बांदा में अब्बास अंसारी और निकहत की पेशी, आरोप पत्र पर नहीं हो सकी कार्रवाई; 18 सितंबर को अगली सुनवाई

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रिपोर्ट- पंकज त्रिपाठी 

बांदा। मुख्तार अंसारी के बेटे और मऊ सदर सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक अब्बास अंसारी तथा उनकी पत्नी निकहत अंसारी की बांदा न्यायालय में पेशी हुई। दोनों की पेशी चित्रकूट जेल में कथित अवैध मुलाकातों से जुड़े मामले में हुई। हालांकि, मुकदमे में शामिल कुछ अन्य आरोपितों के न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के कारण आरोप पत्र की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। न्यायालय ने अब मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

इसी दौरान विधायक अब्बास अंसारी ने न्यायालय में अपनी सुरक्षा को लेकर प्रार्थना पत्र दिया। उन्होंने अदालत से आगामी तारीखों पर न्यायालय आने के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। अब्बास अंसारी ने अपने प्रार्थना पत्र में खुद की जान को खतरा होने की आशंका जताई है। न्यायालय ने उनके प्रार्थना पत्र को संज्ञान में लेते हुए स्वीकार कर लिया है।

आरोप पत्र की कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी?

जानकारी के मुताबिक, मामले में अब्बास अंसारी और निकहत अंसारी के अलावा कई अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। सुनवाई के दौरान सपा जिलाध्यक्ष फराज खान, चालक नियाज अंसारी और केंद्रीय कारागार आगरा में निरुद्ध जगमोहन न्यायालय में पेश नहीं हुए। इसके चलते आरोप पत्र की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।

इससे पहले भी पिछली सुनवाई के दौरान कुछ आरोपितों के न्यायालय में उपस्थित नहीं होने पर उनके अधिवक्ताओं की ओर से हाजिरी माफी की अर्जी दाखिल की गई थी। न्यायालय ने उस समय अगली तारीख पर सभी आरोपितों को पेश होने के निर्देश दिए थे। हालांकि, इस बार भी कुछ आरोपितों की गैरहाजिरी के चलते मामले की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई।

अब न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की है। उस दिन आरोप पत्र से संबंधित कार्रवाई आगे बढ़ने की उम्मीद है।

अब्बास अंसारी ने मांगी सुरक्षा

पेशी के दौरान विधायक अब्बास अंसारी ने अपनी सुरक्षा को लेकर अदालत का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता मुख्तार अंसारी एक मुकदमे में वादी थे और वह उस मामले की पैरवी कर रहे हैं। इसी सिलसिले में उन्हें न्यायालय में आने-जाने की आवश्यकता पड़ती है।

अब्बास ने आशंका जताई कि अदालत में मुकदमे की पैरवी के लिए आने-जाने के दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने आगामी न्यायिक तारीखों पर सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की।

न्यायालय ने अब्बास अंसारी की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए उसे संज्ञान में लिया है। सुरक्षा को लेकर आगे संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

करीब पांच गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे

अब्बास अंसारी और निकहत अंसारी की पेशी के दौरान न्यायालय परिसर के आसपास लोगों की मौजूदगी रही। दोनों करीब पांच गाड़ियों के काफिले के साथ न्यायालय पहुंचे। अब्बास अंसारी की गाड़ी न्यायालय परिसर के अंदर रही, जबकि काफिले की अन्य गाड़ियां परिसर के बाहर खड़ी रहीं।

पेशी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामले की अगली तारीख 18 सितंबर निर्धारित की गई। न्यायालय में होने वाली अगली सुनवाई में अनुपस्थित आरोपितों की उपस्थिति और आरोप पत्र से जुड़ी कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।

10 फरवरी 2023 को सामने आया था मामला

दरअसल, यह मामला 10 फरवरी 2023 को उस समय सामने आया था, जब चित्रकूट जेल में अब्बास अंसारी और निकहत अंसारी की कथित अवैध मुलाकात को लेकर शिकायत सामने आई थी। शिकायत के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से चित्रकूट जेल में छापेमारी की थी।

छापेमारी के दौरान निकहत अंसारी के जेल अधीक्षक के कमरे में मिलने की बात सामने आई थी। जांच में जेल नियमों के विपरीत उनके लंबे समय तक जेल परिसर में मौजूद रहने का मामला सामने आया था। इसके बाद पूरे प्रकरण की जांच शुरू की गई।

जांच के बाद कर्वी कोतवाली में अब्बास अंसारी, निकहत अंसारी, चालक नियाज अंसारी, तत्कालीन जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर, जेलर संतोष कुमार, डिप्टी जेलर चंद्रकला, जेल कैंटीन संचालक नवनीत सचान, सपा जिलाध्यक्ष फराज खान और शाहबाज समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

जांच के बाद न्यायालय तक पहुंचा मामला

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की ओर से प्रकरण की जांच की गई। इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी। करीब एक साल पहले यह मामला लखनऊ की अदालत से बांदा स्थानांतरित किया गया था। वर्तमान में मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय स्थित भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में चल रही है।

मामले में आरोपितों की पेशी और न्यायालयीन प्रक्रिया अलग-अलग तारीखों पर आगे बढ़ती रही है। वहीं, आरोपितों की गैरहाजिरी के कारण कुछ मौकों पर सुनवाई की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।

18 सितंबर की तारीख पर रहेगी नजर

अब इस मामले में 18 सितंबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। न्यायालय में आरोपितों की उपस्थिति के साथ-साथ आरोप पत्र से जुड़ी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। हालांकि, अगली सुनवाई में क्या निर्णय होता है, यह न्यायालय की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा।

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