उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर को लेकर संतों का विरोध, उमा भारती ने CM मोहन यादव को लिखी चिट्ठी
Digital UP News Desk
उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर को लेकर विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। मंदिर को मौजूदा स्थान से हटाने की संभावित कार्रवाई के विरोध में साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस मंदिर को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय इसी स्थान पर मंदिर को व्यवस्थित और भव्य स्वरूप दिया जाना चाहिए।
इसी बीच मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी खड़े हनुमान मंदिर के समर्थन में सामने आई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मंदिर के मामले में ऐसा समाधान निकालने की अपील की है, जिसमें विकास कार्य और धार्मिक आस्था दोनों का सम्मान हो। वहीं, गुरुवार को साध्वी हर्षानंद गिरी सहित कई साधु-संत मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना कर मंदिर को मौजूदा स्थान पर बनाए रखने की मांग का समर्थन किया।
खड़े हनुमान मंदिर पर बढ़ रही श्रद्धालुओं की आस्था
उज्जैन को भगवान महाकाल की नगरी के रूप में देशभर में विशेष धार्मिक पहचान प्राप्त है। महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालु अब खड़े हनुमान मंदिर भी पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि समय के साथ इस मंदिर की ख्याति उज्जैन से बाहर भी बढ़ी है और दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालु भी यहां दर्शन कर रहे हैं।
गुरुवार को सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। भक्तों ने पूजा-अर्चना की और भगवान हनुमान के दर्शन किए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि मंदिर को किसी अन्य स्थान पर ले जाने के बजाय इसी जगह पर बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित किया जाना चाहिए।
श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिर का वर्तमान स्थान उनकी धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसके स्थान परिवर्तन का निर्णय लेने से पहले भक्तों की भावनाओं और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
साधु-संतों ने मंदिर पहुंचकर किया पूजन
मंदिर को लेकर चल रही चर्चा के बीच साधु-संतों की सक्रियता भी बढ़ गई है। आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ संत और महामंडलेश्वर भी खड़े हनुमान मंदिर पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में साध्वी हर्षानंद गिरी भी अन्य साधु-संतों के साथ मंदिर पहुंचीं।
उन्होंने भगवान हनुमान की प्रतिमा के सामने बैठकर पूजा-अर्चना की। मंदिर में धार्मिक मंत्रों का उच्चारण किया गया। इस दौरान मंदिर की परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं के उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण के लिए धार्मिक विधि भी की गई।
साध्वी हर्षानंद गिरी ने कहा कि सनातन परंपरा में भगवान राम और हनुमान के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। उन्होंने कहा कि जब भी व्यक्ति किसी परेशानी में होता है तो भगवान हनुमान को याद करता है। ऐसे में मंदिर और धार्मिक आस्था से जुड़े विषय पर संत समाज का आगे आना स्वाभाविक है।
उन्होंने मंदिर को मौजूदा स्थान से हटाने के बजाय वहां स्थायी मंदिर निर्माण की मांग रखी। उनका कहना है कि वर्तमान टेंट व्यवस्था को हटाकर इसी स्थान पर स्थायी और व्यवस्थित मंदिर बनाया जाना चाहिए।
प्रशासन ने क्या कहा?
खड़े हनुमान मंदिर को लेकर जिला प्रशासन पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि मंदिर के पुजारी, साधु-संतों और विभिन्न संगठनों के साथ चर्चा के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन ने यह भी कहा है कि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाएगा और उनकी आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
हालांकि, प्रशासन के इस रुख के बाद भी साधु-संतों, विश्व हिंदू परिषद और मंदिर से जुड़े लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन मंदिर को हटाने के पक्ष में नहीं हैं।
इससे साफ है कि आगे की प्रक्रिया में प्रशासन और मंदिर से जुड़े पक्षों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सभी पक्ष ऐसा समाधान चाहते हैं, जिससे धार्मिक आस्था और शहर के विकास से जुड़ी जरूरतों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
उमा भारती ने CM मोहन यादव को लिखी चिट्ठी
इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की एंट्री ने चर्चा को और तेज कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर खड़े हनुमान मंदिर के संबंध में बीच का रास्ता निकालने की अपील की है।
उमा भारती ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि वे स्वयं उज्जैन से जुड़े हुए हैं और उज्जैन शहर तथा यहां के धार्मिक स्थलों की गरिमा को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस मामले का ऐसा समाधान निकाल सकते हैं, जिससे धार्मिक आस्था और विकास दोनों साथ चल सकें।
उन्होंने अपने पत्र में सड़क चौड़ीकरण से जुड़े एक पुराने उदाहरण का भी उल्लेख किया। उमा भारती के अनुसार, भोपाल में शिवराज सिंह चौहान की सरकार के समय कमलापति पार्क के आगे सड़क चौड़ीकरण की योजना के दौरान धार्मिक स्थल को प्रभावित किए बिना योजना में बदलाव किया गया था। उनका कहना है कि विकास और आस्था को साथ लेकर चलना संभव है और उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर के मामले में भी इसी तरह का समाधान तलाशा जा सकता है।
मंदिर के पुजारी ने भी स्पष्ट किया अपना रुख
वहीं, खड़े हनुमान मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने कहा कि अभी तक जिला प्रशासन की ओर से उन्हें किसी प्रकार का लिखित पत्र नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की ओर से अब तक उनसे सीधे तौर पर कोई चर्चा नहीं की गई है।
पुजारी ने कहा कि यदि आगे प्रशासन उन्हें बातचीत में शामिल करता है तो साधु-संतों और समग्र हिंदू समाज की ओर से जो निर्णय लिया जाएगा, वही उनका निर्णय होगा। इससे यह स्पष्ट है कि मंदिर प्रबंधन भी पूरे मामले में संत समाज और श्रद्धालुओं के सामूहिक रुख के साथ खड़ा है।
विकास और आस्था के बीच समाधान की उम्मीद
खड़े हनुमान मंदिर को लेकर सामने आ रहे बयानों से फिलहाल यही संकेत मिल रहा है कि मामला बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। एक तरफ प्रशासन विकास कार्यों और व्यवस्थाओं को लेकर समाधान तलाश रहा है, वहीं दूसरी ओर साधु-संत और श्रद्धालु मंदिर को उसी स्थान पर बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन और मंदिर से जुड़े पक्षों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण होगी। यदि सभी पक्ष आपसी सहमति से ऐसा रास्ता निकालते हैं, जिसमें मंदिर की धार्मिक पहचान सुरक्षित रहे और शहर की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास भी हो सके, तो विवाद का शांतिपूर्ण समाधान संभव है।
फिलहाल उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी है। संत समाज के समर्थन और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी के बाद इस मामले पर सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

