कानपुर देहातः युवक की मौत के बाद सड़क जाम, पुलिस पर लापरवाही के आरोप; छह घंटे से धरने पर ग्रामीण

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रिपोर्ट- विशाल मिश्रा 

कानपुर देहात। एक युवक की मौत के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। युवक की मौत के बाद परिजनों और सैकड़ों ग्रामीणों ने मूसानगर-रायपुर मुख्य मार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारी सड़क पर टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। करीब छह घंटे तक जाम और प्रदर्शन जारी रहने से यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। वहीं, स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल के साथ फायर विभाग की गाड़ियां भी तैनात की गईं।

परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि युवक को पहले से ही कुछ लोगों से खतरा था और इस संबंध में पुलिस से कई बार सुरक्षा की मांग की गई थी। इसके बावजूद समय रहते पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। परिवार का दावा है कि उन्होंने करीब सात बार पुलिस अधीक्षक कार्यालय जाकर सुरक्षा की मांग की थी। परिजनों के मुताबिक, परिवार पहले भी एक बेटे को खो चुका है और उस मामले में एक मुख्य आरोपी अभी फरार है। ऐसे में फरार आरोपी से संभावित खतरे को लेकर परिवार लगातार पुलिस से सुरक्षा की मांग करता रहा था।

मारपीट के बाद युवक ने दी थी पुलिस को तहरीर

परिजनों के मुताबिक, घटना से कुछ दिन पहले यानी 4 तारीख को दबंगों ने युवक के साथ मारपीट की थी। इसके बाद युवक की ओर से पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की गई थी। परिवार का आरोप है कि शिकायत मिलने के बावजूद मामले में अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बजाय दबाव बनाकर दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया गया।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की धमकी देकर समझौते के लिए दबाव बनाया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अब मारपीट की घटना के तीन दिन बाद युवक की मौत होने के बाद पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

परिवार का कहना है कि यदि उनकी शिकायत पर समय रहते कार्रवाई होती और युवक को सुरक्षा मिलती, तो संभव है कि परिस्थितियां अलग होतीं। इसी मांग को लेकर परिजन शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

प्रदर्शन कर रहे परिजनों और ग्रामीणों ने क्षेत्राधिकारी (CO), थाना प्रभारी (SO) और चौकी इंचार्ज के निलंबन की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान CO संजय सिंह के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। ग्रामीणों का कहना है कि जब परिवार लगातार सुरक्षा की मांग कर रहा था, तब शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए था।

परिजनों ने पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने और कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।

छह घंटे बाद मौके पर पहुंचे ASP

घटना के बाद सड़क पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों के जमा होने और लगातार जाम रहने के कारण प्रशासन के सामने स्थिति को नियंत्रित करने की चुनौती बनी रही। करीब छह घंटे बाद अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से बातचीत कर उनकी पूरी बात सुनी।

परिजनों ने ASP के सामने अपनी शिकायतें और अब तक पुलिस से की गई सुरक्षा की मांग का विवरण रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। इसके साथ ही परिवार ने पूर्व की घटना और फरार आरोपी से कथित खतरे का भी हवाला दिया।

ASP के मौके पर पहुंचने के बाद प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर जाम समाप्त कराने का प्रयास किया गया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक परिजन अपनी मांगों पर अड़े हुए थे।

DM और SP के न पहुंचने से ग्रामीण नाराज

प्रदर्शनकारियों में इस बात को लेकर भी नाराजगी दिखाई दी कि कई घंटे तक जाम और धरना चलने के बावजूद जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर नहीं पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि मामला गंभीर है और परिवार पहले से खतरे की आशंका जताता रहा है। इसलिए जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर परिजनों से सीधे बातचीत करनी चाहिए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो धरना जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के आने तक धरना जारी रखने की बात भी कही है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक रूप से क्या कदम उठाए जाएंगे, यह स्पष्ट होना बाकी है।

भारी पुलिस बल तैनात, स्थिति पर नजर

जाम और प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा तनाव की स्थिति को देखते हुए फायर विभाग की गाड़ियां भी मौके पर रखी गई हैं। प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो और यातायात को जल्द सामान्य कराया जा सके।

वहीं, सड़क पर शव रखे होने के कारण मूसानगर-रायपुर मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। आसपास के इलाकों से आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े परिजन

मृतक के परिजनों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई से अधिक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच है। परिवार चाहता है कि युवक की मौत से पहले हुई मारपीट, पुलिस को दी गई तहरीर, कथित समझौते और सुरक्षा की मांगों की जांच की जाए।

परिजनों का आरोप है कि यदि पहले की शिकायतों पर कार्रवाई की गई होती तो शायद स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। इसलिए वे चाहते हैं कि जांच में यह भी स्पष्ट किया जाए कि पुलिस को कब-कब शिकायत दी गई और उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई।

दूसरी ओर, प्रशासन के सामने तत्काल चुनौती जाम खुलवाने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों को भरोसे में लेना है। क्योंकि सैकड़ों ग्रामीणों के मौके पर डटे रहने से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में अधिकारियों के लिए बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना महत्वपूर्ण होगा।

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