान व्यवस्था संभाली। शोभायात्रा के मार्ग पर पुलिस की मौजूदगी रही, ताकि धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

पुलिस की मौजूदगी के बीच शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए माधवापुर पुल तक पहुंची। इसके बाद पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमा विसर्जन किया गया।

You may have missed