कानपुर में जर्जर धर्मशाला पर कब्जे का आरोप, ट्रस्ट ने डीएम से कार्रवाई की मांग
रिपोर्ट- हनुमन्त सिंह पिन्टू
कानपुर। शहर में पुराने और जर्जर भवनों को लेकर चिंता के बीच रामबाग स्थित श्री स्वामी लीला शाह मेमोरियल ट्रस्ट की धर्मशाला का मामला सामने आया है। ट्रस्ट पदाधिकारियों का कहना है कि धर्मशाला का भवन काफी जर्जर हालत में है और उसकी स्थिति को देखते हुए समय रहते आवश्यक मरम्मत एवं निर्माण कार्य कराया जाना जरूरी है। इसी बीच भवन के एक कमरे पर कथित कब्जे को लेकर विवाद भी सामने आया है। ट्रस्ट ने इस मामले में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और प्रशासन से आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार, धर्मशाला का भवन लंबे समय से उपयोग में है, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। भवन के जर्जर होने के कारण ट्रस्ट से जुड़े लोगों को मरम्मत और अन्य आवश्यक कार्य कराने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रस्ट का कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत और जरूरी निर्माण कार्य नहीं कराया गया तो आने वाले समय में समस्या और बढ़ सकती है।
कमरे को लेकर क्या है विवाद?
ट्रस्ट अध्यक्ष हीरालाल खत्री के मुताबिक धर्मशाला के बाहरी हिस्से में स्थित एक कमरे में पूर्व में भावनदास गोदवानी और उनके पुत्र आरके गोदवानी को कुछ समय के लिए केयरटेकर के तौर पर रहने की अनुमति दी गई थी। ट्रस्ट का कहना है कि उस समय कमरे का इस्तेमाल देखरेख के उद्देश्य से किया जा रहा था।
ट्रस्ट पदाधिकारियों के अनुसार, भावनदास गोदवानी और आरके गोदवानी के निधन के बाद कमरे को खाली कराने के संबंध में उनके परिजनों को सूचना दी गई। ट्रस्ट का आरोप है कि इसके बावजूद कमरे को खाली नहीं किया गया और कथित तौर पर उस पर कब्जा कर लिया गया। इस मामले में ट्रस्ट ने शशांक गोदवानी और श्रेयांश गोदवानी पर कमरे पर जबरन कब्जा करने का आरोप लगाया है।
हालांकि, यह आरोप ट्रस्ट की ओर से लगाए गए हैं। मामले में संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
जर्जर भवन की मरम्मत में आ रही परेशानी
ट्रस्ट के पैरोकार शरद लोचन शुक्ला का आरोप है कि कमरे को लेकर चल रहे विवाद के कारण धर्मशाला के जर्जर हिस्से में आवश्यक निर्माण और मरम्मत का काम प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि ट्रस्ट भवन की स्थिति सुधारना चाहता है, लेकिन कमरे को लेकर उत्पन्न विवाद के चलते काम आगे बढ़ाने में कठिनाई आ रही है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों के मुताबिक धर्मशाला का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को सुविधा उपलब्ध कराना है। यदि भवन की स्थिति ठीक हो जाए तो इसका उपयोग गरीब और असहाय लोगों के लिए किया जा सकता है। इसलिए ट्रस्ट चाहता है कि प्रशासन पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाए, ताकि भवन की मरम्मत और उपयोग से जुड़ी व्यवस्था को बेहतर किया जा सके।
आसपास के लोगों ने भी जताई चिंता
रामबाग क्षेत्र में स्थित इस पुराने भवन को लेकर आसपास रहने वाले लोगों में भी चिंता बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पुराने और जर्जर भवनों की समय-समय पर जांच तथा आवश्यक मरम्मत बेहद जरूरी है। खासकर ऐसे भवनों में जहां लोगों का आना-जाना होता है, वहां सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
ट्रस्ट का कहना है कि भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। इसके साथ ही भवन की तकनीकी जांच कराकर यह भी निर्धारित किया जाना चाहिए कि कौन से हिस्से तत्काल मरम्मत योग्य हैं और किन हिस्सों में पुनर्निर्माण की जरूरत है।
नगर निगम और केडीए में भी की गई शिकायत
ट्रस्ट पदाधिकारियों के अनुसार, धर्मशाला की स्थिति और कमरे से जुड़े कथित कब्जे को लेकर पहले भी संबंधित विभागों से शिकायत की जा चुकी है। ट्रस्ट का दावा है कि इस संबंध में नगर निगम और कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के समक्ष भी मामला रखा गया था।
हालांकि, ट्रस्ट के मुताबिक अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके बाद अब पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई कराने तथा कथित कब्जे के मामले का समाधान कराने की मांग की गई है।
डीएम से जांच और कार्रवाई की मांग
ट्रस्ट अध्यक्ष हीरालाल खत्री समेत अन्य पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन संबंधित विभागों के माध्यम से भवन की स्थिति का निरीक्षण कराए और यदि भवन वास्तव में जर्जर पाया जाता है तो सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी कदम उठाए जाएं।
इसके अलावा ट्रस्ट ने कमरे पर कथित कब्जे की शिकायत की जांच कराने की भी मांग की है। ट्रस्ट का कहना है कि यदि कमरे पर अनधिकृत कब्जा पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि धर्मशाला की संपत्ति का उपयोग उसके निर्धारित उद्देश्य के लिए किया जा सके।
प्रशासनिक कार्रवाई से साफ हो सकती है स्थिति
फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई का इंतजार है। जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद संबंधित विभागों की ओर से भवन की स्थिति और कमरे से जुड़े विवाद की जांच की जा सकती है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भवन की वास्तविक स्थिति क्या है और कमरे पर कब्जे को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
दरअसल, कानपुर जैसे बड़े शहर में पुराने भवनों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए जर्जर भवनों की समय पर पहचान, तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत से जुड़े कदम उठाना जरूरी है। वहीं, किसी संपत्ति को लेकर विवाद होने की स्थिति में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से समाधान किया जाना भी आवश्यक है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी के स्तर से मामले में संज्ञान लेकर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। इससे एक ओर धर्मशाला भवन की सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, वहीं दूसरी ओर कमरे पर कथित कब्जे से जुड़े विवाद का भी नियमानुसार समाधान होने की उम्मीद है।

