BRICS Summit 2026: दिल्ली में पुतिन की सुरक्षा के लिए अभेद्य इंतजाम, ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ से खास कार तक तैयारी

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: भारत मंडपम में आयोजित होने वाले BRICS Summit 2026 को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद मजबूत किया गया है। दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेताओं के दिल्ली पहुंचने के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुतिन की भारत यात्रा के दौरान रूसी सुरक्षा एजेंसियां और भारतीय सुरक्षा बल आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।

राष्ट्रपति पुतिन की सुरक्षा को लेकर सबसे अधिक चर्चा उनके विशेष विमान और बख्तरबंद कार की हो रही है। रूसी राष्ट्रपति जिस विमान से सफर करते हैं, उसे आमतौर पर ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ के नाम से जाना जाता है। इसी तरह जमीन पर उनके आवागमन के लिए इस्तेमाल होने वाली Aurus Senat लिमोजीन भी अपनी सुरक्षा खूबियों के कारण दुनिया भर में चर्चा में रहती है।

दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा

BRICS Summit के दौरान दिल्ली में सुरक्षा को कई स्तरों में व्यवस्थित किया गया है। सम्मेलन स्थल के साथ-साथ उन होटलों और प्रमुख मार्गों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है, जहां विदेशी प्रतिनिधिमंडल ठहरेंगे या आवाजाही करेंगे। इसके लिए दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और अन्य संबंधित सुरक्षा बलों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है।

इसके अलावा, आधुनिक तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था में AI आधारित कैमरों, एंटी-ड्रोन तकनीक और निगरानी प्रणालियों को शामिल किया गया है। इन तकनीकों का उद्देश्य किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान करना और सुरक्षा एजेंसियों को समय रहते अलर्ट उपलब्ध कराना है।

इस तरह सम्मेलन के दौरान पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ तकनीकी निगरानी को भी जोड़ा गया है। इससे बड़े क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और संभावित सुरक्षा चुनौतियों पर नजर रखना आसान हो जाता है।

FSO और भारतीय एजेंसियों के बीच तालमेल

रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी रूस की Federal Protective Service (FSO) और भारत की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय से संभाली जा रही है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा के दौरान मेजबान देश की एजेंसियां और संबंधित देश की सुरक्षा टीम आपसी तालमेल से कार्यक्रम स्थल, आवागमन और ठहरने की व्यवस्था की समीक्षा करती हैं।

पुतिन की सुरक्षा टीम राष्ट्रपति के कार्यक्रम से जुड़े स्थानों का पहले से निरीक्षण करती है। वहीं भारतीय एजेंसियां भी सम्मेलन और संबंधित स्थानों पर सुरक्षा प्रबंधों को मजबूत करती हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य किसी भी संभावित जोखिम को पहले ही पहचानकर उससे निपटने की तैयारी करना है।

खास विमान ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ की चर्चा

पुतिन के विशेष विमान Ilyushin IL-96-300PU को उनकी हवाई यात्रा के लिए तैयार किए गए विशेष विमानों में गिना जाता है। इसे रूस के राष्ट्रपति के लिए विशेष रूप से संशोधित किया गया है। विमान में संचार और कमांड से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद होने की जानकारी सामने आती रही है।

रूसी राष्ट्रपति की विदेश यात्राओं के दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था केवल विमान तक सीमित नहीं रहती। यात्रा के पूरे कार्यक्रम में संचार व्यवस्था, वैकल्पिक योजनाओं और सुरक्षा टीमों के बीच समन्वय पर विशेष जोर दिया जाता है। हालांकि, सुरक्षा से जुड़े कई तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाते।

जमीन पर ‘Aurus Senat’ का इस्तेमाल

दिल्ली में पुतिन के जमीनी आवागमन के लिए उनकी खास Aurus Senat लिमोजीन चर्चा में है। यह कार रूसी राष्ट्रपति के लिए तैयार की गई विशेष बख्तरबंद गाड़ियों में शामिल है। इसकी डिजाइन और सुरक्षा सुविधाओं को राष्ट्रपति की यात्राओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

राष्ट्रपति के काफिले के दौरान सुरक्षा को कई स्तरों में व्यवस्थित किया जाता है। मार्ग की निगरानी, यातायात प्रबंधन और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा पर संबंधित एजेंसियां विशेष ध्यान देती हैं। इस दौरान आपात स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी तैयार रखी जाती हैं।

होटल भी बनाए गए सुरक्षित क्षेत्र

BRICS Summit में शामिल होने वाले विदेशी प्रतिनिधियों के लिए दिल्ली, एयरोसिटी और गुरुग्राम के प्रमुख होटलों में भी व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन स्थानों की निगरानी एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है, क्योंकि यहां आम लोगों, होटल कर्मचारियों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही को अलग-अलग स्तर पर नियंत्रित करना होता है।

हर प्रमुख होटल को एक स्वतंत्र सुरक्षित क्षेत्र की तरह व्यवस्थित किया गया है। इन स्थानों पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं बड़े सेक्टरों की निगरानी वरिष्ठ स्तर के अधिकारी कर रहे हैं।

होटलों के भीतर विशेष कमांड हब भी तैयार किए गए हैं। इन केंद्रों से सुरक्षा कैमरों और अन्य निगरानी प्रणालियों की जानकारी पर नजर रखी जा सकती है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में संबंधित टीमों के बीच तेजी से समन्वय स्थापित किया जा सके, इसके लिए कमांड व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

AI कैमरों से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर

सम्मेलन से जुड़े कुछ प्रमुख स्थानों पर लगाए गए आधुनिक कैमरे केवल सामान्य रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं हैं। इनमें ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो असामान्य गतिविधियों की पहचान में मदद कर सकता है।

उदाहरण के तौर पर किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में असामान्य तरीके से प्रवेश करने या सामान्य गतिविधियों से अलग व्यवहार दिखाई देने पर सुरक्षा टीमों को अलर्ट मिल सकता है। हालांकि, ऐसी तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षा निगरानी में सहायक भूमिका निभाता है और अंतिम निर्णय प्रशिक्षित सुरक्षा अधिकारियों द्वारा लिया जाता है।

होटल स्टाफ की भी हुई जांच

सुरक्षा व्यवस्था का एक अहम हिस्सा होटल कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच भी है। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कर्मचारियों की जांच और पहचान प्रक्रिया को मजबूत किया गया है। साथ ही, डिजिटल एक्सेस सिस्टम के माध्यम से कर्मचारियों की आवाजाही को उनके अधिकृत क्षेत्रों तक सीमित रखने की व्यवस्था की गई है।

डिजिटल की-कार्ड व्यवस्था से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि कर्मचारी केवल उन्हीं मंजिलों या क्षेत्रों में जा सकें, जहां उन्हें काम करने की अनुमति है। इस व्यवस्था से अनधिकृत आवाजाही पर नियंत्रण रखने में सहायता मिलती है।

रूसी प्रतिनिधिमंडल की अपनी सुरक्षा व्यवस्था

राष्ट्रपति पुतिन की विदेश यात्राओं में रूसी प्रतिनिधिमंडल अपने लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा से जुड़े कई पहलुओं पर विशेष नियंत्रण रखता है। भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में भी अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है।

रिपोर्टों में पर्सनल शेफ, खाद्य सामग्री की जांच के लिए विशेष व्यवस्था और अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लेख किया जाता रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति की सुरक्षा से संबंधित वास्तविक प्रक्रियाओं का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया जाता।

कुछ रिपोर्टों में डमी VIPs यानी ऐसे लोगों के इस्तेमाल का भी उल्लेख मिलता है, जिनका उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को और जटिल बनाना हो सकता है। लेकिन इस तरह की व्यवस्थाओं के वास्तविक संचालन और उनके विवरण की आधिकारिक पुष्टि सामान्यतः सार्वजनिक नहीं होती।

तकनीक और मानव निगरानी का संयोजन

BRICS Summit 2026 की सुरक्षा व्यवस्था यह दिखाती है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में अब केवल पुलिस बल और पारंपरिक बैरिकेडिंग पर्याप्त नहीं मानी जाती। इसके साथ AI आधारित निगरानी, डिजिटल एक्सेस कंट्रोल, एंटी-ड्रोन सिस्टम और केंद्रीकृत कमांड व्यवस्था जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

वहीं दूसरी ओर, प्रशिक्षित सुरक्षा अधिकारी इन तकनीकी प्रणालियों के साथ मिलकर काम करते हैं। इस प्रकार तकनीक और मानव निगरानी का संयोजन सम्मेलन की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

दिल्ली में हाई-प्रोफाइल सम्मेलन की तैयारी

BRICS Summit 2026 भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन है। ऐसे में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा के साथ-साथ राजधानी में सामान्य जनजीवन को सुचारु बनाए रखना भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां सम्मेलन स्थलों, होटलों, प्रमुख मार्गों और आसपास के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। कुल मिलाकर, पुतिन की यात्रा के लिए रूसी और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय के साथ दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है। आधुनिक तकनीक और व्यापक मानवीय निगरानी के सहारे BRICS Summit को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

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