बहराइच में आंगन में घुसे तेंदुए ने 3 साल की बच्ची को दबोचा, ग्रामीणों ने पीछा कर बचाया

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Digital UP News Desk

बहराइच: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में जंगल से सटे एक गांव में तेंदुए के घर के आंगन तक पहुंचने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई। रविवार देर शाम आंगन में खेल रही तीन वर्षीय बच्ची पर तेंदुए ने हमला कर दिया। तेंदुआ बच्ची को लेकर जंगल की ओर जाने लगा। इसी दौरान आसपास मौजूद ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ गई। ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए तेंदुए का पीछा किया, जिसके बाद वह बच्ची को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया।

घटना के बाद ग्रामीणों ने बच्ची को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। बच्ची की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया। बाद में हालत को देखते हुए बच्ची को लखनऊ रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।

आंगन में खेल रही थी तीन साल की बच्ची

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना बहराइच के नानपारा रेंज क्षेत्र में बघौली जंगल से सटे खटकन पुरवा गांव की है। रविवार देर शाम तीन वर्षीय बच्ची लाडो अपने घर के आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान जंगल की तरफ से आया तेंदुआ घर के आंगन तक पहुंच गया।

परिजन और ग्रामीण कुछ समझ पाते, उससे पहले ही तेंदुए ने बच्ची को अपने कब्जे में ले लिया और उसे लेकर जंगल की दिशा में भागने लगा। अचानक हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए शोर मचाया और तेंदुए का पीछा करना शुरू कर दिया।

ग्रामीणों के पीछा करने पर बच्ची को छोड़ा

ग्रामीण लगातार तेंदुए के पीछे जाते रहे। बताया गया कि खेलावन के खेत के पास बांध किनारे पहुंचने पर तेंदुआ बच्ची को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। इसके बाद ग्रामीणों ने बच्ची को सुरक्षित उठाया और उसके परिजनों को घटना की जानकारी दी।

बच्ची को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नानपारा ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार किया। बच्ची की हालत गंभीर देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजनों के अनुसार, बाद में बच्ची की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे लखनऊ रेफर करने की सलाह दी।

परिवार में मचा हड़कंप

घटना की जानकारी मिलते ही बच्ची के परिवार में हड़कंप मच गया। परिजन बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे और उसके उपचार में जुट गए। बच्ची की बुआ विजमा देवी के अनुसार, उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे लखनऊ रेफर किया गया है।

घटना के बाद गांव में भी चिंता का माहौल है। जंगल के बिल्कुल नजदीक बसे खटकन पुरवा गांव में तेंदुए का घर के आंगन तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से निकलकर जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों की तरफ आने की घटनाओं से लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिवार चिंतित हैं।

वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग

तेंदुए के हमले की घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखी जाए और उसे पकड़ने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

ग्रामीणों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि जंगल से सटे गांव में तेंदुआ आबादी वाले इलाके तक पहुंच गया। उनके मुताबिक, यदि समय रहते ग्रामीणों की नजर तेंदुए पर नहीं पड़ती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

ऐसे में ग्रामीणों ने वन विभाग से इलाके में निगरानी बढ़ाने, तेंदुए की मौजूदगी का पता लगाने और लोगों को आवश्यक सावधानियां बताने की मांग की है।

जंगल से सटे गांवों में बढ़ी चिंता

बहराइच का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र और जंगल से जुड़ा हुआ है। जंगल से सटे गांवों में अक्सर ग्रामीणों को जंगली जानवरों की गतिविधियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे इलाकों में आबादी और वन क्षेत्र की दूरी कम होने के कारण वन्यजीवों के गांव की ओर आने की आशंका बनी रहती है।

हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर जंगल से सटे गांवों में सुरक्षा व्यवस्था और वन्यजीव निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग को ऐसे इलाकों में नियमित निगरानी करनी चाहिए, ताकि जंगली जानवर आबादी वाले हिस्सों तक न पहुंच सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल के आसपास रहने वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। शाम और रात के समय बच्चों को अकेले बाहर नहीं भेजना चाहिए। साथ ही, घर के आसपास पर्याप्त रोशनी रखने और किसी जंगली जानवर के दिखाई देने पर उसके करीब जाने के बजाय तत्काल संबंधित विभाग को सूचना देने की सलाह दी जाती है।

बच्ची के उपचार पर परिजनों का ध्यान

फिलहाल परिवार का पूरा ध्यान बच्ची के इलाज पर है। घटना के बाद ग्रामीण भी उसके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। प्राथमिक उपचार के बाद लखनऊ रेफर किए जाने की जानकारी से परिजन चिंतित हैं, लेकिन समय पर ग्रामीणों की मदद मिलने से बच्ची को अस्पताल पहुंचाया जा सका।

इस घटना में ग्रामीणों की तत्परता महत्वपूर्ण रही। तेंदुए के पीछे जाने के बाद बच्ची को सुरक्षित वापस लाया गया और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाया गया।

अब ग्रामीणों की नजर वन विभाग की अगली कार्रवाई पर है। वे चाहते हैं कि इलाके में तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि कर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

क्या है ग्रामीणों की मांग?

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें हैं कि जंगल के आसपास निगरानी बढ़ाई जाए, तेंदुए की गतिविधियों का पता लगाया जाए और आबादी वाले क्षेत्रों में उसकी आवाजाही रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। इसके अलावा ग्रामीणों को वन्यजीवों से बचाव के संबंध में जागरूक करने की भी मांग की गई है।

बहरहाल, तीन वर्षीय बच्ची पर तेंदुए के हमले की यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। बच्ची को बेहतर उपचार के लिए लखनऊ रेफर किए जाने के बाद परिजन उसके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। वहीं, ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

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