CHC रसूलाबाद में फाइलेरिया प्रबंधन प्रशिक्षण, स्वास्थ्य कर्मियों को दिए गए जरूरी दिशा-निर्देश

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रिपोर्ट- विशाल मिश्रा

रसूलाबाद। फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को प्रभावी बनाने और रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (CHC) रसूलाबाद के सभागार में फाइलेरिया प्रबंधन विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयगोविन्द के निर्देशानुसार आयोजित इस प्रशिक्षण में स्वास्थ्य कर्मियों को फाइलेरिया की रोकथाम, उपचार, रोगियों की देखभाल और दिव्यांगता से बचाव के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारियों को फाइलेरिया रोग के प्रति और अधिक जागरूक एवं सक्षम बनाना था, ताकि वे अपने क्षेत्र में फाइलेरिया से प्रभावित लोगों की पहचान कर सकें और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें। इसके साथ ही राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे अभियानों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने फाइलेरिया प्रबंधन की दी जानकारी

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी श्री मारुति दीक्षित, WHO कन्सलटेन्ट डॉ. राहुल, प्रखंड सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक (BCPM) गौरव कुमार तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रसूलाबाद के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दीपक गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस दौरान WHO कन्सलटेन्ट डॉ. राहुल ने स्वास्थ्य कर्मियों को फाइलेरिया रोग के कारणों, इसके फैलने के माध्यम और रोकथाम के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके नियंत्रण के लिए समुदाय की भागीदारी और स्वास्थ्य विभाग के प्रयास दोनों जरूरी हैं।

उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को समझाया कि फाइलेरिया से बचाव के लिए समय पर आवश्यक दवा का सेवन और लोगों में जागरूकता बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों को अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को फाइलेरिया से संबंधित सही जानकारी देने के साथ-साथ निर्धारित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

MDA कार्यक्रम की सफलता पर दिया जोर

प्रशिक्षण के दौरान राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) कार्यक्रम की महत्ता पर विशेष रूप से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य कर्मियों से अपील की कि अभियान के दौरान सभी पात्र व्यक्तियों तक फाइलेरिया रोधी दवाएं पहुंचाने के साथ ही उनके दवा सेवन को भी सुनिश्चित किया जाए।

दरअसल, फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में सामूहिक रूप से दवा सेवन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्हें लोगों के बीच जाकर दवा के महत्व को समझाने और किसी भी तरह की भ्रांति या भ्रम को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

इसके अलावा स्वास्थ्य कर्मियों को यह भी बताया गया कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान केवल दवा वितरण तक सीमित नहीं है। इसके लिए लगातार जनजागरूकता, रोगियों की पहचान, नियमित देखभाल और समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

दो फाइलेरिया रोगियों पर किया गया व्यावहारिक प्रदर्शन

प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में दो फाइलेरिया रोगियों को आमंत्रित कर मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एवं डिसेबिलिटी प्रिवेंशन (MMDP) प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया जाना रहा।

विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य कर्मियों को रोगियों की देखभाल और बीमारी के कारण होने वाली परेशानियों को नियंत्रित करने के उपायों के बारे में जानकारी दी। इसके माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों को यह समझने का अवसर मिला कि फाइलेरिया से प्रभावित मरीजों की नियमित देखभाल किस प्रकार की जानी चाहिए।

MMDP का उद्देश्य फाइलेरिया से प्रभावित लोगों को बीमारी के कारण होने वाली जटिलताओं से बचाना और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान रोगियों की व्यक्तिगत देखभाल, स्वच्छता और आवश्यक प्रबंधन संबंधी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।

व्यावहारिक प्रदर्शन से स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण में बताई गई बातों को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर समझने में मदद मिली। इससे उम्मीद है कि वे अपने कार्यक्षेत्र में फाइलेरिया रोगियों को बेहतर मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा सकेंगे।

CHO और ANM समेत स्वास्थ्य कर्मियों ने लिया प्रशिक्षण

कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रसूलाबाद के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को फाइलेरिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए उनकी भूमिका के बारे में भी विस्तार से बताया गया।

स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को लगातार समुदाय के संपर्क में रहना होगा। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को बीमारी के लक्षणों, बचाव के उपायों और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देना जरूरी है।

इसके साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों से कहा गया कि वे फाइलेरिया रोगियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएं और उन्हें नियमित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ें। इससे रोगियों को समय पर आवश्यक सलाह और उपचार संबंधी सहायता मिल सकेगी।

जन-जागरूकता को बताया अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए आम लोगों की जागरूकता और सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों को अपने क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य कर्मी लोगों को फाइलेरिया से बचाव, MDA के दौरान दवा सेवन और रोगियों की देखभाल के संबंध में सही जानकारी दे सकते हैं। साथ ही, समुदाय में बीमारी को लेकर मौजूद गलत धारणाओं को दूर करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस प्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को और मजबूत करने का प्रयास किया गया।

फाइलेरिया मुक्त समाज के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है, जिसके प्रभाव को कम करने के लिए लंबे समय तक लगातार प्रयास की आवश्यकता होती है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

CHC रसूलाबाद में आयोजित प्रशिक्षण के अंत में विशेषज्ञों ने सभी स्वास्थ्य कर्मियों से फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक आवश्यक जानकारी और दवा पहुंचाना तथा फाइलेरिया से प्रभावित मरीजों को बेहतर प्रबंधन उपलब्ध कराना सामूहिक जिम्मेदारी है।

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