फतेहपुर में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से पेंशन लेने के आरोप में तीन के खिलाफ मुकदमा

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रिपोर्ट- रामचन्द्र सैनी 

फतेहपुर: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में दिव्यांग पेंशन योजना से जुड़ा एक मामला सामने आया है। यहां कथित तौर पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी पेंशन का लाभ लेने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। विभागीय जांच में संबंधित दिव्यांग प्रमाण पत्रों को जाली पाए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद विभाग ने तीनों प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया है।

मामला सामने आने के बाद जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग ने संबंधित लाभार्थियों को नोटिस भी जारी किया है। नोटिस के माध्यम से अब तक प्राप्त की गई दिव्यांग पेंशन की धनराशि निर्धारित अवधि में विभागीय कार्यालय में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।

आईजीआरएस के जरिए मिली थी शिकायत

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत आईजीआरएस के माध्यम से मिली एक शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अर्जुन सिंह पुत्र अनन्त प्रताप सिंह, उनके पुत्र सुमित सिंह और उनकी पत्नी सुनीता ने कथित रूप से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ लिया।

शिकायत मिलने के बाद जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद संबंधित व्यक्तियों की दिव्यांगता और उनके प्रमाण पत्रों की वास्तविकता की जांच कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। विभाग की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय और खंड विकास अधिकारी स्तर से सत्यापन कराया गया।

इस सत्यापन का उद्देश्य यह पता लगाना था कि संबंधित व्यक्तियों के नाम जारी किए गए दिव्यांग प्रमाण पत्र वास्तविक हैं या नहीं और क्या वे दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं।

जांच में प्रमाण पत्र जाली पाए जाने का दावा

विभागीय जांच के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की ओर से जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को जानकारी दी गई कि अर्जुन सिंह, सुमित सिंह और सुनीता के नाम से जारी दिव्यांग प्रमाण पत्र जाली हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग ने तीनों प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया।

इसके बाद विभाग की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कार्यालय की ओर से तीनों संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया गया। नोटिस में अब तक प्राप्त दिव्यांग पेंशन की धनराशि को एक सप्ताह के भीतर विभागीय कार्यालय में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकारी योजना का लाभ गलत दस्तावेजों या गलत जानकारी के आधार पर लिया गया है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

तीनों के नाम पर मिली पेंशन की अलग-अलग धनराशि

विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, अर्जुन सिंह के नाम पर कुल 27 हजार रुपये की दिव्यांग पेंशन प्राप्त की गई है। वहीं, उनके पुत्र सुमित सिंह के नाम पर 45,500 रुपये और सुनीता के नाम पर 24 हजार रुपये की पेंशन प्राप्त होने की जानकारी सामने आई है।

इस तरह विभागीय रिकॉर्ड में तीनों के नाम पर प्राप्त पेंशन की कुल राशि 96,500 रुपये बताई गई है। विभाग ने संबंधित लोगों को यह धनराशि वापस जमा करने के लिए नोटिस जारी किया है।

हालांकि, पेंशन की धनराशि वापस जमा करने और प्रमाण पत्र निरस्त किए जाने की कार्रवाई विभागीय स्तर पर की गई है, जबकि फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और अन्य संभावित अनियमितताओं की जांच अब पुलिस स्तर पर जारी है।

कोतवाली पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

विभाग की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर कोतवाली पुलिस ने तीनों लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कथित रूप से फर्जी प्रमाण पत्र कैसे तैयार हुए और उनका इस्तेमाल दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ लेने के लिए किस तरह किया गया।

इसके अलावा, पुलिस संबंधित दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है। प्रमाण पत्र जारी होने की प्रक्रिया, सत्यापन से जुड़े दस्तावेज और पेंशन आवेदन से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा हो सकते हैं।

इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी।

सरकारी योजनाओं में दस्तावेजों के सत्यापन पर जोर

दिव्यांग पेंशन योजना का उद्देश्य पात्र दिव्यांगजनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में किसी अपात्र व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर गलत दस्तावेजों के आधार पर योजना का लाभ लेने की शिकायत सामने आने पर विभागीय सत्यापन महत्वपूर्ण हो जाता है।

दरअसल, सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए लाभार्थियों की पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। वहीं, शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग दोबारा जांच भी कर सकते हैं। फतेहपुर के इस मामले में भी आईजीआरएस पर शिकायत मिलने के बाद संबंधित प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया।

जांच के बाद प्रमाण पत्रों को निरस्त करने और पेंशन की धनराशि वापस लेने के लिए नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद अब कानूनी जांच भी शुरू हो गई है

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